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अब उसने अपनी जींस उतारी। मैं पूरे ध्यान से देखने की कोशिश कर रहा था कि मुझे उस टेंट के दूसरे हिस्से में हलचल दिखाई दी। मैंने देखा की लड़कों का एक झुण्ड भी मेरी तरह परदे के पीछे से इस नज़ारे का मज़ा ले रहा है। मैंने सोचा कि जाकर लड़कों को डांट पिलाई जाये लेकिन फिर यह सोच कर रुक गया कि क्या फर्क पड़ता है.?”झंडे ने एक पल को सोचा और फिर बोला,”हाँ, तो इसमें हर्ज़ ही क्या है?…वह भी सुहागरात वाली रात को इसी तरह से मिल-बाँट कर खाई जायेगी.

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टाँगों को दायें बायें चौड़ाने से डबडबाई चूत का सुर्ख दान भी कसमसा कर चूत की फांकों से सरसरा कर बाहर आकर लिश्कारे मारते लगा, तो बहादुर का बेहाल लण्ड पिंघलता चला गया.आह……सॉरी सॉरी करने लगी।मैंने कहा- शीला मैं छुटने वाला हूँ !तो शीला बोली- गांड में नहीं, मैं तुम्हारा रस अपनी चूत में लेना चाहती हूँ !मैं रुक गया, अपना लंड निकाला और शीला को सीधा लिटा कर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर तेज धक्के मारने लगा। शीला भी चूतड़ उछाल कर मेरा साथ देने लगी और जोश में आकर आह …… स ….

मेरा दम घुट रहा था लेकिन मैंने उसके ताकतवर लंड का आदर करते हुए उसे मुंह से नहीं निकाला और थोडी ही देर में उसने अपने लंड से दही जैसा गाढ़ा वीर्य निकाला जिसका स्वाद गज़ब का था. नेपाली वीडियो बीएफ सेक्सी अगले दिन क्योंकि हम सबको पिकनिक पर जाना था सो हम सभी सुबह जल्दी उठ गए लेकिन अचानक ऑफिस का जरूरी काम पड़ने के कारण भैया का आना कैंसल हो गया तो भैया ने मुझसे भाभी को घुमा लाने को कहा मगर भाभी ने मना कर दिया.

तब बहादुर ने रीटा की फड़कती फुदकती और उछलती चूत में एक झटके से अपना लण्ड ठोक दिया तो बेचारी रीटा की अपनी सुधबुध खो बैठी.

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मुकेश मेरे फ़ूले गालों पर थपकियाँ देता रहा और कहने लगा- तेरी चिकनी जांघों पर मेरी कब से नजर थी बहन की लौड़ी! मैं तो कब से सोच रहा था कि तेरी चूत देखने को मिलेगी, कब अपना लंड उसमें घुसाने का मौका मिलेगा, मेरी छप्पन-छूरी! आज तो तेरी चूत, तेरी गांड, तेरे बोबों के इतने मज़े लूँगा और दूंगा कि तू तो क्या, तेरी अम्मा भी मुकेश को याद करेगी. और आख़िर में लंड को उसकी चूत के अन्दर गहराई में रख कर एक मिनट तक पिचकारी मारता रहा. !मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।वो सी.

पूरा घर खाली था फिर भी इस बात का डर तो था ही क़ि कहीं किसी पड़ोसी की नजर रात को 12 बजे अमित को मेरे घर में आते समय न पड़ जाए. मैं घबरा गई… मैंने उसे जबरदस्ती उठाया अपने ऊपर से… लेकिन तब तक मेरी बुर के अंदर मेरे भाई का सारा वीर्य जा चुका था…मैंने उससे कहा- अगर मैं गर्भवती हो गई तो…?फ़िर मैंने उसे कहा- जल्दी से कपड़े पहन कर दवाई की दुकान से आई-पिल लेकर आ…वो आई पिल लेन चला गया और मैंने नहाने चली गई…अगले हिस्से में पढ़िये- कैसे राहुल के बॉस ने मुझे चोदा…? बिल्कुल अलग ढंग से !!!आपकी रूबी[emailprotected]. उसके कारण आज मेरा इज़हार फिर अधूरा रह गया… उसकी वासना की वजह से मेरे निस्वार्थ प्रेम की बलि चढ़ रही थी… और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी… पर मन ही मन रश्मि को सबक सिखाने का फैसला ले चुकी थी.

अपनी गांड को हिला-हिला कर चुदाई को और मस्त कर रही थी …मैं बीच बीच में उसके स्तनों को दबा देता, मुँह में ले लेता…. देर तक मैं उसे चोदता रहा… मगर अब थोड़ा थक गया था… मैंने सोचा थोड़ा आराम करते हैं… फिर रानी की गाण्ड मारेंगे…मैं कस कर उससे लिपट गया… रानी तब तक तीन बार झड़ चुकी थी… और लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी… मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो देखा- कण्डोम फ़ट चुका था. पिंकी- हाय मनुजी! मैं क्या करती? साली ने बाथरूम में मेरी चूचियाँ दबा दी तो मैं गर्म हो गई, आप तो समझदार हो!मैंने कहा- पिंकी जी, आपका ज्यादा समय नहीं लूँगा!और मैंने उसके हाथ पकड़ कर हथेली चूम ली, उसके होठों से सिसकारी निकल गई.

उसकी जुबान मेरी चूत में हरक़त करती तो मैं पगला जाती!उसने मेरी दोनों टाँगें चौड़ी करवा ली और अपना लंड मेरी चूत पर टिकाते हुए रगड़ा तो मस्ती से मेरी आंखें बंद हो गई. आप लोग यह जानने के लिए बेताब होंगे कि वो कौन थी…वो थी प्रिया ‘कातिल हसीना’ हमारी पड़ोसन.

