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पर मजाक मस्ती का भी समय होता है और हर वक़्त लड़ना अच्छी बात नहीं है। अब मैं टीवी देख रहा हूँ कोई आवाज़ मत करना ओके. लहंगे सेक्सीटीवी चला कर देख लो…!वैसे भी हम आंटी के फ्लैट में अक्सर टीवी देखा करते थे, लेकिन आज मैं मैच देखने नहीं मोनी साथ मैच खेलने के मूड में था। मैं अन्दर गया तो देखा कि मोनी पहले से ही टीवी देख रही है।मुझे देखते ही बोली- क्या लेने आए हो?मैंने मजाक में बोला- दे पाओ.

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!प्रिय पाठकों आपकी मदमस्त सुधा की रसभरी कहानी जारी है। आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपकी सुधा बैठी है।[emailprotected]gmail.! कितना मोटा और कड़क लौड़ा था। मैंने उसे अपने हाथों में ले लिया।मेरे हाथ लगाते ही वह मचल गया कि मुझे अपने होंठों में लेकर प्यार करो।मैं क्या करती, उसकी तरफ बढ़ना पड़ा क्योंकि मेरी मुनिया भी जीजाजी का प्यार चाह रही थी। जैसे ही मैंने लौड़े तक पहुँचने के लिए गोद से जीजाजी का सर हटाया और ऊपर आई, जीजाजी ने स्कर्ट हटा कर मेरी बुर पर हाथ लगा दिया और चूम कर उसे जीभ से सहलाने लगे।ओह.

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दो दोस्त इरफ़ान और सलमान लम्बे अरसे बाद मिले।सलमान- और सुना यार ! वो तेरी गर्लफ़्रेन्ड सलमा कैसी है?इरफ़ान- वो अब मेरी गर्लफ़्रेन्ड नही रही…सलमान बीच में टोकते हुए- अच्छा किया तूने जो उसे छोड़ दिया! माँ की लौड़ी रण्डी थी… हम सबने खूब चोदा था साली को!इरफ़ान- मादरचोद. यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएँ हमन तमन्ना है कि किसी को रुलाएँ हमजिसको जितना याद करते हैंउसे भी उतना याद आयें हम !हैलो दोस्तो, कैसे हो आप लोग, उम्मीद करता हूँ कि सबको मिल रही होगी और जिसको नहीं मिल रही होगी. दो दोस्त इरफ़ान और सलमान लम्बे अरसे बाद मिले।सलमान- और सुना यार ! वो तेरी गर्लफ़्रेन्ड सलमा कैसी है?इरफ़ान- वो अब मेरी गर्लफ़्रेन्ड नही रही…सलमान बीच में टोकते हुए- अच्छा किया तूने जो उसे छोड़ दिया! माँ की लौड़ी रण्डी थी… हम सबने खूब चोदा था साली को!इरफ़ान- मादरचोद.

जब वह शांत हुई तो मैंने अपनी उँगलियों को निकाल कर देखा जो कि उसके कामरस से सराबोर थी।तभी मेरे दिमाग में न जाने कहाँ से एक फिल्म का सीन आ गया. !आरोही- बताती हूँ बाबा पर वादा करो हमेशा मेरा साथ देते रहोगे और मॉम-डैड को कभी इन बातों का पता नहीं चलना चाहिए…!राहुल- ओके बहना… वादा रहा। अब जल्दी बताओ ना यार प्लीज़…!ओके फ्रेंड्स… आज का भाग खत्म हुआ। उम्मीद है आपको पसन्द आया होगा.

पर क्या खो गया?सलोनी- व्ववओ… मेरी ब्रा नहीं मिल रही… यही तो थी…आदमी ने उसकी चूची को पकड़ लिया- अरे मेरी जान… इनको कैद नहीं कर न.

‘हाय’ करो…!जूही बड़ी नजाकत से साहिल के पास जाकर हाथ आगे बढ़ा कर उसको ‘हैलो’ कहती है। साहिल भी उसका हाथ पकड़ कर चूम लेता है।जूही- इन दोनों को मैं जानती हूँ, ये यहाँ क्या कर रहे हैं?रेहान- व वो दरअसल ये अन्ना के आदमी हैं फिल्म में इनका भी काम है, इसलिए यहाँ आए हैं।जूही- ओह्ह वाउ.

तभी अचानक सलमा के आंसू निकल आये!इरफ़ान ने पूछा- क्या हुआ?सलमा बोली- कुछ नहीं, हमारा पड़ोसी पप्पू याद आ गया! उसे भी यही स्टाइल पसंद था, मज़ा तो आता है, पर दर्द बहुत होता है. प्रणाम पाठको, मैं सब की तरह अन्तर्वासना की बहुत बड़ी फैन हूँ। मेरी उम्र छबीस साल है। एक शादीशुदा चुदक्कड़ औरत हूँ और शादी से पहले स्कूल और फिर कॉलेज की एक चुदक्कड़ ‘माल’ रही हूँ।मुझे चुदाई बेहद पसन्द है। मैं चुदाई बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकती। मैंने कई तरीके के लंड डलवाए, चूसे और चाटे हैं, लेकिन जब बारी आई मुझे लाईसेंस प्राप्त लंड मिलने की. बाकी वक्त अपने दोस्तों के साथ ही रहता है। उसे अपने जिस्म के जलवे दिखाने का मुझे कोई मौका ही नहीं मिलता.

30 बजे थे, उसने अपनी छोटी लड़की को अपने साथ में लिया जो एक साल की थी और उसका बैग मैंने पकड़ लिया।मैं बोला- तेरा बड़ा लड़का नहीं आ रहा क्या?तो वो बोली- उसका स्कूल है, वो अपने दादी के पास ही रहेगा।हम लोग 8 बजे बस-स्टैंड पहुँचे और 8. जुबान अंदर घुसाने की कोशिश, अब उसकी योनि का छेद थोड़ा और खुल गया और मुझे जुबान का अगला हिस्सा अंदर घुसाने में आसानी हुई. !क्यों तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?”मैंने कहा- नहीं मामी जी।मामी ने मुस्कुरा कर कहा- चलो आज से मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन जाती हूँ.

