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अब अकेली भाभी इतने खीरों का क्या करेंगी … भैनचोद ये सोच कर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया.मैंने जल्दी से अपनी उंगली हटा ली और कहा- ये क्या कर रही हो आंटी?आंटी बोलीं- कुछ नहीं, तू इसमें अपनी उंगली डाल और खुजली कर.

उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे एकदम नंगी कर दिया और मुझे उसी सोफे पर लिटा दिया. हिंदी सेक्स बीपी बीएफ उनके स्तन बहुत सुन्दर लग रहे थे, जिन पर भूरे निप्पल क़यामत ढा रहे थे.

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मेरा शॉर्ट्स भी ऐसा था, जिसमें से मेरे लंड का आकार साफ पता चल रहा था. आंटी मेरी तरफ वासना से देखते हुए बोलीं- तुम किसी को मत बताना, मैं तेरी भूख मिटाने को रेडी हूँ, पर अभी नहीं. अन्दर से एक ख़ुशी भी थी कि शहजाद मेरे लिए अपने दिल में कितनी केयर रखता है.

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उसने लगातार दो तीन बार में अपना पूरा 8 इंच का लंड गांड के अन्दर डाल दिया.

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उसने मुझे घर में अन्दर बुलाया और बोली- आप पहले बाथरूम में जाइए और नहा कर आइए, फिर बैठिए. वो लोग काफी दिनों से डिमांड कर रहे थे कि हम अपनी सेक्स लाइफ की मदभरी कहानियों को उनके साथ अन्तर्वासना पर शेयर करें. अबकी बार मैंने काफी सारा तेल उसकी चूत और अपने लंड पर लगाया फिर मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत पर सैट किया और एक धक्का मारा.

मगर उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हें कैसा काम है?मैंने बिना कोई जवाब दिए भाभी के दोनों बाजुओं को पकड़ लिया. उसने अब धारा को चूमना भी छोड़ दिया था और बेसब्री से उसके ब्लाउज़ को निकाल फेंकने की तरकीब ढूँढ रहा था. मैंने फिर थोड़ा आराम से एक और झटका मारा, तो मेरा आधा लंड उसके अन्दर तक घुस गया.

उधर उसने मुझे नहलाया, साफ किया और वापस कमरे में लाकर बेड पर लिटा दिया.

मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए बोला- अभी तो कुछ और पीने का मन है।नेहा शर्माती हुई बोली- अच्छा क्या पीने का मन है?उसके इतना पूछते ही मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके गालों पर व गर्दन पर किस करने लगा. मैंने हम तीनों के गिलासों में व्हिस्की के पैग बना लिए और पानी भी मिला दिया. मुझे आपके ईमेल और मैसेज का इंतजार रहेगा।मेरा ईमेल आईडी नीचे दिया हुआ है।[emailprotected]हॉट गर्ल ओरल सेक्स कहानी जारी रहेगी।.

जैसे ही उसने मुझे देखा, बिना कुछ कहे रूपाली ने मुझे एक जोर थप्पड़ लगा दिया।मौसी- आखिर तुम भी बाकी सभी मर्द की तरह ही निकले। मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया, तुमको अपने पति की जगह दी, अपने पति से धोखा किया; लेकिन तुमने एक चूत के लिए मुझसे धोखा किया. अब मैंने लिंग को दोबारा से चूत के द्वार पर रख दोनों हाथों से नेहा के हाथ पकड़ लिए और झटके से नेहा की चूत में धक्का दे मारा. मेरी चुदाई की कहानी के अगले भाग में मैं आपको अपनी बेटी के यार को फांसने की कोशिश करूंगी.

शेखर को अब समझ आ चुका था कि धारा की चूचियों को सजीव रूप में बिना किसी दीवार के भोगने के लिए उसे उसके ब्लाउज़ को ऊपर सरका कर निकलना पड़ेगा।उसने भी बिना कोई देरी किए धारा के ब्लाउज़ को ऊपर की ओर सरका कर पूरी तरह से बाहर निकाल दिया.

लेकिन अभी मेरा उन दोनों को कुछ कहना ठीक नहीं था, इसी लिए मैं शांत रही और उन पर नज़रें बनाए रखीं. तो दोस्तो, इस बार मैं अपने जेठ से चुद गई थी।Antarvasna Audio Story सुनें.