तो यह बात है… रश्मि। यही तो मैं सोच रहा था कि तुम्हारे जैसी बला की खूबसूरत लड़की इतनी आसानी से कैसे तैयार हो गई।खैर मैंने रश्मि से कहा- चलो, आज मैं तुम्हारी अतृप्त वासना की इच्छा पूरी करता हूँ।अगली कड़ी में समाप्य !.

मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी.

वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. वो मछली की तरह छटपटा रही थी- आ आह ऊ उई ईई ईई म्म म्म म्मह की आवाजों से कमरा गूंज रहा था. आज निचोड़ डाल मुझे नीबू की तरह। फाड़ दे मेरी चूत…मेरी बुर में वर्षों से आग लगी है मेरे लाल, मिटा दे इसकी भूख.

मैंने कभी बेड पर लिटा कर चोदा तो कभी उसे घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत में अपना बड़ा लंड डाला फिर उसकी गांड में अपना लंड डाला। उसने आज से पहले कभी गांड नहीं मरवाई थी इसलिए उसकी गांड टाइट थी। मैंने पहले तो थोड़ा धक्का मारा जिससे मेरा आधा लंड उसकी गांड के अन्दर चला गया। फिर मैंने अपनी गति बढ़नी शुरू की जिससे उसकी गांड का छेद खुलता गया. मुझे वहाँ देख कर शरमा गई- भैया… अब देखो ना… मेरे सिर में दर्द होने लगा है… जरा दबा दो…’मेरा लण्ड जोर मारने लगा था. दीदी मेरे ऊपर टूट पड़ी और मेरी टी-शर्ट और बनियान उतार दी और मेरी छाती पर जीभ फेरने लगी.

जब आवाजें आना बंद हो गई तो उसके कुछ देर बाद मैंने दरवाजा खटकाया तो एक आदमी ने दरवाजा खोला जिसने कपड़ों के नाम पर एक बरमूडा पहना हुआ था.

वीर्य गले में से सीधा नीचे उतर गया।अब शर्मा अंकल ने मुझे उठा लिया और मुझे बैड पर बिठा कर मेरी सलवार उतार दीम वो मेरी जांघों को मसलने लगे, फिर राठौड़ अंकल ने मेरी पेंटी उतार दी. मम्मी उनका लंड देख कर चौंक गई और बोली- बाप रे! इतना मोटा लौड़ा मेरे लिए?अंकल का लंड आठ इंच लम्बा और चार इंच मोटा था. मैं बोला- जरुर लो मेरी जान …फिर मैं खड़ा हुआ, उसने मेरा टी-शर्ट उतारा और और मेरे सीने को चाटने लगी। इसमें बड़ा मजा आ रहा था.

बस मन कर रहा था कि कोई लड़का आये और मेरी कुंवारी गाण्ड में अपना लंड डाल दे! पर डर लगता था क्यूंकि मैं कुंवारी थी और मैंने सुना था कि गाण्ड मरवाने में बहुत दर्द होता है. उनके लंबे नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।‘फाड़ दे… मेरी फाड़ दे आआह्ह!’उन्होंने मुझे कस के पकड़ा और वो झड़ने लगी… करीब दो मिनट वो झड़ती रही. मैंने उनके गाल पर चूम कर उन आँसुओं को अपने होंठों से पी लिया और अपनी बाहों में भर लिया.

उसने शरमाते हुए सर झुकाया और अपनी चूत को हाथों से ढक लिया। उसकी गुलाबी चूत मुझ से कुछ इंच दूर थी, मैंने धीरे से उसके हाथ हटाये और चूत पर मेरे होंठ रख दिए.

पहले कभी नहीं चुदी थी… रानी भी थक कर बेहाल हो चुकी थी पर मेरा विरोध नहीं कर सकती थी. !” मेरी जबान साथ नहीं दे रही थी।मिक्की खिलखिला कर हंस रही थी वो तो मुझे पता है कि आप मेरे पीछे पागल हैं और मेरे ऊपर लट्टू हैं पर मैं तो फ़िल्मी हिरोइन की बात कर रही थी।” मिक्की ने अपने हाथों से अपनी हंसी रोकने की कोशिश करते हुए कहा।मैं इस फिकरे का मतलब अगले दो दिनों तक सोचता ही रहा था। मैंने फिर बात संवारते हुए कहा उम्म्म….

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नज़रें जैसे जमीन में गड़े जा रहीं हो…!!!मैं : मुझे पता है तेरा स्कूल जाने का मन नहीं है. क्या पता फिर मौका मिले ना मिले? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था. मैंने उनकी टांगों पर हाथ फेरना शुरु कर दिया और धीरे धीरे उनकी स्कर्ट के अन्दर हाथ डालना शुरु कर दिया.

थोड़ी देर के बाद मैं धीरे से उठा और वापस उनके दरवाज़े के पास गया, और जैसे ही मैंने अन्दर झाँका…दोस्तो, अब मैं ये कहानी यहीं रोक रहा हूँ. मेरे होठों से एक सेक्सी सिसकारी निकली आर मैंने दरवाज़े पर ही अपना सारा माल गिरा दिया…मेरे मुँह से निकली सिसकारी थोड़ी तेज़ थी, शायद उन लोगों ने सुन ली थी, मैं जल्दी से आकर अपने कमरे में लेट गया और सोने का नाटक करने लगा. कोई है जो इनके हुस्न को अपने सीने से लगा कर और इनका मद भरा रस अपने गर्म होंठों से लगा कर पीना चाहता हो.