?? चलो ना…किशोरी का बच्चा भी जाग गया था… तो मैं नलिनी भाभी के साथ बाहर आ गया।मैं- और सुनाओ भाभीजी, क्या चल रहा है?नलिनी- कुछ नहीं… मैं तो वहाँ ऋतु और रिया के साथ थी.

!”मैंने उसकी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ाते हुए कहा- मैं आपको उससे भी ज्यादा चाहता हूँ।कह कर मैंने उसके लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में घुसा लिया।उफ़. !अन्ना आपने आदमी लेकर वहाँ से चला जाता है। साहिल और सचिन बस जूही को देख रहे थे और रेहान कुछ सोच रहा था। आरोही अब भी वहीं खड़ी थी। रेहान सीधा उस रूम में जाता है जहाँ वो तीनों थे।राहुल- रेहान ये सब क्या है? इन लोगों ने मुझे सब बता दिया है तुम बदला लेने के लिए इतना गिर जाओगे. वो बोली- अंकित, ये मेरी बहुत व्यक्तिगत बातें हैं, किसी को नहीं बताना! मैं तुम्हे ये सब बता रही हूँ कि तुमने रात सब कुछ देख लिया था.

मेरी भी शरम खत्म हो गई थी।पता नहीं मैं इतनी बेशर्म कैसे हो गई कि मेरे शौहर के सामने आनन्द के पास नंगी बैठी थी।शायद यह सब आनन्द की चुदाई का कमाल था।आनन्द सलीम को बोला- देख बे. ‘अब बस करो… छोड़ दो ना यार… ऐसा मत करो… शाहनवाज… हट जाओ ना…’पर उसका लंड मेरी गाण्ड के छेद पर आ चुका था, उसके लण्ड का स्पर्श चूतड़ों में बड़ा आनन्द दे रहा था. मगर आज तो सुबह आते ही यह कार्यक्रम सेट हो गया था…इसीलिए हद हो गई यार…पहले मदन लाल नीलू के कपड़े देख गया…ना जाने क्या क्या सोच रहा होगा…और अब बिल्कुल नई स्टाफ, वो भी शादीशुदा.

सॉरी हाँ लेकिन यह जरूरी है…!साहिल- यार सचिन, यह साली जूही तो बहुत सवाल पूछ रही है रेहान को टेन्शन में डाल दिया.

गब्बर- बसंती, चड्डी उतार !वीरू- नहीं बसंती, इस कुत्ते के सामने चड्डी मत उतारना।बसंती- वीरू तू डर मत, मैंने चड्डी पहनी ही नहीं है।***गब्बर रात के अँधेरे में बसंती से चुदाई कर रहा था।गब्बर- बोलो मेरी जान बसन्ती, मज़ा आया?औरत- बहुत मज़ा आया कुत्ते, लाइट जलाकर देख। मैं बसंती नहीं. ट्रीन्न्न्न्न… ट्रीन्न्न्न्न…मैं सोचने लगा कि अभी कौन आ गया… प्रणव तो रात को आने वाला था…कहानी जारी रहेगी।[emailprotected].

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!”ओह दीदी, पढ़े-लिखों की बातें…!” चमेली की बात पर सब लोग खूब हँसे।चमेली अपनी बात पर सकुचा गई।कामिनी ने जीजाजी को नंगा करके उनके कपड़े हैंगर करने के लिए चमेली को दे दिए और खुद घुटनों के बल बैठ कर जीजाजी के लण्ड को चूम लिया।मैंने पूछा- अरी यह क्या कर रही है क्या यहीं…!अरे नहीं, यह नंगे दरबार के अभिवादन करने का तरीका है; चलो तुम दोनों भी अभिवादन करो.

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की ध्वनि निकलने लगी। मैं उस ध्वनि को रोकने के लिए अपने पर काबू पाने की कोशिश कर ही रही थी कि मेरा जिस्म अकड़ गया तथा मेरी योनि के अन्दर से एक तेज़ लहर निकली जिस के कारण मेरे मुँह से आईईईईई…. अगर मैंने तुमको टच भी किया तो वो मेरी लाइफ बर्बाद कर देगा जी।जूही- मन तो करता है, तुझे अभी जान से मार दूँ, पर तेरे जैसे गंदे आदमी के खून से मेरे हाथ ही गंदे होंगे। अब बाहर जाकर तेरे जो मन में आए वो झूट बोल और यहाँ से निकल जा. सामने चूत और खुद के पास खड़ा लंड और वापिस जा रहा है।पर मुझे पता था कि आग उसमें भी लगी हुई है, तभी उसने पानी माँगा था।खैर.

उसका लौड़ा था ही ऐसा कि बस मेरी चूत फड़फड़ाने लगी और हिम्मत अपने आप आ गई।दीपाली- यार तेरी बातें सुनकर चूत की हालत पतली हो गई. वरना मैं तुझसे दूर कहाँ!तभी ‘तड़ाक’ की आवाज़ के साथ एक तमाचा मेरे गालों पर पड़ा और अंकिता बोली- साली मादरचोद. थोड़ी देर बाद सलमा का फिर से मन हो जाता है- सुनो जी जेल खुली है, कैदी को अंदर घुसाओ ना !इरफ़ान बेचारा हिम्मत करके फिर से चालू हो जाता है और पसीने से लथपथ होकर लेट जाता है.

मेरी गति से सखी जल के मध्य, छप-छप आवाजें होती थी,मुख से निकली मेरी आह ओह, मेरे सुख की कहानी कहती थीमादक अंगों की लिसलिसी छुअन, रग-रग को भाव विभोर कियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !.

मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए तो वो और चिल्लाने को हुई तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और जोर जोर से चोदने लगा. कल तुम कैम पर आना।सलीम ने उसको एड करके लॉग-ऑफ कर दिया और दूसरे दिन रात में 10 बजे हम ऑनलाइन आए।पता नहीं लेकिन उसकी उम्र 35 सुन कर मुझे अच्छा नहीं लगा।सलीम से कहा- रेहान से बात हुई है. साजन ने उठाकर मुझे सखी, पलंग के नीचे फिर खड़ा कियाखुद बैठा पलंग किनारे पर, मेरा एक-एक वस्त्र उतार दियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !.