हिंदी सेक्स बीपी बीएफ फिर अंजू भाभी ने रूम में खाना लाकर बेटे को दिया और बोलीं- जल्दी से खाना खाकर सो जा!वो मुझसे इशारा करती हुई बोलीं- तुम बाहर जाओ. बस अनायास ही मेरे होंठ उत्तेजना और शर्म के मारे कांपने लगे और इसी कश्मकश में पता नहीं कब, मैंने उनके अंडे जैसे बड़े गुलाबी सुपारे को मुँह में ले लिया.

हिंदी सेक्स बीपी बीएफ घोड़ी की पोजीशन की बजाए चाची मेंढक की पोजीशन में आ गई अर्थात घुटने तो मोड़े रखे लेकिन अपने चूतड़ों को अपनी एड़ियों पर टिका लिया. एक रात उन्हें चोदने के बाद मेरा मन किया कि मैं उनके साथ सुहागरात मनाऊं.

दोस्तो, अभी इस देसी लड़कियों की चुदाई कहानी में केवल इतना ही … आगे की सेक्स कहानी के लिए जुड़े रहिये.

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मैंने उससे पूछा- ये क्या था?वो बोली कि ये किस था … मुझे तुम्हारा रिएक्शन देखना था कि क्या होता है?मुझे काफी मजा आया था, तो मैं बोला- अच्छा तो लगा मगर ये अचानक वाला थोड़ा सा हैरान कर गया. अंजू भाभी मेरी गोद में बैठकर मुझे खाना खिला रही थीं और मैं अंजू भाभी को. आप मुझसे दोस्ती करना चाह रहे थे ना … तो मैं भी आपसे दोस्ती करना चाहती हूँ.

सीधी बात यह है कि उसका छोटा सा लण्ड था, जब तक मेरी चुदास जगे, तब तक वो डिस्चार्ज हो जाता था. कभी मैं अपनी सीट पर सो जाता, कभी उठ जाता, कभी अपनी पुस्तकें पढ़ने लगता, कभी कुछ खा लेता, कभी इधर-उधर टहलने लगता. ज्योति चलते हुए पीछे पूल तक गई, तो वहां पहले से चिराग पूल में पैर लटकाए बैठा ज्योति का इंतजार कर रहा था.

पता नहीं धारा क्या जवाब देगी, कहीं वो भी मुझे बाक़ी मर्दों की तरह बस वासना का भूखा तो नहीं समझ लेगी?शेखर के दिमाग़ में ये सवाल कौंधने लगे थे और उस वक़्त उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि स्क्रीन की तरफ़ देखे, भले ही धारा ने कोई जवाब दिया भी हो!थोड़ी देर तक अपनी नज़रें स्क्रीन से बचाए रखने के बाद शेखर ने अब वापस स्क्रीन की तरफ़ देखा तो फिर से वही रात वाली घटना घटी.

चाची ने थोड़ा घूमकर उसे चुप कराने की कोशिश की लेकिन वह जोर जोर से रोने लगा. उसने झट से मुझे अपने बिस्तर पर खींच लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ सटा कर रस चूसने लगी. क्योंकि मैं खुद गांड में लंड लेने के आदी हो चुकी थी इसलिए मुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ बल्कि मजा ही आया.

उसके बाद मैंने ताई की टांगों को फैलाया और अपना खड़ा लौड़ा सीधा ही ताई की चुत में पेलते हुए पूरा डाल दिया. उसने अपने होंठ खोले और पेंट के ऊपर से ही विराज के कड़क होते लंड पर दांत गड़ा दिए. मैंने दूर से उन्हें फोन किया तो अंजू भाभी ने गेट खोला और फोन पर कह दिया कि अन्दर आ जाओ.

मेरी मां का जो अंग मुझे सबसे ज्यादा उत्तेजित कर रहा था, वो मां की बगलें थीं. कोई मेरी मटकती गांड ताड़ रहा था तो कोई कमर और कोई मेरी छाती का उभार देख रहा था.