!!सोनिया के मुँह से यह सुन कर मैं हैरान हो गया। क्या सोनिया को मेरी और किरण की चुदाई का पता है??पर मुझे इससे क्या लेना, मुझे तो सोनिया की चूत चाहिए थी सो मिल गई थी।आज तो तेरी चूत को ऐसे फाड़ दूँगा जैसे तुम्हारी माँ की फटी हुई है… साली की चूत बहुत करारी है.

और कब उसके हाथ मेरी कमर से मेरे स्तनों तक पहुँचकर मेरे स्तन मसलने लगे, मुझे पता ही नहीं चला…वो बार बार अपने होंठ मेरी टीशर्ट के ऊपर ले जा कर मेरे स्तनों के चूचक चूसता और फिर होंठ चूसता… ऐसा लग रहा था… जैसे होंठों की मिठास से मेरे चुचूकों के दूध को मीठा करके पी रहा हो…!!!थूक से गीली हुई सफ़ेद टीशर्ट में से भूरे चुचूक अब दिखने लगे थे. यानि समधन की चूत के दरवाज़ा पर तोते की चोंच जैसा सुपारा तैयार है चोदन के लिए!हर बार होली पर बुड्ढे और जवान सपना सजाते हैं कि इस बार बहू, चाची, मामी, दीदी, पड़ोसन या कोई कमसिन कली के स्तन रंग लगाने के बनाने हाथ लग जाएँ या फिर गाण्ड छू जाए।लेकिन कुछ के सपने अधूरे रह जाते हैं और कुछेक के पूरे हो जाते हैं. फ़िर अपनी साली को पलंग पर लिटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और उसकी गुलाबी चूत पर अपनी जीभ चलाने लगा.

जैसे ही पूजा के हाथों का दबाव मेरे मोम्मों पर बढ़ता, मैं उसे चोदने की गति बढ़ा देती।तभी पूजा ने अपनी पूरी शक्ति से मेरे मोम्मे दबा दिये।ओहहह!!! आह्हह्ह!!! आह्हह्ह!!! पूजा मेरे मोम्मे छोड़!!!” कहते हुए मैं उसके हाथ हटाते हुए उसके ऊपर गिर गई और अब पूजा ने अपनी उँगलियाँ मेरी पीठ में गड़ा दीं और झड़ने लगी।जब हम दोनों की साँसे संयत हुईं तो हम दोनों साथ साथ चिपक कर सो गईं।. अरे गौरी, अंकल से कह ना कि छोड़ दे मुझे!” राधा के स्वर में इन्कार से अधिक इककार था. पर रात भर मैं अपनी बहन की चुदाई के बारे में ही सोचता रहा कि वो कौन खुशनसीब होगा जिसे मेरी बहन की चूत को फाड़ने का मौका मिलेगा.

मैंने कहा- लेकिन तुम्हें दो दो किताबों की क्या जरूरत है? एक रखो और दूसरी लौटा दो, मुझे पढ़नी है. ‘पी ले मोहिनी बाई मेरा लण्ड! ऐसी मस्त जवानी फिर कहाँ मिलेगी!’तभी मेरी नजर गोमती पर गई.

मैंने अपने लौड़े पर क्रीम लगाई और कहा- सोना, घोड़ी बन जाओ… क्रीम लगा दूँ!’ सोनू मुस्करा कर झुक गई. ”रंजू कहते हैं ! है ना?”हाँ ! आपने सही अंदाजा लगाया।” कहते हुए वह मुस्कुराई।उदास चेहरे पर क्षणिक मुस्कान भी अच्छी लगी। मैंने उस मुस्कान में मिठास घोलते हुए पूछा,”क्या मैं आपको रंजू कह सकता हूँ?”ओ श्योर. मैंने शिखा की तरफ़ देखा और कहा- आँखें खोल लो और मज़े लो, इस तरह ना मुझे मजा आयेगा और ना तुम्हें.

उसने मुझे सीधा किया और अपने दोनों होठ मेरे होंठों पर रख दिए और उन्हें बेदर्दी से चूसने लगा.

और फिर हम दोनों कम्बल तान कर नींद के आगोश में चले गए।बस अब और क्या लिखूँ ? अब तो मैं अपने प्रेम की रानी नहीं महारानी बन गई हूँ !-मधुरदोस्तो ! आपको हमारी यह दूसरी सुहागरात कैसी लगी बताएँगे ना ?आपका प्रेम गुरु. कोई शैतानी ताकत मेरे अन्दर काम करने लगी थी, किसी ने जैसे अंधेरे रास्तों की तरफ मेरी राहनुमाई कर दी थी और मैं उस राहनुमा का हाथ थामे अंघेरी गलियों में दाखिल हो गई, यह भी ना देखा कि भला अंधेरे रास्तों की तरफ ले जाने वाला मेरा हमदर्द भी हो सकता है. इससे मैं उत्तेजित हो गई और मैंने मुकेश का लौड़ा पकड़ लिया और उसे हिला हिला कर पेशाब करवाने लगी.

अगले दिन क्योंकि हम सबको पिकनिक पर जाना था सो हम सभी सुबह जल्दी उठ गए लेकिन अचानक ऑफिस का जरूरी काम पड़ने के कारण भैया का आना कैंसल हो गया तो भैया ने मुझसे भाभी को घुमा लाने को कहा मगर भाभी ने मना कर दिया. मैंने देखा तो गौरी भी अपने कपड़े उतार कर अपनी चूचियाँ मल रही थी, एक अंगुली अपनी चूत में डाल रखी थी और आहें भर रही थी.