ये सब नेचुरल हैIशिशिर बहुत खुश था। उसने मुझे हर तरह से रगड़ा था, मैं भी खुश थी कि मेरे तीनों छेद खूब भरे थी. उसको तो चूत चटवाने का ही चस्का लग गया था, उसने कहा- तुमको दलिया डालने की जरूरत नहीं है, वो डालती जाएगी और मैं उसको साफ़ करूं. !मैं तो इसकी माँ को चोदना चाहता था यहाँ तो ताजा बुर भी मेरा इंतजार कर रही है।मेरे तो मन में लड्डू फूटने लगे, चलो भगवान देता है तो छप्पर फाड़ के देता है.

मैं जानता हूँ आरोही ने तुम दोनों के साथ मिल कर कोई प्लान बनाया है, पर तुम दोनों ध्यान रखना, मेरी नज़र तुम दोनों पर ही है। आरोही के साथ डबल-गेम खेलने की कोशिश मत करना। मैं तुम दोनों को अच्छे से जानता हूँ. पहली बार में गया नहीं, तो उसकी बीवी अपनी पनीयाई बुर से चिकनाई निकालकर ज़ेनी की गांड और अपने पति के लंड में चुपड़ने लगी.

मेरी तो जैसे जान ही निकल गई।राज डर गया और मुझे चूमने लगा और बोला- बस थोड़ा और…, उसके बाद फिर मजा आएगा. बहुत खुजली हो रही है आ उफ़फ्फ़…!राहुल ने 69 का पोज़ बनाया और अपना मुँह चूत पर टिका दिया। आरोही ने जल्दी से लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी।पाँच मिनट भी नहीं हुए थे कि राहुल ने अपना कंट्रोल खो दिया।राहुल- आ. मैंने अपनी जीभ निकाली और नीलू की चूत को चारों ओर से चाटा…नीलू- आआह्ह्ह्ह्ह… हाआआ… ओह्ह्ह… इइइइइ…वो खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाई, उसके मुख से तेज सिसकारियों की आवाज निकलने लगी.

अब तेरी गाण्ड मारकर तुझे एकदम पक्की चुदक्कड़ बना देता हूँ ताकि तू कभी भी किसी को भी खुश कर सके।दीपाली- सर आप की बात तो ठीक है मगर आपका लंड बहुत मोटा और बड़ा है.

देखने लगे।तो दोस्तो, अगली कहानी में बताऊँगा कि पूजा बेटी को कैसे चोदा और चोदने के बाद क्या हुआ।मेरी यह कहानी आपको कैसी लगी मुझे इसके बारे में मुझे मेल करें![emailprotected]. मेरी शादी इसी वर्ष हुई है।मेरी उम्र 22 साल और पत्‍नी की 20 साल है।हम अभी बच्‍चा नहीं चाहते हैं।संभोग के दौरान मेरी पत्‍नी कंडोम का इस्‍तेमाल पसंद नहीं करती, वो कहती है कि कंडोम से प्राकृतिक स्पर्श की कमी खलती है. सॉरी दोस्त भाग यहीं रोकना पड़ेगा। अब आगे का हाल तो अगले भाग में ही पता चलेगा, लेकिन आज का ट्विस्ट कैसा लगा? मज़ा आया ना.

कई चूतों से पानी छूट पड़ा होगा और मेरे कुछ दोस्तों ने मेरी और रूचि की तरह चुदाई करने की कोशिश भी की होगी।लेकिन असल मुद्दा था कि अंकिता ने रूचि के साथ ऐसी क्या बकचोदी की थी. हम दोनों का यह नियम था कि एक बार में सिर्फ एक छेद की चुदाई करते थे, पर आज मैंने कहा- चाचू दोनों छेदों को अपने लौड़े की दुआ दो.

चाची बोली- अब कितना तड़पाएगा मेरे पहलवान! चोद दे मुझे! ऊह ह्ह हाँ चोद दीईई ऊऊह!मैंने चाची की एक टांग अपने कंधे पर और दूसरी टांग को बेड पर रखा और अपने लंड को उनके दाने के ऊपर रख क़र धक्का दिया और मेरा आधा लंड उनके चूत के बालों को चीरता हुआ उनके चूत में समां गया. !और इतना बोल कर रोने लगा और दीदी के सामने हाथ जोड़ कर बोला- दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे ग़लती हो गई। आगे ऐसा नहीं करूँगा।मैंने कहा- दीदी आपने जो देखा वो किसी से मत बोलना, नहीं तो मैं मर जाऊँगा।दीदी ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ रख कर कहा- चुप हो. !राहुल- लेकिन जूही तुम्हें दर्द हो रहा होगा यार रेहान तुम भी ना क्या हाल बना दिया इसका ऐसे कोई करता है क्या…!रेहान- अरे यार अब तुमको कैसे समझाऊँ पहली बार में ऐसा होता है। ये ठीक है कुछ नहीं हुआ इसको.

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!आरोही- तो आ जाओ अन्ना… मेरी चूत भी प्यासी है… मिटा दो मेरी चूत की प्यास…!अन्ना जल्दी से लौड़ा चूत पर टिका देता है और एक जोरदार झटका मारता है, एक ही बार में पूरा लौड़ा चूत में समा जाता है।आरोही- आह उफ़फ्फ़ अन्ना खुद तो तुम कोयले जैसे काले हो उह लौड़ा भी बहुत गरम है तेरा… आ.

मैं तो पागलों की तरह ऊपर से उस मस्त लंगड़ी घोड़ी की गांड देख रहा था कि अचानक मेरे मुँह से लार की धार निकल कर ठीक उनकी नंगी गांड पर गिरी. इतना नाटक नहीं करना जी वरना अन्ना तुमको बहुत तकलीफ़ देगा जी अब चुपचाप हमारा बात मान लो, वरना वो पेपर मेरे पास होना जी. साजन ने अपने अंग को सखी, मेरे स्तन पर फेर दियारगड़ा दोनों चुचूकों पर बारी-बारी, तो आग लगाय दियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !.

