बिहार का बीएफ पिक्चर

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मैंने कहा- आवाज़ पहचान ली है पर इतनी सुबह आपने कैसे याद किया?उसने कहा- इडियट आज शनिवार है, वीकेंड …मैंने कहा- तो क्या हुआ?संध्या बोली- मैंने क्या कहा था, याद है या भूल गए. सेक्स व्हिडिओ ओपन’राजिंदर के धक्के तेज़ हो गए और फिर उसने मेरी गांड अपने मर्द जल से भर दी.

मेरा लंड जैसे ही आजाद हुआ तो सुषी ने उसे अपने हाथों में ले लिया और उसको ऊपर नीचे करते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी. सेक्स देहातपांच मिनट बाद वो बाहर निकली, तो उसके चाल में थोड़ा लचकपन था, पर चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव थे.

मैंने कहा- आपने खाये नहीं?वो बोले- मैं आपके बिना कैसे खा सकता हूँ?मैं बहुत खुश हुई.बिहार का बीएफ पिक्चर: मेल करने वाले का नाम था सुनील राठौड़, उसने अपने लंड की कई फोटोज भेजते हुए लिखा था कि पम्मी लंड पसंद आए, तो जवाब जरूर देना और बताना कि पंजाब में कहां की रहने वाली हो.

पतली सी कमर और उनके दूध एकदम गोल गोल, चिकने से मुलायम, परफेक्ट साइज के थे.वो जोश में सिर्फ गर्दन हिला मना कर रही थी और जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.

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बात उस टाइम की है, जब मैं जॉब के लिए पहली बार किसी बड़ी सिटी में आया था.मेरे पेरेंट्स कहीं गए हुए थे साहिल ने कॉल किया कि तुम घर पर हो तो मैं आ जाऊं?मैंने कहा- हां आ जाओ.

मुझे क्या पता था कि आज भाभी की सील तोड़ने का मौका मेरे लंड के नसीब में ही लिखा था. बिहार का बीएफ पिक्चर संध्या ने मुझे घर का पता दिया और कहा- मैं फ़ोन करूँगी तुम्हें, कब आना है और हाँ शायद वीकेंड पर तुमको बुला सकती हूँ तब तक तुम तैयार रहना, ओके.

मैंने फोन उठाया तो मदन की मां बिना रुके बोलने लगीं- हैलो मदन बेटा जरा घर आ जा … वो आज मैं अपने दोस्त के यहां गयी थी ना किटी पार्टी में … मैंने अपना पर्स वहीं छोड़ दिया, जिसमें घर की दूसरी चाभी भी थी.

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उसने बताया कि उसकी माँ उसकी मौसी के यहां गई हैं और भाई अभी कोचिंग में है. भाभी को चूमते हुए मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया और उन्हें कातिल नज़र से देखते हुए अपना लोअर निकाल दिया. मुझे जब उसके घर में कोई नहीं दिखा, तो उसने बताया कि सभी घरवाले शादी में गए है, जो सुबह तक लौटेंगे.

बस तुझे देख लूं कि तू दिखती कैसी है और मैं किस की गांड मार रहा हूं. वह मेरे ऐसा बोलने से थोड़ा सोचने लगी कि यहाँ लड़की पूरे कपड़े उतारने के लिए तैयार है और यह केवल नीचे के कपड़े उतारने की बात कर रहा है. उसने आगे बोला- मुझे पता है कि तुमने अब तक सिर्फ अपने पति से और नामित से ही चुदाई करवाई है.

मैं इसे अपने हाथ में लेकर देख लूं क्या?” उसने मासूम सा चेहरा बना कर पूछा. कोमल दीदी ही मुझसे ज्यादा बात करती थी और मुझे चाय के लिए भी पूछ लेती थी. फिर चुदाई को ब्रेक करके मैं किचन में गई और कुछ खाने के लिए लेकर आई.

मुझे ज़ोर से चोदते हुए उसने अपने लंड का पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया. शांत होते ही उसका लिंग सिकुड़ कर बाहर आ गया और उसके निकलते ही चिपचिपा पानी मेरी योनि से बह निकला, जिसमें सफेद वीर्य के हिस्से भी थे.

क्योंकि गर्मी के कारण लण्ड के आस-पास पसीना आने लगता था और मुझे खुजली होती थी.