कहानी के पिछले भाग:मैं फिर से चुदी-1मैं फिर से चुदी-2उसने अपने लंड की मलाई मेरी गांड में छोड़ दी. सर से पाँव तक नन्गी रीटा बहादुर के पैंट के तम्बू को हसरत भरी निगाहों से देखते हुए होले होले अपनी सुडौल मरमरी टांगों को दायें बायें चौड़ाती चली गई और शानदार अंगड़ाई तोड़ती बोली- बहादुर आओ नाऽऽऽ! ज़रा देखूँ तो तुम कितने बहादुर हो?इस अवस्था में रीटा का संगमरमर से तराशा जिस्म तड़क सा उठा. क्या लग रही थी साली! क्या चूत थी कुतिया की!फिर मैं ऊपर हुआ और अपना लौड़ा जबरदस्ती उसके मुंह में दे दिया और उसकी हलक में उतार दिया और 5 सेकिंड तक लौड़ा उसके हलक में ही रखा.

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वो बाइक के पीछे बैठी, वो दोनों पैर एक तरफ करके बैठी लेकिन मैंने उसे लड़कों के जैसे बैठने के लिए कहा.

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लण्ड पूरा चूत में गड़ चुका था और आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह वीर्य छूट पडा… सोनू ने अपनी चूत जोर से पटकने लगी और उसका भी यौवन रस निकल पडा. ना जाने कितनी बार रीटा ने राजू को शावर के नीचे अपने मूत से नहलाया और कई बार तो रीटा दीवाने राजू को अपना पेशाब भी पिला चुकी थी. सेक्सी फिल्म ब्लू पिक्चर वीडियोऑटो चलते समय भी वो किसी के ऑटो के एकदम सामने आ जाने पर माँ-बहन की गालियाँ दिया करता था.

” दुल्हन बांहों में कसमसाई।ठन्डे बोला,”फिर वही बात, अगर कोई देखे तो अपनी माँ को मेरे पास भेज दे…. आग जैसे गरम गोरे गुलाबी जिस्म पर पानी की नन्ही नन्ही बूंदें पड़ती तो मेरे तर बदन से जैसे जजबातों का धुआँ सा उठने लगता.

यह कह कर मैं वहाँ से चल दिया, दीदी भी मेरे पीछे आने लगी, शायद श्यामलाल ने दीदी की छुट्टी कर दी थी. और लंड को गांड से निकाला और एक ही धक्के में चूत के अन्दर डाल दिया फ़िर वैसे ही चूत से बाहर निकला और गांड में एक धक्के में अन्दर पूरा लंड डाल दिया. की स्टुडेंट थी डॉक्टर साहब से प्रेम हो गया था। उन दिनों डॉक्टर साहब मुझे मिक्की माउस कह कर बुलाते थे। डॉक्टर साहब मुझ से 12 साल बड़े हैं ना। और फिर एम.

और अपने कूल्हे हिलाने लगी… उसकी अंडरवियर नम को चुकी थी… उससे भीनी-भीनी खुशबू निकलकर मेरे नथुनों से टकरा रही थी… मैंने उसकी स्कर्ट उठाई… धीरे से अंडरवियर नीचे सरका दिया…. बहुत जतनों और कई चोकलेट खिलाने के बाद मेरी उससे दोस्ती हुई… तब मैं 11 साल की थी, मुझे आज भी वो दिन याद है, रविवार था, मैं पार्क में झूला झूल रही थी और वो ऐसे ही जाने किस सोच में डूबा बेंच पर बैठा कुछ सोच रहा था … मैं उसका नाम पुकार कर उससे कह रही थी- देखो मैं कितना ऊँचा झूल रही हूँ…मैं : वेदांत… देखो देखो. बरबस ही मुख से निकल पड़ा- विपिन, यूँ मत कर, मैं तो तेरी भाभी हूँ ना…’मेरी बेकरारी बढ़ती जा रही थी.

मोना कहाँ मानने वाली थी!अभी दस मिनट भी नहीं बीते होंगे, वो फिर से मेरे लण्ड को सहलाने लगी.

और जैसे ही मैंने उसके पैरों को फैला कर मेरी जीभ चूत की गुलाबी फांक के अन्दर डाली।‘आह. उसका नाम प्रीति था, वो गज़ब की सुंदर थी, गोरा बदन, उठी हुई चूचियाँ, उभरी हुई गांड, मानो कि स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो.

अब वो सच कहते थे या अपने आपको और मुझे कल्पना की दुनिया में ले जा रहे थे यह तो नहीं मालूम लेकिन मैंने सोच लिया था कि अपने जिस्म की आग बुझाने का सबसे आसान और महफ़ूज़ ज़रिया यही है कि मैं अपने एक साल छोटे भाई के जिस्म को इस्तेमाल करूँ. अच्छा तुम्हारी गांड कैसी है ?क्या मतलब ?मेरा मतलब है उसकी साइज़ और रंग कैसा है ?बड़े शैतान हो गए हो पहले तो बड़ा शरमा रहे थे ?सब आपकी सोहबत का असर है।मेरी गांड का छेद एक चवन्नी के सिक्के जितना बड़ा है और कमाल की बात तो ये है की वो अभी काला नहीं पड़ा है !वो कैसे ?अरे बुद्धू मैं ज्यादा गांड नहीं मरवाती ना ?क्यों ?ओह. फिर मैंने अपने हाथ से अपना अंडरवीयर उतार दिया और फिर थोड़ी ही देर में उनकी पेंटी भी उतार फेंकी.