!रेहान की आवाज़ सुनकर आरोही मटकती हुई वहाँ आई, उसको दर्द था, पर दर्द को सहन करके बड़ी अदा के साथ आई थी और आते ही अन्ना को ‘हैलो सर’ बोल दिया।अन्ना- हैलो हैलो जी बैठो जी. इसे पहन कर देख लो और कहा- मुझे तुम साड़ी भी पहन कर दिखाओ। मैं देखना चाहता हूँ कि तुम साड़ी में क़ैसी लगती हो. होटल की सेक्सीसब बताओ…!आरोही उसे सारी बात बता देती है कि कैसे उसने रेहान के साथ चुदाई की और हेरोइन बन गई है। सब कुछ बता दिया। बस राहुल के साथ जो किया वो नहीं बताया।जूही- ओह माय गॉड फिल्म साइन कर ली और मुझे पता भी नहीं चला दीदी प्लीज़ मुझे भी हिरोइन बनना है.

क्योंकि उसे तो चलानी आती नहीं थी और वो जाती तो कैसे लाती और मेरे साथ अगर बैठ कर निकलती तो उसे और लोग भी नोटिस करते।मैंने उसके दिमाग की दाद तो तब दी. जिह्वा उसकी अंग के अन्दर, और अन्दर ही जा धंसती थीमदहोशी के आलम में उसने, सिसकारी लेने को विवश कियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !.

दोनों हाथों में दो स्तन, पीछे से आकर पकड़ रखेउड़ने को आतुर पंछी को, शिकारी ने जैसे जकड़ रखेकंधे चूमे, गर्दन चूमी, कानों को दांतों से खींच लियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !. !”मैंने उसके लटकते मम्मों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। फिर उसे भी मज़ा आने लगा।15 मिनट तक चोदने के बाद मैंने उसकी गाण्ड में अपना लंड घुसेड़ दिया, तो वो ज़ोर से चीखी, आऐयईईई माआअरर्र्र डाला मैं मर गई. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद, सुमित ने मेरी चड्डी उतार दी और मेरी जाँघों के बीच बैठ कर मेरी चूत चाटने लगा.

अब बोल ऐसा कौन सा जरूरी काम है जो तूने अर्जेंट बुलाया है?राहुल- अरे यार तू गाड़ी चला, बस मैं बताता हूँ सब. ! तू यहीं रहेगा, इसी कमरे में… ओके…!साहिल- मैं कुछ नहीं करूँगा, मुझे जाने दो। वो दो हैं सचिन अकेला उनको कैसे लाएगा. समझ गया न…!मेरा लण्ड उसके कूल्हों के स्पर्श से खड़ा हो चुका था, मुझे भी नहीं समझ आ रहा था कि आज यह क्या हो रहा है।मेरा लण्ड का स्पर्श का अहसास उसे भी हो चुका था इसलिए वो भी अटपटा महसूस कर रही थी, पर उसने मुझे शो नहीं होने दिया कि उसे ऐसा कुछ लग रहा है।मैंने 3-4 बार में सही किया, वो बहुत खुश थी और उसने मुझे प्यार से मेरे चेहरे पर चूमा और बोली- लव यू भैया.

पर थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर तन गया, मैंने फिर हिला लिया।अगले दिन मैं ढंग से फुटबॉल नहीं खेल पाया। अब तो मैं हर घड़ी भाभी को ही देखता रहता था.

कान के साथ लण्ड भी खड़ा हो गया था…मधु- भैया… भाभी अंदर कमरे में हैं… यहाँ उनका कोई दोस्त ही बड़ा सर है… वो क्या बताया था… हाँ मनोज नाम है उनका…मैंने दिमाग पर ज़ोर डाला… उसने बताया था कि कॉलेज में उसके विनोद और मनोज बहुत अच्छे दोस्त थे, दोनों हमारी शादी में भी आये थे।मैंने मधु को कमरे में देखने को बोला. !वो बेड के नीचे दिखाते हुए- तो फिर यह क्या है।मैं- पता नहीं।वो- इतना भी मुझे बुद्धू मत समझ… चल अभी भोलापन छोड़ दे और असलियत में आ जा!मैं- कैसी असलियत?तो वो झट से मेरे ऊपर आई और मुझे चूमने लगी।तो मैं बोला- मनु ये गलत है।वो- मुठ मारना सही और यह गलत… इसमें गलत क्या है.

मैंने चाची के पैर छुए और फिर खड़ा हुआ और बोला- चाची, कितने साल हो गये थे आपसे मिले, और आप तो हर दिन और सुंदर होती जा रही हो !इतना कहते ही मैंने चाची को अपनी बाहों में भर कर गले लगा लिया. वरना मैं तुझसे दूर कहाँ!तभी ‘तड़ाक’ की आवाज़ के साथ एक तमाचा मेरे गालों पर पड़ा और अंकिता बोली- साली मादरचोद. लेकिन उस दिन मैं तो हैरान रह गई जब अलीशा ने मुझसे गर्ल्स टॉयलेट के पीछे ले जाकर कहा- निधि, आज अगर तुम्हारे घर पर कोई सेटिंग हो सके तो हमें मिलना है.

आप जैसा चाहो मैं सब करूँगी।मेरी बात सुन कर उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ गई।मैं नीचे ज़मीन पर पड़ी थी।वैसे ही मेरे ऊपर आकर उसने मेरे साथ चुदाई की और बोला- जल्दी ही उसकी फेंटेसी पूरी होने वाली है. हा… मादरचोद… चोद… डाल…आआ…आअ, मर… गईईई…”उसका लावा निकल गया। फिर भी मुझे अपनी आग को भी शांत करना था। 2 मिनट बाद वो फिर से मेरा साथ देने लगी।पूरे कमरे में ‘फच-फच’ की आवाज़ के साथ गालियाँ भी निकल रही थीं।वो बोली- चोदता रह, माँ के लौड़े. ?जूही- ओह रेहान, तुम कहाँ चले गए, सभी जगह ढूँढ़ कर ही यहाँ आई हूँ और ये सब कौन है और संजू, अंकित तुम यहाँ क्या कर रहे हो?रेहान धीरे से बोलता है, इसने कुछ नहीं सुना शायद सब नॉर्मल रहना.