जब प्रभा ने एकदम से मुझे ना कह दिया, तो मैंने भी उसको कुछ नहीं बोला और वापस अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया. रघु ने शेखर द्वारा रात को फैलाए हुए रायते यानि शराब की बोतल, ग्लास और इधर-उधर बिखरे चखने को साफ़ करके बिस्तर की चादर को भी बदल दिया था. तो मैंने बिना सोचे दरवाजा धक्का दे के खोल दिया।दरवाजा थोड़ा अटक के अंदर की तरफ खुल गया।अंदर का सीन देख के तो मेरे होश ही उड़ गए।मजा आ रहा है ना इस वर्जिन Xxx स्टोरी में?कमेंट्स और मेल करके बताएं.

अब मैंने भी दुनियादारी छोड़ दी और उसकी शर्ट के ऊपर से उसके दूध को मसलने लगा.

वो बार बार यही बोलती जा रही थीं- आह आह उई आह … मेरी जान मुझे अपना बना ले. चपरासी की जीभ से चल रही चुत की मालिश की मस्ती में डूबी सोनम की अचानक लम्बी चीख निकल गयी क्योंकि मानस ने अपनी तीन उंगलियां उसकी खुली हुई भोसड़ी में घुसा दी थीं. उसके बाद …हॉट लव सेक्स कहानी के पिछले भागचाची भी अपनी चूत मरवाना चाहती थीमें आपने पढ़ा कि चाची ने मेरे साथ चुदाई का पूरा कार्यक्रम बना लिया था.

मेरे मुँह से आज तक कभी सिसकारी नहीं निकली थी, पर आज पता नहीं कितना मज़ा आ रहा था. पिंकी लंड पर उछल उछल कर गांड पटकने लगी और मस्ती से चुदवाने लगी।अब दोनों तरफ से बराबर झटके लगने लगे और ऐसा लगने लगा जैसे दोनों एक-दूसरे को चोद रहे हों।पिंकी ने बताया कि रोमिल के लंड में इंफैक्शन हो गया है, जिस कारण उसने 5 दिनों से नहीं चोदा।अब पिंकी जल्दी जल्दी उछलने लगी और आहह हाँह उहह हह करके चूत से पानी छोड़ दिया.

उनका लंड चूसकर मेरी चूत तो पहले से ही बहुत गर्म हो गई थी तो मैंने उन्हें पकड़कर किस करना शुरू कर दिया और उनके हाथ अपने चूतड़ों पर रखवा दिए. उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ जमा दिए थे और अपनी जीभ से मेरी जीभ को चूसने लगी थी. उसकी नजर जैसे ही मानस पर गयी, उसने मानस को आंख मारी और अपने होंठ दांतों से चबा दिए.

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दूसरे रोज़ प्रभा ठीक होकर स्कूल आई और सबसे पहले उसने मुझको धन्यवाद बोला.

लेकिन मैं उसे तड़पाना चाह रहा था, तो मैंने पहले उसके होंठ पर अपने होंठ रखकर उसे चूसने लगा. वो बोली- मैं अपनी एक सहेली के रूम पर हूँ … हम लोग तुम्हारा यहीं इंतजार कर रहे हैं. मेरे हाथ खराब हैं इसलिए मैं तुमसे कह रही हूँ, नहीं तो मैं खुद ही कर लेती.

वो किलक कर बोलीं- अरे हां अभी तेरी बारी है मेरे शेर, अब देख मैं तेरी कैसे मुठ मरवाती हूँ. हालांकि उन चारों लड़कों में मुझे विशाल बहुत पसंद आया था तो उसके बहुत मनाने के बाद मैंने हाँ कर दी. कटरीना कैफ का बफमगर ऐसे आपका नाम लेना क्या सबको अजीब सा नहीं लगेगा!वो बोली- ठीक है, पर अकेले में तुम मुझे मेरे नाम से ही बुलाया करो.

अगर उस पल ‘एक लड़की को देखा, तो ऐसा लगा …’ वाला गाना सुनने को मिल जाता, तो जो होता … समझो मेरी वही दशा हो गई थी. जब कहीं से कुछ मदद नहीं मिली, तो मेरे बड़े चाचा सामने आए और मम्मी से बोले कि भाभी आप अपना हिस्सा मुझे बेच दो और पैसे लेकर कहीं और चले जाओ.

वो मेरे पैरों को वो जोर से पकड़े हुआ था, जिससे मैं हिल भी नहीं पा रही थी. मेरी कामुकता स्टोरी के पिछले भागमेरी बेटी ने अपने यार का लंड चूसामें अब तक आपने पढ़ा था कि शहजाद मेरी बेटी को अपना लंड चुसवा कर मेरे पास किचन में पानी लेने आया. कभी कभी भाभी का मूड ठीक नहीं होता था, तो वो मुझे बुला लिया करती थीं.