सचमुच की रांडों जैसी हो गई थी कि तभी पहलवान छूटने लगा और दोनों हाथों से मेरे चूचों पर जो माल गिरा था उसे मेरे चूचों पर मसलने लगा…महामंत्री खड़े खड़े तमाशा देख रहा था. उसने मुझे कसम दे दी कि उस घर में जा रहा हूँ, वहाँ कोई नहीं है, तुझे आना होगा!पहले वो धीरे से निकला, फिर मैं!मैंने ऊपर जाकर सब अपनी सहेलियों को बताया. ‘रागिनी तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें पाने के लिए मैं बहुत बेताब हूँ!’कहते हुए उसके कान के लैब अपने होंठो में लिए.

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दीपू मेरे होठों को चूसते हुए मेरी छातियों से खेलने लगा और उधर राजू ने मेरी पेंटी निकाल कर चूत का रास्ता ढूँढ लिया. कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…हे भगवान् मैंने आज से पहले उनके बारे में कभी भी नहीं सोचा था. ‘ये लो मेरी जान… ‘ जीजू ने अपना शरीर ऊपर उठाया और मेरी चूत के लबों पर अपना लण्ड रख दिया.

इस तरह मेरे और नीना के बीच एक तरह का एग्रीमेंट हो गया और हमने नई जिंदगी की शुरुआत कर दी. मैं अपनी बहन के बारे में बता दूँ!मेरी बहन का नाम शैली है और वो मुझसे तीन साल छोटी है, दिखने में बहुत सुंदर है, उसके मम्मे 32 इन्च के हैं और गांड के बारे में क्या बताऊँ! कोई भी लौड़ा खड़ा हो जाये उसकी मारने के लिए. हिंदी चुदाई विडिओटांगें चौड़ाते ही रीटा की फूल सी खिली हुई चूत का झिलमिल करता दो इंच लम्बा चीरा और बिन्दी सी गाण्ड का रेशमी सुराख का रोम रोम नुमाया हो उठा.

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मैंने कहा- अरे! यह क्या कर रहे हैं आप दोनों?अरे कुछ नहीं भाभी! थोड़ा सा देख रहा था!ये भी बोले- बेचारे को हाथ लगा लेने दो! क्या फर्क पड़ता है तुम्हें?मनोज हाथ लगाने के बहाने दबाने लगा. जैसे तैसे मैं सिपाहियो के सहारे खड़ी हुई।हवा में कामरस की खुशबू मुझे और चुदने को मजबूर कर रही थी…सभी मर्द मुझ पर हंस रहे थे, मेरी बेबसी का मजाक बना रहे थे, राजा ठहाके लगा रहा था…कि तभी मुझ पर जोर से पानी फेंका गया.

राज भी अब तेजी में था, उसकी बहन मेरे मुँह में झड़ गई उसका सारा नमकीन पानी मैंने पी लिया। इस दौरान तेज चुदाई के कारण मेघा भी झड़ने वाली थी और खूब तेजी से चुदी।उस दिन हमने करीब पूरी रात चुदाई की क्योंकि वो हमारी एक साथ में रहने की अन्तिम रात थी।और चुदाई का यह सिलसिला चलता ही रहा लम्बे समय बाद तक!मेल जरूर करें![emailprotected]. निकाल ले साले…निकाल ले…मैं कहाँ मानने वाला था…मैंने उसे जोर से जकड़ लिया और एक धक्का लगा दिया…लंड थोड़ा और आगे सरकते हुए उसकी तंग गांड में थोड़ा और अन्दर चला गया।उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे और वो मेरी मिन्नत करने लगी- प्लीज़ निकाल लो विक्की! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोडती हूँ… मारना है तो चूत मारो मेरी. तभी उसके मित्र ने मेरी कमर कस कर थाम ली और मुझे एक और लण्ड मेरी गाण्ड के छेद को फ़ोड़ता हुआ अन्दर घुस गया.

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भोजपुरी सेक्स एक्स एक्स एक्सवहाँ पर करीब 12 बजे तक रक्षिता के भैया पतंग उड़ा कर अपने दोस्त के घर चले गए साथ में भाभी को भी लेकर गए…मुझे तो मजा आ गया…मुझे अब रक्षिता को चोदने का मौका मिलने वाला था. प्रेषक : आयु राजाअन्तर्वासना के सभी पाठकों को आयु राजा का प्रेम भरा अभिनंदन !आप सबका शुक्रिया जो आप सबने मेरी पहली कहानीको इतना पसंद किया.

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उसकी बात सुन कर मुझे भी हंसी आ गई और फिर उसका विचार भी सही था इसलिए मैंने तुरंत हाँ कर दी।मैं भी इस फिराक में था कि लड़कियों के साथ रात में शायद कोई नज़ारा देखने को मिल जाए या फिर कोई जुगाड़ ही हो जाये. ”फिर अनीता दीदी ने पूछा- अच्छा नेहा एक बात बता, तूने कभी किसी लण्ड से अपनी चूत की चुदाई करवाई है क्या?”नहीं दीदी, आज तक तो मौका नहीं मिला है. वो १८ साल का एक सुंदर लड़का था, लंबा भी था, और हमेशा मुझे देख कर मुस्कुराता था, बल्कि खुश होता था.

मैं कभी टी वी पर फ़िल्म देखता तो कभी मेरी नज़रें रसोई में काम करती उस लड़की की छोटी स्कर्ट के नीचे उसकी गोरी टांगों पर चली जाती. ? यहाँ…? ये…?निशा : हाँ, दिखाओ न सर…सर : ओके … पीयू जरा जांघें फैलाओ…सर उंगली डाल के उसे गरम कर रहे थे… चुदने का मन तो निशा को भी था… सो वो सर का लण्ड मसल रही थी… उसने भी नीचे सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी !सर : लम्बी लम्बी सांसें लो … और घुसने दो मेरे पेनिस को …. मुझे वहाँ देख कर शरमा गई- भैया… अब देखो ना… मेरे सिर में दर्द होने लगा है… जरा दबा दो…’मेरा लण्ड जोर मारने लगा था.