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!”मैंने उसकी चूत फाड़ डाली थी। उसकी चूत से खून निकल आया। उसकी चूत फट चुकी थी। मैंने उसकी सील तोड़ दी। वो दर्द के मारे कराह रही थी और मैंने उसे प्यार से सहला रहा था। वो बेचारी दर्द से बिलबिला रही थी।मैंने अपने लण्ड को हिलाने की कोशिश की तो वो बोली- बाबूजी, अब नहीं अब निकाल दो प्लीज़. !”बिना बुर से लौड़ा निकाले वे बड़ी सफाई से पलटे और मैं नीचे और वे ऊपर और लण्ड मेरी बुर में…, जो अब थोड़ी नरम हो गई थी। उन्होंने मेरे होंठ अपने होंठ में ले लिए और बुर से लौड़ा निकाल कर एक जबरदस्त शॉट लगा दिया।उनका पूरा लौड़ा सरसराते हुए मेरी बुर में घुस गया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !दर्द से मैं बेहाल हो गई. !”मैंने उसके मम्मों को चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर ऐसा ही उसके ऊपर लेटा रहा और उसे पकड़ कर 3-4 धक्के मारे और पूरा डाल दिया।वो रोने लगी और खून की धार से मेरा लौड़ा रंग चुका था और वो इतनी तेज़ चीखी, आआआ आआऐययईईई ईमाआआअ न्न्नरनणणन् माआअर डाला सैंडी मेरी पूरी फट गई रे….

!मेरा मन बहुत ही खुश था, पर मुझे नहीं मालूम था कि इतनी जल्दी मौका मिल जाएगा।रात को मामी ने मेरा बिस्तर, एक ही पलंग पर लगा दिया। रात को सोते समय मुझे लगा कि कोई मेरे लौड़े को हिला रहा है, तो मैंने देखा मामी मेरे लौड़े को चूस रही हैं।मेरा लौड़ा सख्त होने लगा लेकिन मैंने सोने का नाटक जारी रखा।वो शायद ये समझ गई थीं, मुझे सताने के लिए मामी भी सोने लगीं।तो मैं बोला- मामी और करो ना. !’ करता हुआ फिर ज़ोर का झटका लगाया और उसका पानी निकल गया और मुझ पर गिर गया।उसका लण्ड निकल आया, अब लौड़ा मुरझा रहा था।वह मुझे चूमता हुआ बोला- आज तुमने मुझे जितना मजा दिया ना, उसका जवाब नहीं. बुला पुची!उसका भूरे रंग का दाना दूर से ही चमक रहा था, उसकी चूत के दो द्वारों को खोलते ही लालिमा चमक उठी जैसे बादलों के बीच बिजली चमक रही हो।वो मेरे लिंग को खींचने लग गई, उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया, उसकी मादक सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। ‘हूं…आ…आह.

!यह सुनकर रेहान की आँखों में चमक आ गई क्योंकि वो तो सुबह ही आरोही पर फिदा हो गया था और उसे इस बात का अफ़सोस भी था कि राहुल कैसा भाई है, जो अपनी बहन को चोदना चाहता है, पर दिल में ख़ुशी भी थी कि उसको एक कच्ची कली बिना मेहनत के चोदने के लिए मिल रही है।बस दोस्तों आज के लिए इतना ही अब आगे आप देखना कि राहुल अपने इरादों में कैसे कामयाब होता है और रेहान क्या करेगा.

दोस्तो, यह कहानी मेरे एक दोस्त की जुबानी सुनाई जाएगी, इस कहानी से तीन किरदार हैं मैं रोहित, मेरा दोस्त शमीम और उसकी बीवी इशरत जो पुणे में रहते हैं।अब कहानी शमीम की जुबानी…पहले मैं आपको इशरत के बारे में कुछ बता दूँ।इशरत 28 साल की औरत है, अभी हमारा कोई बच्चा नहीं है, उसकी फिगर 35-28-36 है, दूध सा उजला रंग, 5’4″ कद और कसा हुआबदन, खास तौर से उसके चूतड़ों की बनावट बहुत कामुक है. बाद में तुमको मज़ा आएगा…!जूही आँखों से ‘हाँ’ का इशारा कर देती है।अब रेहान धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगता है और जूही की जान निकलने लगती है। उसकी चूत में बेन्तहा दर्द होने लगता है। वो रोती रहती है।रेहान- आ.

कीर्ति दीदी को चोदने से पहले सब कुछ सामान्य था, पर कीर्ति दीदी को चोदने के बाद मेरे अन्दर बदलाव आ गया. । तुम्हारे जीजाजी रुकना चाहें तो ठीक, नहीं तो तुम उनको लिवा कर आ जाना, चमेली रुक जाएगी।”मैं कामिनी की बुद्धि का लोहा मान गई और मम्मी से कहा- ठीक है मम्मी. !रेहान- जानेमन लौड़ा चूत पर फेरने दो मज़ा आएगा और तुम्हारा पानी भी निकल जाएगा।आरोही- आप को जो भी करना है.

!और इसी के साथ मैं झड़ गया। मैंने अपना मूसल बाहर निकाल कर आठ-दस पिचकारियाँ छोड़ी जो कभी उसके बोबों पर, चूत पर, आंखों पर पहुँच गईं।हमने एक-दूसरे को कस कर पकड़ लिया, एक-दूसरे की बांहों में सो गए। दूसरे दिन 1.

तुम मेरे उतारो।मैंने झट से उसके कपड़े उतार दिए और उसके चड्डी तम्बू बनी हुई थी, तो राज बोला- उसे भी उतार दो. वो जो पार्क है ना… वहाँ इस दोपहर में कोई नहीं होता, आओ वहीं झाड़ियों में मुत्ती करते हैं दोनों…सलोनी- पागल है, अगर किसी ने देख लिया तो…कहानी जारी रहेगी।. बारिशस होने के पहले ही, सखी मेरा बांध था टूट गयामेरी जांघों ने जैसे कि नितम्बों का साथ था छोड़ दियाअंग का महल ढह गया सखी, दीर्घ आह ने सुख अभिव्यक्त कियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !.

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यह ट्रेन्ड पंजाब और दिल्ली में बहुत है लेकिन साउथ इंडिया के लोग अभी भी बहुत मासूम है जैसे कि यह लड़का जय!जय मेरे ऊपर लेटा था. सबके लंड 7-8 इंच के बीच थे!फिर संजीव ने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और मेरी चूत पर थूक लगा कर अपने लंड का सुपारा रगड़ने लगा. !पहले मैं उसके माथे को चूमते हुए नीचे आता रहा फिर उसकी आँखों को धीरे-धीरे नीचे आता रहा और उसके मम्मों को चूमने लगा।गिरिजा- आआअहहाहह.