फिर मैं मॉल में गयी और वहां पर भी मैंने अपने पहनने के लिए कुछ वेस्टर्न कपड़े लिये. एक बात और … हमारी गाली हम लड़कियों तक सीमित रहती है, वहीं लड़के अपनी गाली लड़कों तक इस्तेमाल करते हैं. एक ऑटो में किसी तरह समीर घुसा तो उसमें पहले से चार लोग उधर और इधर भी तीन लोग बैठे थे.

आखरी दो-चार धक्के देकर मैं भी उसकी चूत में झड़ा और उसके ऊपर पसर गया.

मगर इसका एक फ़ायदा शेखर को और हुआ, अब तक शेखर की हथेली में धारा की चूत का आधा हिस्सा था लेकिन धारा के पैर फ़िलाने की वजह से अब उसकी हथेली पूरी तरह से उसकी चूत को अपनी गिरफ़्त में ले चुकी थी. पिंकी आह उम्मह ऊह हह हाँहह करके लंड लेने लगी।मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और होंठों को चूसने लगा और झटके मारने लगा।अब पिंकी भी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी और हहह आहह हहह करके अपनी गांड चलाने लगी।मैंने पीठ के बल लेट कर पिंकी को इशारा किया तो वो मेरे लंड पर बैठ गई और उछलने लगी।मेरा लंड सट्ट सटृ अंदर बाहर होने लगा.

दोस्तो … मैं जानता हूँ कहानी थोड़ी लंबी हो गयी और सेक्स का पार्ट भी कम रखा है, पर मैं चाहता था कि आप खुद में वो सब कुछ महसूस करें, जो मैंने महसूस किया था. अब मैं अपने घर से उस लड़की को कभी-कभी फोन लगा लेता था और इधर उधर की बातें करने लगा था. अब तुम बस उसे तैयार रखो और जैसे ही कोरोना का माहौल थोड़ा बहुत ढीला पड़ता है हम मिल लेंगे.

दोबारा से जब अवनि ने फिर से अपना पैर लगाया तो मैंने उसकी तरफ देखा … वो मुस्करा दी. वह कह रही थी- आह … अब मत सताओ … प्लीज जल्दी से डाल दो, मुझसे रहा नहीं जा रहा. उसके साथ होने से मेरा भाव बढ़ जाता इसलिए मैंने भी समीर को ही अपने साथ ले जाने का फैसला किया.

हिंदी सेक्स बीपी बीएफ अब मैंने भाभी को घोड़ी बनाकर उनकीचुत में पीछे से लौड़ा पेलाऔर चूत चुदाई में जुट गया. जब मैंने उसको अपने शरीर में ऊपर से बांधा, तो वो इतना झीना कपड़ा था कि उसमें मेरा शरीर पूरा दिख रहा था.

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उसने मेरी टांगें उठा कर मेरी छाती पर कर दीं और बोला कि टांगें यूं ही किये रहना. फिर भी उसने मुझे ताव दिला दिया था, तो अब मुझे उसके सामने अपना हुनर दिखाना ही था. संगीता फुल गर्म हो चुकी थी … व्हिस्की का नशा भी हम तीनों पर छाने लगा था.

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए कहा- तू ऐसे मत शर्मा … मुझे पता है कि तू मेरी बात मानेगी. अंकल ने मेरे बाल सहलाए और कहा- प्यार से कर न मेरी जान … तुझे बहुत मजा आएगा. समांथा सेक्सअब मैंने उसे अपने ऊपर इस तरह से बिठाया कि उसकी चुत मेरे मुँह पर आ गई थी और खुद को आगे की तरफ झुका कर अपना लंड उसके मुँह में लगा दिया था.

मैंने पूछा- इतनी सी उम्र में तुझे चुदने का शौक कैसे लग गया!उसने हंस कर बताया कि उसके मामा उसे कैसे बुर चुदाई का स्वाद दे चुके हैं.

किस तरह की बातें ये शायद आप समझ रही होंगी, लेकिन आपसे उस विषय पर सीधे-सीधे बातें करने में मुझे कुछ हिचक हो रही थी. लेकिन उन्होंने मुझे रोक दिया और मुझसे कहने लगे- प्लीज भाभी, अभी नहीं.