वह जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी- आह्ह … ऊऊऊ … आआआ … उम्म … ओह्ह … अम्म … मा … उफ्फ … करती हुई वह चुदाई का मजा लेने लगी.

पर नए स्टाइल की ललक में वह तकलीफ सहकर भी अपनी गांड में मेरा लंड लेती रही. मैंने उससे पूछा- ये क्या स्टाइल है?तो वो बोली- मैं टाइम खराब नहीं करना चाहती क्योंकि मुझे आज घर जाना है, मेरे घर पर कुछ मेहमान आ रहे हैं. अब मोहिनी जी घर पे अकेली होती थीं, मैं अक्सर उनकी चुदाई करने उनके घर चला जाता था.

मैं समझ गयी कि ये साथ नहीं दे पा रहा है, मेरी जरूरत के हिसाब से उसके धक्कों में दम नहीं लग रहा था. फिर मैंने उसको प्यार से समझाया कि देखो जो तुम्हारे साथ में हुआ, उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है. और उसके हाथों और होंठों के जादू से मैं भी चरमोत्कर्ष पर पहुंच चुका था.

उन्होंने अपना ओवरकोट, स्वेटर, साड़ी उतारी तो देखा कि उनके हाथ और कंधों पर हल्की चोट लगी थी.

मैं झट से वहां के बटन को पकड़ कर स्वेटर को लूज करने की कोशिश करने लगा. अंकल के दोनों बेटों की शादी हो चुकी थी लेकिन उनकी बेटी अभी कुंवारी थी. लेकिन सासू माँ जिस बस से बारातियों के साथ जाने वाली थी, वो बस देर से 7 बज कर 30 मिनट पर आयी.

वो मादक स्वर में अपने हाथ से अपनी एक चूची पकड़ कर मेरे तरफ करते हुए बोली- ले चूस इसको. अब मुझे सच में चिंता होने लगी थी क्योंकि अगर गर्मियों का मौसम होता तो मैं रात बाहर सड़क पर भी गुजार सकता था. अब मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके पैरों को किस करते करते और चाटते उसकी चूत तक आया.

वह मेरे ऐसा बोलने से थोड़ा सोचने लगी कि यहाँ लड़की पूरे कपड़े उतारने के लिए तैयार है और यह केवल नीचे के कपड़े उतारने की बात कर रहा है.

उसने कहा- आप जितना चाहो … जैसे चाहो चोद लो … लेकिन गांड में कुछ मत करो प्लीज़. वो बोला- झाड़ी के पीछे तुम्हारी चुदाई अच्छे से पूरी हो गयी थी कि नहीं?मैं कुछ नहीं बोली, तो वो खुद से फिर बोला कि वो लड़के भागे जिस तरह से मुझे लगा कि ठीक से नहीं चोद पाये होंगे.

बिहार का बीएफ पिक्चर मैंने उसे समझाया- तुम उन्हें प्यार से समझाओ, अपनी पसंद नापसंद बताओ यहाँ तक कि सेक्स करते हुए तुम्हें क्या अच्छा लगता है, क्या नहीं … खुल के बताओ. तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी टांग के नीचे किया और बोली- तुम करो ना प्लीज़!उसके बोलने के अन्दाज़ पर मुझे बहुत प्यार आया और मैंने उसे किस करके उसकी टांग पकड़ कर चूत में लंड सैट किया.

बिहार का बीएफ पिक्चर मैंने भी बदले में उसे कस कर चिपकाते हुए उसकी गांड दबाते हुए चूम लिया. अब आप लोग तो जानते ही हो कि चुत का नशा बहुत गंदा होता है और आज मुझे एक नई चूत मिलने वाली थी.

उसके बाद काफी दिन तक मैं अपने चाचा-चाची के घर पर ही रहा और जब भी मौका मिलता मैं दूध वाली आंटी की चूत की चुदाई कर देता.

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जहां बेड लगा था, वहां जाकर मैं कपड़े चेंज करके अंकित को बोली कि मम्मी को जाकर बोल देना कि मेरी तबीयत खराब है, मैं नहीं आऊंगी. राहुल के पास मैंने सामान रख दिया और राहुल से बोली- राहुल मैं अभी आती हूँ. मैंने भी उसे दबोचा और कस कर धक्के लगते रहे और फिर सारा के अन्दर अपना माल छोड़ दिया.