आह!’‘लो ये लो!’ और मैंने लंड को उनकी चूत के एकदम अंदर मुँह पर टिका दिया और मेरी पिचकारी शुरू हो गई।दोनों ने एक दूसरे को कस कर पकड़ा था. मुझे संगीता ने कभी नहीं कहा कि वो इतना मजा लेती है!’उसके चेहरे पर आश्चर्य झलक रहा था।मैंने कहा ‘रानी. खैर मैं स्टेशन पहुँचा, कुछ ही देर में ट्रेन आई, मेघा ने मुझे मोबाइल पर कोच नंबर दिया.

मैं एक मध्यम वर्ग का लड़का था, मुझे घर चलने और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए टीचर बनना पड़ा था. सोनू ने हाथ से उसे नाकाम रोकने की कोशिश की- भैया… ये मत करो… मुझे शरम आ रही है… मुझे बेवफ़ा मत बनाओ!’ सोनू ने ना में हाँ करते हुए कहा.

झांक कर देखा तो मौसी सिर्फ चोली पहने हुई थी, नीचे बिलकुल नंगी टिन के संदूक के ऊपर जांघें फैलाए बैठी थी … वो बार बार एक लकड़ी के डंडे को अपनी योनि में अन्दर-बाहर कर रही थी … वो उस डण्डे को बार बार पास रखे तेल भरे डिब्बे में डुबो रही थी …मैं : मौसी, यह क्या कर रही है ?मौसी बिलकुल पसीने पसीने थी….

ज्योंही मम्मी की बुर पर अंकल ने अपना लंड रखा, मम्मी जोर से फुसकारी मारते हुए बोली- अब मुझे न तरसाओ यार! अब चोद दो!अंकल ने भी फुर्ती से अपने लंड को जोरदार धक्का लगाया और उनका लंड मम्मी की चूत में जा घुसा. ब्लू पिक्चर सेक्सी वीडियो दिखाएंमुझे इंतज़ार करते करते पाँच मिनट बीत गए तो मैंने सोचा कि क्यूँ न पहले खाना खाकर फ्री हो लूँ ये सोच कर मैंने अपना खाना निकाल लिया जो मैं घर से साथ लाई थी. बाबा रामदेव सेक्स वीडियोजब मेरा माल निकलने वाला था तब मैं उसके मुंह के पास चला गया…कशिश ने अपने मुंह खोला और मैंने उसमें अपना सारा इकट्ठा माल गिरा दिया…मैं अब कशिश के साथ ही बेड पे गिर गया. मैं भी आँखें बंद करके मजे लेने लगा…मुस्कान तो मेरे लंड को छोड़ ही नहीं रही थी…मैंने साथ में उन सबकी पैंटी भी उतार दी और चूत में ऊँगली डाल कर मसलने लगा…तीनों ने मुझे तब तक नहीं छोड़ा जब तक लंड का पानी बाहर नहीं आ गया.

नमस्ते साथियो,मेरा नाम ईशा शर्मा है, वैसे तो मैं एक लड़का हूँ पर मुझे यही नाम ज्यादा अच्छा लगता है.

”मेरा लौड़ा अब चोदने को बेताब हो उठा था लेकिन मुझे कुछ नहीं करना पड़ा, चाची ने मेरा एक हाथ पकड़कर नीचे रख दिया और कहा,” बेटा इसको सहला दे इसमें बहुत खुजली है !”तब मैंने कहा,” चाची जी यह तो बहुत गर्म है।”तो उन्होंने गुस्सा करके कहा,”मुझे चाची मत बोल … या तो पारुल जान कहो या सिर्फ जान कहो …. पहली बार तो दैहिक शोषण के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में. ”और कहा,” धीरे धीरे चोदो बेटा, मंहगाई का ज़माना है, इस २ इंच की चूत को जिंदगी भर चलाना है !”कुछ ही देर में चाची ने बाहर निकाल दिया और कहा,”तू नीचे लेट जा….

यह सुनने के बाद मेरी खुशी का ठिकाना न रहा क्योंकि आज मेरे पास वो मौका था जो मुझे कई दिनों से नहीं मिल रहा था. जब मैं वापिस घर आया तो मैं मनीषा को ढूंढने लगा क्योंकि मैं मनीषा की तरफ काफी मोहित हो चुका था. मैंने उस लड़की को कई बार कालोनी में शाम को घूमते देखा था और कई बार उसको याद करके मुठ भी मारी थी.

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? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व. मर गई…आज मेरी भी जन्मों की प्यास बुझ रही थी, मैं भी अऽऽ आय… आआऽऽ आआअ ऊऊऊऊउ… कर रहा था और कह रहा था- साली अब तुझे नहीं जाने दूंगा, तू कितने दिनों से मेरे लंड को भड़का रही थी… साली आज में तेरी माँ-बहन एक कर दूंगा…वो अभी भी चीख रही थी- माय… उ. वेदांत : आ जा ! मैं भी अकेला हूँ ! साथ में खाते हैं…मैंने लंच उठाया और उसकी क्लास में चली गई.

हम दोनों लगभग दो घण्टे तक अलग ही घूमते रहे और उसके बाद हम धर्मशाला में वापिस आ गए.

तब उसने कहा- संभल कर! मेरी चूत कुँवारी है… खून निकलेगा!मैंने फिर चूत के छेद पर अपना सुपारा रखकर एक धक्का मारा… उसे दर्द हो रहा था.