सफेद काली बड़ी बड़ी मूंछें थीं और गाल पर विलन जैसे गड्डे या धब्बे थे. मैं मन ही मन सोचने लगा कि कोई इतना मूर्ख भी कैसे हो सकता है कि ऐसी खूबसूरत बीवी को भी ना चोदे. जैसे जैसे मैं धक्का लगाता, उनका प्यार और बढ़ता जाता … जिसका अंदाज मैंने उनके नाख़ून का मेरे पीठ पर गड़ने से लगाया.

मैंने उसके बारे में मालूम किया तो वो मेरे पड़ोसी के यहां किराए से रहने आई थी.

जैसे ही मैं उनके छेद में अपनी जीभ डालता, वह ऊपर को उठ जातीं और अपने आप बोलने लग जातीं- आह रहने दो … रहने दो क्या कर रहे हो. मैं सहमा हुआ वहां से तुरंत निकल गया लेकिन उन्हें शायद इस बात का भी अंदाजा लग गया था कि मैंने सब कुछ देख लिया है. मैंने कहा- तो क्या हुआ?भाभी ने सब बताया कि उनकी फ्रेंडशिप ज्यादा नहीं चली, बस 2 महीने ही चली थी.

सुहाग्रात कैसे मनाई जाती हैउधर राजेश मेरी चूचियों को गाउन के ऊपर से ही अपने मुँह में भर भर कर पी रहा था. मैंने कहा- अरे यार तुम्हारे विचारों के बारे में पूछना क्या कोई गलत बात है?वो फिर से बोली- हां मुझे समझ आ रहा है कि तुम्हारे पूछने का मतलब क्या था.

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मैं- चाची, फिर आपने मेरे साथ ये सब क्यों किया?चाची- उस रात मैं बहक गई थी. हुआ ये कि शेखर ने चूत पर रखे अपने हाथ के अंगूठे को दाने पर केंद्रित कर दिया और अपनी बीच वाली उंगली को धीरे से नीचे ले जा कर धारा की चूत के दरवाज़े के अंदर डाल दिया. अब जब तक लॉक डाउन रहा मित्रो, पोर्न भाभी की चूत का लॉक तो खुला ही रहेगा.

मैंने उसको पलंग पर सीधा लेटा कर उसकी चूत में लंड पेला और फुल स्पीड में चोदने लगा. फिर कुछ देर बाद मेरी आंख खुली और मैंने देखा कि मेरा बुल्ला टाइट हो गया था. मैंने उनकी नाक पर अपनी नाक लगाई और मैंने नीचे से झटके मारने के लगा.

[emailprotected]सेक्स टॉक कहानी का अगला भाग:लंड चुत गांड चुदाई का रसिया परिवार- 8. अब एक हफ्ते के लिए मेरे पापा और मेरे दोनों भाई मौसी के यहां शादी अटेंड करने जाने वाले थे. उधर से अब मैं पेटीकोट में हाथ डालकर चूत को सहलाने लगी और बोली- आह्ह … जेठ जी क्या मस्त लंड है आपका.

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इससे वो एकदम से तड़प रही थीं- इस्स रवि … अब नहीं रहा जाता आहहा … रवि प्लीज … फक मी. अलीगढ़ में कोरोना कर्फ्यू के कारण मेरा, भाभी की दुकान पर कोल्ड ड्रिंक पीने आना जाना बढ़ गया था.

मैं अभी उनसे कुछ और पूछता, तब तक भाभी ने कुछ सोचा और मेरी तरफ देखने लगीं.

फिर उसने जैसा जया के साथ किया था, वैसा ही वो चमेली के साथ करने लगी. स्नेहा- बाप रे … दीदू आप तो कमाल हो पर आपने मॉम का भोसड़ा कैसे देख लिया दीदू?नेहा- यार रात को कई बार छत पर कभी अपने घर के गार्डन में चली जाती थी. मैंने अपने लंड को समझाया कि मान जा साले लौड़े … थोड़ी देर में ये गांड चुत सब तू ही चूसने वाला है.

लेडीज की चड्डी बनियान फिर मैंने पीछे से उसके बाल पकड़े और लंड को मुँह के अन्दर गले तक ठांस दिया. तो वो कहने लगा- बीबी जी, आप बहुत ही ज़्यादा सुंदर हो और आपको मैं बहुत पसंद भी करता हूँ.