उसने कहा- मतलब वेजीना में पेनिस का शॉट?मैंने कहा- हां सही पकड़े हैं. तभी उसने मुझे बेडरूम में चलने को कहा और आंटी ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ा और मुझे बेडरूम की तरफ ले जाने लगी, फिर से मेरा लंड तैयार हो गया था. मैं अपने घर में बाथरूम के अन्दर गया और अपना लौड़ा हिलाया, पानी निकाल कर उसे बैठाया.

सुनसान अँधेरे कमरे में चुदाई की वो मधुर आवाज घप घप घप और उसकी दर्द भरी सिसकारियां ‘अह अह अह हम्म ह्म्म्म.

थोड़ी देर मुझे यूँ ही उपर से नीचे देखते रहने के बाद उन्होंने मेरी शीट इनविजाइलेटर (निरीक्षक) को पकड़ा दी. इतने में गीता ने शैम्पू की बोतल खोली और हम दोनों के ऊपर बहुत सारा शैम्पू डाल दिया. वह साथ ही साथ एक हाथ को मेरे लंड पर अंडरवियर के ऊपर से ही फिराने लगी.

मैंने पूछा- वो कैसे? आपने उनका हाथ देखा है क्या?वो हँसने लगा और बोला- वो इसलिए कि उनको आप जैसी खूबसूरत वाइफ मिली है. वो मूंछों वाले दादा साहेब बोले- जल्दी ही कर रहा हूं … नहीं तो तू तो ऐसी गर्म आइटम है, ऐसी माल है कि पहले तो तेरे एक एक अंगों को पहले चाटता, उसे प्यार करता और एक एक अंग को सहलाता, उनसे दो चार घंटे खेलता, तब जाकर तुझे चोदता, पर अभी समय बिल्कुल नहीं है. मेरी चूत चाटने के बाद उसने अपना लंड मुझे चूसने के लिए बोला और मैं लंड चूसने लगी.

क्योंकि उस समय मैं बिल्कुल अकेली थी और मैं उस दिन को किसी भी हालात में खोना नहीं चाहती थी. मैंने उसका इशारा समझ लिया और उसकी जांघों से चूमना चालू करते हुए उसकी चुत के चारों तरफ जीभ को घुमाना शुरू कर दिया.

वह दादा साहेब ठाकुर ने अपने लंड का जोर से झटका मेरी चूत में मारा, तो मैं चीख उठी … चिल्ला उठी. अगले ही पल मेरे बगल से एक और लड़का मुझसे चिपक गया और मेरे कान में बोला कि मैं अपने मोबाइल की टॉर्च लगा रहा हूं, मुझे बस तेरा चेहरा भर देखना है. बाप रे, अगर ज़रीना की भी ऐसे ही मारोगे, तो यह बेचारी तो शायद सुबह उठने लायक नहीं बचेगी.

पहले दिन तो उसने मुझसे ज्यादा कुछ नहीं पूछा, लेकिन उसके तेवर बता रहे थे कि वो हम दोनों की चुदाई की कहानी पूरी तफ्सील से सुनना चाहती है.

मैंने भी उनका साथ दिया और फिर बेड पर ही एक दूसरे को अपनी जुबान निकाल कर किस करने लगे. उफ्फ्फ … क्या चूचियां थीं … गोल … गहरे मैरून रंग के निप्पल और वैसा ही बड़ा सा ऐरोला निप्पल के चारों तरफ … चूचियों के मुकाबले उसके निप्पल काफी बड़े थे. मेरे अन्दर ना जाने चूत में कैसी उबाल सी उठी कि मुझे कुछ भी समझ नहीं आया.

मैंने अजय को देख अपने होंठ काटते हुए होंठों पर जुबान फेरी और उसे अपनी तरफ बुलाया. उसने मेरी बात सुन कुछ देर तो तेज़ धक्के रफ्तार से मारे, पर जल्द ही वो ढीला पड़ने लगा.