कम से कम मैंने अपना सब उसे सौंपा, जिससे मैं प्रेम करती हूँ और जो मुझ से प्रेम करता है. मैंने फैसला कर लिया था आधी रात को मैं तीनों के पास अपनी काया-मर्दन के लिए जाऊँगी पर सर की बात खटक रही थी … नथ वाली बात …तभी सर मेरे पीछे आ कर खड़े हो गए …सर- क्यूँ बेटे, क्या हुआ …? पीछे से तुम बिल्कुल गीली हो गई हो … रिस रहा है क्या?मैं- सर अब क्या छुपाना. नंगी नहाती हुई औरतअब हम दोनों आमने-सामने थे, उसका लौड़ा तो वापस चूत में घुसा हुआ था, मेरे दोनों बोबे उसकी बलिष्ट छाती से टकरा रहे थे, चूमा-चाटी का सिलसिला अनवरत जारी था, उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के नीचे टिका रखे थे जिससे वो गांड को सहला रहा था तो कभी कभी उस पर चिकोटी भी काट रहा था, कभी गांड में अंगुली भी कर देता तो मैं उछल जाती.

थोड़ा दर्द हुआ मीठा-मीठा… फिर थोड़ा सा और अन्दर गया… और दर्द भी बढ़ने लगा…वो मजदूर बहुत धीरे धीरे लण्ड को चूत में घुसा रहा था, इसलिए मैं दर्द सह पा रही थी. तभी मुझे तान्या के पापा श्यामलाल की आवाज़ आई, शायद नौकरों ने तान्या के बेहोश होने की खबर श्यामलाल को कर दी थी, इसलिए मैंने वहाँ से निकलना ही ठीक समझा और तान्या से अगले दिन का कह कर वहाँ से निकल गया. थोड़ी देर में हम फिर गर्म हो गए और मैं फिर उसके चूचे चूसने लगा तो वो बोली- भैया, रहा नहीं जाता अपना लंड अंदर डाल दो!उसकी चूत कुंवारी थी और मैं उसको दर्द नहीं पहुंचाना चाहता था इसलिए मैंने थोड़ी वेसलिन लेकर उसकी चूत की मालिश कर दी.

जैसे जैसे मुझे सेक्स के बारे में पता चलता गया मेरी नज़र बदलती गई और मेरी नीयत बदलती गई. राजू अब भी बुरी तरह से रीटा के होंटों के चबाये और चूसे जा रहा था और रीटा की चीखें गले में ही घुट कर रह गई थी और वो घूं घूं की आवाजें निकालने लगी.

!!!मैं : नहीं…!!!!मम्मी : सुन अब यह मुसीबत शुरू हो गई है, इसे माहवारी कहते हैं … अब तुझे.

पर मैं उस आदमी के नीचे काम नहीं करना चाहता था जिसने मेरी बहन को अपने दूसरे नौकर के साथ मिलकर चोदा था, मगर मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था क्योंकि एक लेक्चरार की सेलरी पर काम करना मुश्किल था इसलिए अगले ही दिन मैंने कॉलेज से छुट्टी ली और श्यामलाल के ऑफिस चल पड़ा. ‘मार दो मेरी गाण्ड! मेरे यारों, चोद दो मुझे… कुतिया की तरह से चोदो… उफ़्फ़्फ़्फ़ आह्ह्ह्ह्ह!’मम्मी की गाण्ड सटासट चुद रही थी. मैं नाइटी तो उतार दूँ ?”मैंने अपनी नाइटी निकाल फैंकी। वह तो पहले से ही नंग-धड़ंग था, उसने झट से मुझे अपनी बाहों में भर लिया। वो मेरे मम्मों को चूसने लगा और अपना एक हाथ मेरी लाडो पर फिराने लगा। मैं अभी उसका लण्ड अपनी लाडो में लेने के मूड में नहीं थी।आप हैरान हो रहे हैं ना ?कहानी अगले भागों में जारी रहेगी।आपकी नीरू बेन (प्रेम गुरु की मैना).

রাজস্থানী ভিডিও সেক্স आप कानून के रखवाले” कहानी के ग्यारह भाग पढ़ चुके हैं !अन्तिम प्रकाशित भागकानून के रखवाले-11में आपने पढ़ा कि :सोनिया बहुत हैरान थी कि उसने मुस्तफा को इतनी बुरी तरह पीटा उसके बाद बेहोशी के बाद भी वो वहाँ से निकलने में कामयाब हो गया. क्यों भाई ठन्डे, सच कह रहा हूँ न?”भैया, आप बिलकुल सही कह रहे हैं। हम दोनों भाइयों के बीच अब तक तो ऐसा ही होता आया है।” ठन्डे ने जबाब दिया।दुल्हन बोली,”अगर तुम में से कोई एक मर गया तो मैं अपने माथे का सिन्दूर पौंछूंगी या नहीं….

और अचानक से उसने मुझे नीचे से झटका दिया… और और उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए…उसने मेरे दर्द की तनिक भी परवाह नहीं की…बल्कि वो मेरा दर्द भरा चेहरा देख और कामोत्तेजित हो उठ रहा था. हाँ तैयार हूँ !फिर मैंने जोर का धक्का देकर लंड पिंकी के चूत में धकेल दिया। लंड चूत में जाते ही आऽऽ आऽ आहह्हह्ह ! पिंकी चिल्ला उठी।फिर थोड़ी देर बाद मैं लंड अंदर-बाहर करने लगा। पिंकी मदहोश होकर चुदाई का आनंद ले रही थी।पिंकी अब बस करो ! अब रेशमा को चोदने दो… वो तरस रही है !ठीक है ! पिंकी बोली और कविता के बगल में जा बैठी।रेशमा डार्लिंग आओ. वी देखने चला जाता था। दिन में अकसर वो अकेली ही रहती थी। मुझे पूरा मन रहता कि उसे चोदूँ पर मैं उसे बोल नहीं पाता था, डर लगता था।एक दिन की बात है, मैं दोपहर में उसके कमरे में गया तो दरवाजा से आवाज दी तो कोई नहीं बोला। तो मैंने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो देखा कि दरवाजा नहीं लगा हुआ है।मैं अन्दर घुस गया और सीधे भाभी के टी.