फिर कुछ देर बाद मैंने उसको धक्के लगाने को कहा तो उसने धक्के मारना शुरू कर दिए और मेरे मुँह से आह… आह… की आवाजें आने लगीं. ले…!”उसके मुँह से आआआहह उउम्म्म्मम” की आवाजें निकलने लगीं। पूरे कमरे में फ़च-फ़च की आवाजें गूँज रही थीं। करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो ज़ोर से चिल्लाने लगी, आह. उसने मेरी तरफ नजर उठा कर देखा और कहा- भैया जी वो बात ऐसी है कि… और उसने अपनी नजरें नीचे झुका लीं और अपनी साड़ी के छोर को अपनी उँगलियों में गोल-गोल घुमाने लगी.

वो कुछ बोलती, उससे पहले मैं बोला- दीदी वो थोड़ी प्राब्लम है, समझा दोगी?वो चिड़ कर बोली- हाँ पूछो!मैं प्रोब्लम पूछने लगा, वो वहीं समझाने लगी. ! मैंने बैग में अच्छे कपड़े डाल लिए हैं, फोटो शूट के दौरान वही पहन लूँगी !वो दोनों बात कर रहे थे, तभी जूही आ गई। वो दोनों चुप होकर नाश्ता करने लगे।उस दौरान आरोही ने राहुल से कहा- मेरी सहेली का फ़ोन आया था, मैं वहाँ जा रही हूँ।जूही इस बात पर ज़्यादा गौर नहीं किया और बस नाश्ता करती रही।करीब 9. तवा पूरा गर्म था, मैंने फटाफट उनकी गांड के नीचे तकिया रखा और दोनों हाथों से उनके हाथ पकड़ कर लण्ड चूत पर रख दिया! मुझे पता था कि वो बहुत चिल्लाएगी इसलिए अपने होठों से उनके होंठ बंद कर दिए और एक झटका मारा, मेरा तीन इंच लंड उनकी बुर में घुस गया.

खाना खाते वक़्त फ़ूफ़ी बोलीं- तुम्हारे कमरे में सी-डी प्लेयर है तो मुझे कोई अच्छी पुरानी फिल्म देखने दो. com पर आप मेल करके अपनी राय भी दे सकते हैं।पर मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि कोई व्यक्तिगत सवाल या बात नहीं कीजिए, ऐसे सवालों का मैं उत्तर नहीं दूँगी।बाय !.

!कविता सिसकारियाँ लेते हुए जोर-जोर से लण्ड चूसने लगी। अब मैं झड़ने लगा था… कविता ने लण्ड को मुँह खोलकर जीभ पर रख लिया और एक हाथ से जोर-जोर से मुठ मारने लगी। मैंने अपना सारा पानी कविता के मुँह में निकाल दिया, जिसे वो मजे से पीने लगी और चाट-चाट कर पूरा लण्ड साफ कर दिया।कविता- कैसा रहा दीप मजा आया?दीप- खूब.

उसके होंठ गुलाब जामुन की तरह गर्म और मीठे थे और बहुत रसीले भी! बहुत देर तक उसके होंठों को चूसता रहा, फिर मैंने अपना एक हाथ उसके शर्ट के अंदर डाल दिया और उसके रसीले संतरों को मसलने लगा. सोनी समाज की लड़कियां!उसने मुझसे कहा-शर्म और हया भी कोई चीज़ होती है मेरे सनम,कैसे समा जाऊँ तुझमें मेरे सनमकि नखरे और अदा भी कोई चीज़ होती है. आदिवासी गण!मैंने जोरदार धक्का मारा और चाची मेरा लण्ड एक ही बार में पूरा अपनी चूत में ले गई ‘आह्ह्ह्ह्ह् साहीईईईईईल मेरे राजाजाजजा ओह्ह्ह्ह्ह. सम्पादक – इमरानमेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह मेरी सलोनी क्या चाहती है?अच्छा खासा मजा आ रहा था और भाग कर आ गई !!??जब तुझको चुदवाना ही नहीं था तो ये सब क्यों कर रही है?मैं भागता हुआ उसके पीछे आया, वो दूसरी गैलरी में एक साइड में खड़ी हो हाँफ़ रही थी.

!रेहान- अन्ना, आज तो मैंने जैसे कहा तुमने किया, पर कल क्या करना है मैं बताता हूँ। उसको शक मत होने देना कि तुम कौन हो और मेरे कहने पर ये सब कर रहे हो।अन्ना- तुम टेन्शन मत लो जी, अन्ना जुबान का पक्का जी.

!फिर मैंने ब्रा के हुक को खोला और एक हाथ से उसकी चूचे दबाने लगा और दूसरे को मुँह में डाल कर चूसने लगा। उसकी चूची का दाना थोड़ा गुलाबी था।मैं- क्या बात तेरा दाना तो बिल्कुल गुलाबी और चूची बिल्कुल टाइट है. फिर जो होगा, आप देख लेना…मैं अपने होंठों से उसके निप्पल पकड़ चूसने लगा।एक बार फिर वो सेक्सी सिसकारियाँ भरने लगी- …आःह्हाआआ… बस अब छोड़ भी दो ना सर. आशीष के सहारे किसी तरह बाथरूम पहुँची और उसी के सहारे नहाई।रूचि को टोक कर मैंने पूछा- इसमें सजा क्या थी.

फिर तो जब भी हमें मौक़ा मिलता, दीपक मेरी चूत और चूची को जम कर पीता और मैं भी उसका लंड बहुत ही अच्छे से चूसती. आओ मैं बताती हूँ वाशरूम किधर है।वाशरूम में कामिनी ने मुझे तौलिया दिया और मैं जान-बूझ कर धीरे-धीर से पैन्ट साफ़ करने लगा।कामिनी बोली- ऐसे साफ़ नहीं होगी. और लबलबा रही थी… मानो चीख चीख कर लंड माँग रही हो।चूत का मुँह बार बार अपने आप खुल रहा था और बंद हो रहा था…उधर वो पुलिस वाला दीदी पर चढ़ कर उनके होंठ को चूसने लगा, इधर उसका हैवानी लंड दीदी की चूत पर आकर रगड़ने लगा।दीदी की साँस अब बहुत तेज़ चलने लगी थी-.