जब जब उसका लिंग थोड़ा जोर मार उचकता, तो मेरी कामना जग जाती कि अब ये तैयार हो रहा. अब मैं उन तीनों के सामने पूरी नंगी सोफे में रंडियों की तरह अपने पैर फैलाये चिकनी चुत दिखाते लस्त पस्त पड़ी थी. वो दरवाजे को बिना कुंडी के बंद करके आ गयी ताकि कोई दरवाजा खोले, तो मालूम पड़ जायेइंदु आते ही लेट गयी, मैं भी उसके साथ लेट कर उसके चूचे दबाने लग गया धीरे धीरे मैंने उसके स्वेटर और ब्लाउज के नीचे के 2-2 बटन खोले ताकि कोई आ भी जाए, तो जल्द बंद हो जाए.

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ये कहानी मेरे और मेरी सलहज की है, मेरी सलहज का नाम इंदु है, उसकी उम्र 26 साल की है.

पर मामा धन्यवाद, आप अगर नहीं होते … तो मैं बहुत परेशान हो जाती।फिर हम दोनों होटल में जाकर डिनर किया और घर के लिए वापस निकले। तब तक रात के करीब 12. अभी तक आपने पढ़ा कि छुट्टी के बाद पेपर करने गई हम दोनों सहेलियां सर के साथ ऑफिस में बैठकर नकल उतार रही थीं. मैंने दो चार बार लंड को उसकी चूत की दरार में घिसाया और फिर छेद के मुहाने पर लंड के अग्र भाग को टिकाया.

ऋतु के बैठने से पहले ही उसने अपना हाथ सोफे पे रख दिया और ऋतु अंजाने में उसके हाथ पे बैठ गयी. मेरा मन ऐसा कर रहा था कि बस आज मैं इसकी हो जाऊं और इसे अपना सब कुछ दे दूँ. इंग्लिश सेक्सी फिल्म वीडियोमुझे चूचियां दबाते देख उन दोनों ने एक दूसरे के पेटीकोट खोल दिए और दोनों नंगी हो गयी.

मुझे चूत में लंड लेते समय अपने मम्मों की चुसाई करवाना बहुत अच्छा लगता है. अब आगे:आशीष ने मेरी जींस के बटन खोल कर जैसे ही जिप को खोला, मैं एकदम से उठने को हुई.

इधर की काफ़ी सेक्स कहानियां पढ़ पढ़ कर मुठ मारने की तो अब आदत सी हो चुकी है. उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- टेंशन न ले राजा … आज सब सिखा दूंगी कि चूत को क्या क्या चाहिए होता है. मुझे और मत तड़पाओ राहुल … प्लीज अपना लंड मेरी चूत में डालो!अब राहुल ने अपने हाथ में थोड़ा थूक लगा कर अपने लंड के सुपारे में लगाया और मेरी चूत पर रख कर थोड़ा रगड़ा। मैं सिहर गई। फ़िर राहुल मेरी दोनों टांगों को पकड़कर ऊपर उठाने लगे और उन्होंने मेरी दोनों टांगों को मेरे सिर के इधर-उधर गद्दे से लगा दिया.

उसने अपने जिम ट्रेनर को बोल कर अपनी गांड को बड़ी, गोल और सुडौल करने वाली एक्सर्साइज़ करनी शुरू कर दी थी. भीगी-भीगी इस मस्त समा में प्रशांत का नौ इंच लंबा कड़क लंड भला वी-कट अंडरवियर में कहां छिप पाता. उनकी बुर बहुत कसी हुई थी, इसलिए मैंने थोड़ी देर तक उतना ही लंड आगे पीछे करने लगा, जितना भाभी की बुर में लंड घुसा था.

एक दिन उसने बताया कि अब उसके पति मुझे बहुत प्यार करने लगे हैं, बिस्तर पे भी अब वो बहुत रोमांटिक होते हैं और मेरे साथ प्यार से ही सेक्स करते हैं.

वह बोला- तो फिर ये भी बता दीजिये क्या अच्छा लगा आपको मेरे अंदर?मैंने कहा- आपके बात करने का अंदाज मुझे बहुत पसंद आया. हालांकि उसकी और मेरी उम्र में 8-9 साल का अंतर होगा फिर भी हम दोस्तों की भान्ति व्यव्हार करते हैं.

एग्जाम हाल में एग्जाम देने से ज़्यादा मेरा दिमाग़ भाभी को चोदने में लग रहा था. फ्रेश होकर जब सासू माँ के पास गई, तब उनसे पता चला कि हितेश ऑफिस जा चुके हैं. मेरे प्रिय पाठकों आप लोगों अपना जो प्यार प्रेषित करते हैं, वो मेरे लिए एक बड़ा स्पोर्ट है.