शेखर भैया … शेखर भैया उठिए … दिन चढ़ आया है, ऑफ़िस नहीं जाना क्या?” रघु ने अगली सुबह झकझोर कर शेखर को उठाया. स्नेहा ने हंसते हुए कहा- हाय जानेमन … लगता है आग दोनों तरफ बराबर लगी है. तो कभी रीमा ढीला सा टॉप पहन कर जाती और झुक झुक कर अपने मम्मों के दीदार निखिल को कराते हुए उसे गर्म करने की कोशिश करती.

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मैंने आंटी के करीब आकर उनके बदन पर हाथ फेरा और कहा- आंटी, मुझे मालूम है कि वो बुड्डा आपको मजा नहीं देता है. लेकिन मेरे कुछ करने से पहले ही मां के व्यव्हार में परिवर्तन आने लगा. ससुराल से वापस आते हुए मैंने रास्ते से एक बोतल ले ली ताकि रात को आराम से पी कर मस्ती कर सकें.

वो बाहर से मेरी गांड चाट रहा था और उंगली अन्दर बाहर करने में लगा था. तू गांड मरवाता है मनोज?” मुस्कान के साथ आश्चर्यचकित होते हुए उन्होंने पूछा.

वो इतना अधिक उतावला हो गया था कि कभी मेरी एक चूची को पीता तो कभी काटता.

[emailprotected]फैमिली ग्रुप सेक्स कहानी का अगला भाग:परिवार में बेनाम से मधुर रिश्ते- 3. अब मुझसे रहा ना गया और मैंने उनको वैसी ही मुद्रा में जकड़ लिया और मुँह चूत पर लगा कर सूंघने लगा. मैंने उसको धीरे से अपनी ओर कमर पकड़ कर खींचा तो वो मेरी छाती पर सर रखकर लेट गई.

मैंने पूछा- हम लोगों के पास दो तीन घंटे का समय है ना?मैं अपनी किसी सहेली के यहाँ जा रही हूँ, यह कहकर आई हूँ. फिर रिज़वाना बोली- अब तक तो मेरे मुँह ने ही इसका स्वाद लिया था, आज मेरी चुत भी पहली बार लंड का स्वाद लेगी. अब लंड सट्ट सटृ अंदर तक जाने लगा और उसकी बच्चेदानी में टकराने लगा।उसकी चीख निकल पड़ी- आहह हहह आहह ऊईईई ऊईई ईईई!और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।अब मैंने लंड निकाल लिया और उसके होठों पर फेरने लगा वो लंड को चूसने लगी।फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर झुका दिया और उसकी गान्ड में थूक लगा दिया और लंड को झटके से घुसा दिया.

उसी शाम को जब मैं कपड़ा लेने गयी, तो पहले उसने मुझसे अपना लंड चुसवाया और सूट दे दिया.

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मयंक के तेज धक्कों के कारण संगीता के चूतड़ मयंक की जांघ पर फट फट पटपट की आवाजें निकाल रहे थे और नीचे चूत में से फच फच पूच पूच की आवाज आ रही थी. मैं- असल में देखना है?फ़लक मेरे लोअर में खड़े लण्ड की ओर देखते हुए धीरे से बोली- मुझे नहीं पता. फिर क्या था जैसे ही मैं राजी हुआ कि उन तीनों ने मुझे ले जाकर कर बेड पर धकेल दिया.

ज्योति- हट बेशर्म … सब लोग हैं यहां बस में … कोई देखेगा तो क्या सोचेगा?चिराग- बस इतना प्यार करती है मुझसे? और रही बात किसी के देखने की … तो कोई हमें नहीं देख रहा.

आंटी गांड उठाते हुए बोलीं- मैं तो तुझे बच्चा समझ रही थी, पर तू तो सच में बड़ा मादरचोद निकला … आह साले चोद अपनी आंटी को चोद हरामजादे … अन्दर तक पेल. कुछ देर बाद मैं मौसा की अलमारी में अपने पहनने के लिए कपड़े देखने लगा. शेखर ने धारा के बदन को थोड़ा सा अलग करते हुए एक हाथ से उसके कंधे पर टिके साड़ी के आँचल को सरका कर नीचे गिरा दिया.