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फिर चाचू ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना चालू किया, मुझे लग रहा था कि मेरी चूत में कोई गर्म लोहे की रोड अन्दर-बाहर हो रही है. सलमा ने हैरानी से पूछा- दो? यह तो एक ही होता है?पप्पू बोला- मेरे पाप्पा के पास दो हैं, एक छोटा सा है जिससे से वो पेशाब करते हैं, दूसरा काफी बड़ा है उससे मम्मी के दांतों को साफ़ करते हैं. !बाद में पापा ने मुझे जूनागढ़ पढ़ाई करने भेज दिया। मुझे आज भी लगता है कि प्रिया मेरे साथ ही है।लव यू प्रिया.

! मादरचोद नहीं मादरजात कपड़ा कहा, जिसका मतलब है कि जब माँ के पेट से निकले थे उस समय जो कपड़े पहने थे। उस कपड़े में आ जाइए !पेट का बच्चा और कपड़ा?”अरे बात वही है बच्चा नंगा पैदा होता है और उसी तरह आप भी नंगे हो जाओ, जैसे की तू खड़ी है मादरजात नंगी.

फिर मैं थोड़ा नीचे हुआ और उसकी सलवार को खोलने लगा और इजारबन्द खुलते ही मैंने एक झटके में उसकी सलवार पूरी निकाल दी.

मैंने गर्दन को उठा सखी, उसको मुह मांहि खींच लियामुझको तो दो सुख मिले सखी, उसको जिह्वा से सरस कियाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !. मैं एक दिन अपनी भाभी के घर पर आया हुआ था, भाई काम के सिलसिले में रामपुर गए थे और भाभी घर में अकेली थीं. गुटखा खाने से क्या होता हैपर मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था मैं पूरी तेज चोद रहा था…चाची को भी धीरे-धीरे मजा आने लगा और वो भी नीचे से दम लगा क़र धक्का मार रही थी.

!रेहान ने बेड पर बैठ कर आरोही को आने का इशारा किया।आरोही बड़ी स्टाइल से चलती हुई उसके पास आकर बैठ गई।रेहान- तुमको हीरोइन बनना है, यह बताओ कोई हॉट सीन आएगा तो कोई नाटक नहीं करोगी ना?आरोही- नहीं सर. उसकी आवाज भी आ रही थी… और शायद कोई और भी था…जिससे वो बात कर रही थी…मगर मेरे दिमाग में अब वो नहीं थी… मैं तो रात के काण्ड से डरा हुआ था…कि ना जाने सलोनी का क्या रुख होगा…??उसे कुछ पता चला या नहीं…. अरे यह तो बोरोप्लस की खुशबू थी…इसका मतलब मधु ने रात को बोरोप्लस भी लगाया… इसने एक बार भी मुझे अपने दर्द के बारे में नहीं बताया…मुझे उसके इस दर्द को छुपाने पर बहुत प्यार आया… मैंने उसके होंठों को चूम लिया.

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!”हम दोनों ऊपर कमरे में आ गए। जीजाजी दराज से सीडी निकाल कर ब्लू-फिल्म देख रहे थे। स्क्रीन पर चुदाई का सीन चल रहा था। उनके चेहरे पर उत्तेजना साफ झलक रही थी।कामिनी धीरे से कमरे में अन्दर जा कर बोली- नमस्ते जीजाजी.

मैंने अपना लंड ज़ेनी की बुर से निकाला और उसे सीधा करके अपने शरीर के ऊपर लिटा लिया और पुनः बुर में अपना लंड पेल दिया. वहाँ उस वक़्त बहुत शांति थी।कुली हमारे आगे चल रहा था, मैंने शोना को देखा और प्यार से उसके माथे को चूम लिया, मेरे हाथ उसकी कमर पर थे. !और मैं फिर से पागलों की तरह चूमने लगा और मैं इतनी तेज़ उसे पकड़े हुए था कि उसके पूरे खरबूजों का मज़ा आ रहा था।वो बोली- ठीक है रात को आऊँगी लेकिन अभी जाने दो.

पेटीकोट में चुदाई बहुत गुदगुदी हो रही है… अहा… ये क्या कर रहे हो…?? अरे छोड़ो न इन्हें…मनोज- यार सच बहुत जानदार हो गए हैं तुम्हारे बूब. लेखक : इमरानसलोनी- अच्छा अच्छा… अब न तो सपना देख और ना दिखा… जल्दी से घर चल मुझे बहुत तेज सू सू आ रही है…पारस- वाओ भाभी… क्या कह रही ही… आज तो आपको खुले में मुत्ती करवाएँगे…सलोनी- फिर सनक गया तू… मैं यहाँ कहीं नहीं करने वाली…पारस- अरे रुको तो भाभी, मुझे एक जगह पता है… वहाँ कोई नहीं होता… आप चिंता मत करो…सलोनी- तू तो मुझे आज मरवा कर रहेगा.

चाची की गांड पर भी बहुत बाल हैं, चाची की गांड में लंड रख क़र धक्का दिया तो चाची बहुत जोर से चिल्लाई, बोली- मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई है कबीर!मैं बोला- कोई बात नहीं सेक्सी, अभी थोड़ा तेल लाता हूँ!मैंने तेल लगाया और एक धक्का दिया. ।शबनम ने अपनी टाँगें रण्डियों के जैसे फैला दीं, मैंने अपना लौड़ा उसकी लपलपाती चूत में एक ही झटके में ठूँस दिया, फिर जरा बाहर खींचा और दुबारा जोर से उसकी बुर में ठांस दिया। अबके झटके में पूरा 6 इंच लंड अन्दर घुस गया था।शबनम की हालत खराब थी, उसका सारा नशा फट गया था और वो लगातार चीख रही थी, साले बाहर निकाल ले मादरचोद, मेरी चूत फट जाएगी कुत्ते, मुझसे गलती हो गई। मुझे क्षमा कर दो …. वीर एक और बाल्टी यहाँ रख दे। मैंने उस पर अपने हाथ रख लूँगी। इतनी छोटी सी बाल्टी पर हाथ और घुटने दोनों कैसे रख पाऊँगी ?”आंटी प्लीज आप कोशिश तो करो एक किनारे पर घुटनों को रखो और दूसरे किनारे को हाथों से पकड़ लो, पॉसिबल है आंटी.