मैं फिर से गर्म और गीली होने लगी थी और अपनी उत्तेजना में उसके लिंग को बेरहमी से दबाने और जोर जोर से हिलाती गई. आपको मेरी कहानी के बारे में अगर अपनी राय देने का मन हो तो आप मुझे मेल कर सकते हैं. मुझसे रहा ही न गया और मैं उसके गालों पे बहुत देर किस करता रहा, काटता भी रहा.

बिहार का बीएफ पिक्चर बस अब क्या था, मैंने उनकी कमर पकड़ कर अपने पास खींचा और लंड पेल कर तेज़ तेज़ धक्के देने चालू कर दिए. उसके बाद मैंने बाइक को घर से कुछ दूरी पर रोक लिया और ताक-झांक करने की कोशिश करने लगा.

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मैंने अजय को देख अपने होंठ काटते हुए होंठों पर जुबान फेरी और उसे अपनी तरफ बुलाया. मेरे पड़ोस में एक लड़का रहता है, जो किराये पर कमरा लेकर रहता है और पढ़ता है. पूषी कुछ नहीं बोलीं, बस चाय पीती रहीं और चाय खत्म करके कप रखने गईं.

तो मैंने उसकी बात मान ली और अपनी साड़ी कमर तक उठा कर पैंटी निकाल दी. समीज और कुर्ते को ऊपर चढ़ाते हुए अपनी हथेली को मेरे दूधों पर पहुंचा दिए. सटका मटका न्यू गोल्डन की ओपनमैं लखनऊ से हूँ लेकिन नोएडा में रहता हूँ। मेरी कहानीआंख मार कर की चुदाईऔरइस्मत की किस्मत से चुदाईको पसंद करने के लिए तथा मुझे मेल करने के लिए सभी दोस्तों का बहुत-बहुत धन्यवाद.

भाभी थोड़ा असहज लग रही थी तो मैंने भाभी के होंठों पर किस किया और एक ज़ोर का धक्का लगा कर पूरा लंड अन्दर घुसेड़ दिया.

मैं और मेरा बॉयफ्रेंड हम दोनों सेक्स करने के बाद एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे. मैंने अपने एक हाथ से भाभी को उठाये रखा और दूसरा हाथ उनके पेट पर फिराने लगा.

मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रखे और आराम से उनकी चूत और चूत के दाने को बारी बारी से चाटने लगा. उसने मेरा सिर दबा दिया और मैं उसकी चूत में जीभ रगड़ कर उसके गर्म-गर्म पानी का स्वाद लेता रहा. मैं- ठीक है, पर कितने टाइम के लिए मिलना है आपको?कल्पना- पता नहीं, सिचुएशन पर डिपेंड करेगा.

मुझे अब भूख लग रही थी, तो मैंने किचन में जा कर देखा कि कुछ खाने को मिल जाए.

पर मेरा माल तो गिरा नहीं था, सो मैं 5 मिनट रूककर फिर से उसे चोदने की कोशिश करने लगा. उसने मेरी तरफ देखा और उसे एकदम से न जाने क्या हुआ कि उसने बड़ी हिम्मत करके मेरी चूत को देखना शुरू कर दिया. पूछने पर उन्होंने बताया कि फूफा बस जल्दी जल्दी में चोदकर सो जाते हैं, गांड को तो हाथ भी नहीं लगाया कभी.

महिला में खून में ईएसआर में वृद्धिमुझे एक ऐसे दर्द का एहसास कराया, जो मैं अब जीवन भर लेना उनसे चाहती थी. लेकिन जो प्यार मेरी तरफ से था क्या वो प्यार कोमल भी महसूस कर पा रही थी.

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उसकी चूत अच्छी खासी टाइट थी, कई महीने से चुदी नहीं थी, शायद इसीलिए मुंदी सी थी. 30 बजे मेरी नियत टाइम पर नींद खुली, तो मैं अपना ट्रैक सूट जो अब तक सूख चुका था, उसको पहन कर घूमने निकल गया. मार्च का रोमांटिक गुलाबी महीना और उन दिनों बेमौसम की बरसात तो उसे कुछ अधिक ही तड़पा रही थी.