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अमिता ने कमीज-पजामा पहना था, शालू ने उसके कपड़े उतार दिए और ब्रा और पेंटी ही छोड़ी उसके बदन पर!अमिता ने शालू को नंगी कर दिया!तब शालू ने मुझ से कहा- मेरे शेर, खड़ा हो! देख तेरा शिकार पानी छोड़ रहा है. फिर मम्मी ने कहा- जब तक यह मर्दों के ड्रेस में है, ऐसा नहीं हो सकता… साली को साड़ी में चोद सकता हूँ मैं. ” चोट तो नहीं लगी…? पागल है क्या तू… ज्यादा सुपरमैन बनने का शौक चढ़ा है… जा छत से भी कूद ले.

उधर सुमन ने लण्ड पकड़ कर उसे मसलना चालू कर दिया था और बार-बार उसे अपनी चूत में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी. इस शानदार चुदाई की तैयारी में मैंने अपने दोनों बच्चों को गाँव भेज दिया, जिससे घर खाली मिले और हम तीनों एक साथ चुदाई करने का भरपूर मजा ले सकें.

और उन्हें सहलाते हुए मैंने उसका आँचल धीरे से कंधे से हटा दिया। उसके दोनों हाथ मैंने पकड़ रखे थे इसलिए वो अपना आँचल संवार नहीं पाई और मेरे सामने उसके पीन पयोधर आमंत्रण देते हुए महसूस हुए! वैसे मैं उसकी बांहों की सहलाते हुए उसकी चूचियों को बाजू से स्पर्श कर रहा था.

और मोना की घाटी के पास अब एक बेलगाम सा नाग नज़र आ रहा था।तभी अब्बास ने मोना के अधरों को आज़ाद किया और चेहरा उठाकर मोना की शक्ल को देखा- क्यूँ डार्लिंग…. जीजू के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई, वो बोले- ठीक है! मैं भी यह थोड़े ही चाहता हूँ कि मेरी साली को तकलीफ हो! तुझे अगर लौड़ा नहीं घुसवाना है तो मत घुसवा! तू इसे अपने मुँह में ले ले और इसे गन्ने की तरह चूस!मरती मैं क्या नहीं करती! मैंने जीजू का लौड़ा मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगी. सुबह सवेरे अगर लौड़ा मिल जाये तो काम देव की आराधना भी हो जाती है, और फिर पूरा दिन मस्ती से गुजरता है.

जब मैं घर पहुंचा तो शैली नहा रही थी, उसने दरवाजे की चिटकनी नहीं लगाई थी क्योंकि घर में कोई नहीं था. फिर उसका कांपता हुआ हाथ मेरे मम्मे की तरफ बढ़ा और एक ऊँगली से उसने आईसक्रीम उठाई और फिर मेरे मुँह में डाल दी। मैंने उसकी ऊँगली अपने दांतों के नीचे दबा ली और अपनी जुबान से चाटने लगी।उसने खींच कर अपनी ऊँगली बाहर निकल ली तो मैंने कहा- क्यों देवर जी दर्द तो नहीं हुआ. उसने पूछा- क्यों?तब मैंने बोला- मेरा दिल आप पर आ गया है, इसलिए!वो मुस्कुरा दी और आगे चलने लगी.

‘तो फिर आओ… आपकी इच्छा पहले!’ मैंने राधा को फिर से अपनी बाहों में उठा लिया और बिस्तर की ओर बढ़ चला.

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रीटा मचलने के बहाने अपनी फड़फड़ाती चूत को राजू के लण्ड को चूत में गपकने लगी तो राजू शरारत में लण्ड को पीछे खींच कर रीटा को सताने लगा तो रीटा ने राजू की गाल पर जोर से चपेड़ लगा कर गन्दी गन्दी गालियाँ बकने लगी- बहनचोद! माँ के लौड़े, अब डाल अंदर और चोद अपनी बहन को! साले मादरचोद, चोद नाऽऽऽऽ. सुबह उठते ही कोमल ने चाय बनाई… मैंने उसे समझाया- कोमल देखो, आपस में चोदा-चादी करने से घर की बात घर में ही रहती है… प्लीज किसी सहेली से भी इस बात का जिक्र नहीं करना. पता नहीं नेहा ने यग जादू कहां सीखा था। उस दिन मुझे पता चला कि मेरा (और शायद सभी मर्दों का) सबसे सेन्सिटिव स्पॉट कहां होता….

मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चोथाई लंड उसकी चूत में समा गया.

मेरी एक चूची उसके हाथ में आते ही वो बदमाश हो गया और उसने मेरी चूची को अपने हाथ से सहलाना और मसलना शुरू कर किया. ?” वो मेरे सामने गिड़गिड़ा रहा था। यही तो मैं चाहती थी कि वो मेरी मिन्नतें करे और हाथ जोड़े।ठीक है पर धीरे धीरे कोई जल्दबाजी और शैतानी नहीं ? समझे ?”ओह. ऊपर से ही… मेरी पैंटी तक नीची नहीं की थी उसने…फिर उसके करने से ज्यादा मुझे हवा में उड़ना क्यों याद आता है बार बार, क्यों अच्छा लगता है वो उड़ना…क्या वो गलत था या अब मैं गलत हूँ… सोच सोच कर सर फटने लगा है… आह….