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मैं चाची को छेड़ते हुए बोला- क्यूँ चाची अब तो मर्द मानती हो ना?चाची बोली- क्या लल्ला? कैसे मर्द बनते हो. !मैंने भी जोर देकर पूछा- बताओ तो… शायद मैं आपकी मदद कर दूँ।फिर भाभी मेरा एक हाथ थाम कर अंकल के बारे मैं बताने लगीं- ये शराब पीते हैं, रोज देर से आते हैं खाना खाकर सो जाते हैं। मैं उनसे बात करने को तड़प जाती हूँ।उनकी बात बीच में काट कर मैंने कहा- यह तड़फ सिर्फ़ बात करने की है या. अब तू जल्दी से घर जा… हम आधे पौने घंटे में पहुँचती हैं… मैंने यहाँ सब पड़ोसियों को कह दिया है कि मुझे रात को बहुत डर लगता है… इसलिये मैं अपनी बहन के साथ रात को सोने के लिये अपने पति के एक दोस्त के घर जाया करूँगी… क्योंकि हम दो लोग हैं इसलिये किसी ने कोई बात नहीं बनाई… अगर बहन साथ ना होती तो यह नहीं हो सकता था.

। मेरे पास तुम्हारे सिवा और है कौन…! अगर तुम भी किसी और के हो गए तो?”ऐसा क्यूँ बोल रही हो आंटी? मैं तो बस आपका ही हूँ।”हमेशा मेरे ही बने रहना. मुझे से गलती हो गई है, मैं उसे ठीक करवा दूँगा। मैं फ़िर से नाप ले लेता हूँ और वो मेरे पास आया और मेरी पीठ के पास जहाँ ब्लाऊज़ का हुक था, उस पर हाथ रख कर उसने मुझ से कहा- मैं ब्लाउज को पीछे खींच कर टाईट करता हूँ आप देखिएगा कि आपको कितनी फिटिंग चाहिए.

स्पीकर उनकी तरफ रखना… और तू वहीं खड़े होकर देखती रह…मधु ने तुरंत ही यह काम कर दिया और मुझे आवाज आने लगी…मनोज- सच सलोनी.

क्योंकि उसे तो चलानी आती नहीं थी और वो जाती तो कैसे लाती और मेरे साथ अगर बैठ कर निकलती तो उसे और लोग भी नोटिस करते।मैंने उसके दिमाग की दाद तो तब दी. मेरी जंघाएँ फ़ैल गईं, जैसे इस पल को मैं आतुर थीमैं कसमसाई, मैं मचल उठी, मैंने खुद को व्याकुल पायाउस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली मोरी अंगिया !. मैं- ओह, बहुत उतावले हो मेरी फ़ुद्दी देखने के लिए?मैंने अपनी पेंटी उतारी और अपनी दोनों टांगें वेबकैम की तरफ कर दी, वो मेरी चूत पूरी तरह देख रहा था.

तुम मेरा मतलब समझ रहे हो न?राहुल कुछ बोलता, इससे पहले आरोही बोल पड़ी- रेहान जी डांस मुझे बहुत अच्छा आता है, रही बात एक्टिंग की, आप अभी आजमा लो और जो आप कह रहे हो न. समझ में नहीं आ रहा था कि वो मुझे चोद रही है या मैं उसे चोद रहा हूं! वो ऐसे ही दो बार झड़ गई और बोली- बस, अब और नहीं!तो मैंने कहा- कोमल अभी तो तुम्हारा ही हुआ है मेरा नहीं. मैं हिम्मत करके बोला- क्यों चेंज कर दिया? मूवी अच्छी तो थी!फ़ूफ़ी थोड़ा सा मुस्कुराईं और वही चैनल वापस लगा दिया.

उसके भगनासे की झालर को धीरे से छेड़ दिया और फिर क्या था, नीलू उठ कर बस लिपट गई और मेरा चड्डी निकालकर मेरे लिंग को जबरन अपने योनि में डाल लिया.

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मैं तो पागलों की तरह ऊपर से उस मस्त लंगड़ी घोड़ी की गांड देख रहा था कि अचानक मेरे मुँह से लार की धार निकल कर ठीक उनकी नंगी गांड पर गिरी. आग दोनों और भयंकर लगी हुई थी !मैंने आगे झुक कर सोने के बहाने उसके घुटनों को छूने की कोशिश की और अपने हाथ वहीं टिका दिए, मेरे हाथ को पीछे हटाने आये उसके हाथों की उँगलियों को भी मैंने पकड़ लिया। अब वो डर चुकी थी और मुझसे हाथ अलग करने को कसमसा रही थी। अचानक पता चला कि गाड़ी की गति धीमी हो रही थी. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।दोस्तो, बीच में आने के लिए सॉरी। मैं आपको बता दूँ कि अंकित तो सारी बात शॉर्ट में ही बता रहा है, इतना डीप में नहीं। मगर आप लोगों को चुदाई का भरपूर मज़ा मिले इसलिए वहाँ क्या हुआ, ये मैं आपको विस्तार से बता रही हूँ ओके…एंजाय…!अंकित आपने कपड़े निकाल देता है। उसका 7″ का लौड़ा आज़ाद हो जाता है।सिमरन- उउउ आ.

मैं तो चाची को बचपन से ही चोदना चाहता था न जाने कितनी बार मैंने चाची के बारे मैं सोच क़र मैं मुठी मारी.

मैं कुछ देर तक बस सोच ही रहा था कि अब आगे क्या और कैसे करना चाहिए…दोस्तो, आप भी अपना मशवरा दें कि आप ऐसी परिस्थिति में क्या करते…?आपके सुझाव के इन्तजार में…आपका दोस्त…. !”इस पर चमेली व्यंग्य करती हुए बोली- जब दूसरे की में गया तो भूस में गया और जब अपनी में गया तो उई दैया. नवाज़… यह क्या कर रहो हो…?’‘बुलबुल… मुझसे अब नहीं रहा जाता है…’‘देखो मैं पापा से कह दूँगी…’अब उसने मेरे स्तनों पर कब्जा कर लिया था, मुझे बहुत ही मजा आने लगा था.