पहली बार जब मैंने उस आंटी को देखा तो मैं रोज उसका ही इंतजार करने लगा था. सरदारजी का लिंग अभी तक मेरी योनि में था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई साँप दम तोड़ता है, वैसे ही अकड़न ढीली कर रहा. वह जैसे मेरे करीब आया, मैंने झपट कर उसके काले लंड को पकड़ लिया और सुपारे पर ज़ुबान फेर दी.

तभी डेविड सर ने बोला- सबसे पहले मैं काम करूँगा … आधा तो कर ही चुका हूं और अभी मैं इसकी मदमस्त जवानी को देख कर बहुत गर्म हूँ. पिछले 2 साल से वो अपने ब्वॉयफ्रेंड से चुदवाती आ रही है और जब भी चुदवा कर आती, तो सबसे पहले मुझे बताती कि आज कैसे और कहां चुदवाया. थोड़ी देर बाद मैं उठा और बाथरूम में अपने मुरझाए हुए लोले को साफ़ करने लगा.

साथ ही मैं प्रमिला की भी हेल्प कर रहा था, प्रमिला और एकता ऊपर एक दूसरे को किस भी कर रही थीं और एक दूसरे के मम्मों को भी दबा रही थीं. मैं अपने कमरे में ऊपर की तरफ सीढ़ियों पर जा ही रहा था कि कोमल दीदी मुझसे इंटरव्यू के बारे में पूछने लगी.

भाभी को मैंने काफी फ़ोर्स किया कि मामा जी को कहीं कुछ काम से भेज दो.

वो मेरे पूरे जिस्म को चाटने के बाद मेरी चूत को अपने लंड से रगड़ने लगा. తమిళ్ సెక్స్ తమిళ్ సెక్స్मैंने सोचा कि एक तो मैं पहली बार किसी मर्द के सामने आधी नंगी होने वाली हूँ … कैसा लगेगा. मुंबई का सीनउसने आगे बोला- मुझे पता है कि तुमने अब तक सिर्फ अपने पति से और नामित से ही चुदाई करवाई है. मदन की मां थोड़ा मायूस हो कर बोलीं- मर्द … और वो …! काश उनकी सोच भी आप जैसी होती.

सच में बहुत मजा आ रहा है, मुझे तो इस शादी में आकर तेरे रूप में जन्नत मिल गई.

मैं- अरे यार ट्रेनिंग पे थक जाता हूँ, अब उठ गया हूँ तो खाना खाने बाहर जाऊंगा. फिर मैंने उसकी तरफ 2-3 बार और ध्यान दिया, तो पाया कि वो तब भी मुझे ही देख रहा था. क्या मतलब है पीछे से आई थी? अभी तुम्हारी शीट से निकली है या नहीं?” उनका लहज़ा बहुत ही सख़्त था.

जब हितेश मुझे अपनी बांहों में कस कर पकड़ेंगे और मेरी ख्वाहिश पूरी हो जाएगी. मैंने अपनी टांगें ऊपर की तो किशोर ने मेरी टांगें अपने कंधों रख लीं. बीस मिनट तक धकापेल चुदाई हुई और वो मेरी बांहों में दो बार सिमट कर निढाल हुई.

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क्रीम लेकर आने के बाद उसने मेरी वाइफ से बोला- डार्लिंग, लास्ट टाइम तुमने ब्रा और पेंटी में रैंप शो किया था … इस बार फ्लोर पे कॅट्वाक करके दिखाओ प्लीज़ … एकदम कॅट्वाक माने बिल्ली की तरह चल कर दिखाना, न कि किसी मॉडल की तरह … समझ गई ना!ऋतु क्रीम को सोफे पे रख के घूम गयी. मेरी बातें सुनने के बाद मम्मी जी ने एक लंबी सांस ली और बोलीं- तू जानती है बेटा, पिछले 3- 4 दिन से मैं इसी बात का इंतजार कर रही थी कि तू कब मेरे पास आएगी. मैंने भाभी की चूत को देखा और पल भर की देर किए बिना ही भाभी की चूत पर अपने होंठ रख दिए.

अब मैंने उसे बताया कि जब मैं पहली बार लंड अंदर घुसाऊँगा तो उसे मामूली सा दर्द हो सकता है.

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला पूनम अपनी शादी के लिबास में खड़ी मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर रही थी.

वैसे तो मैं अपनी सास से नहीं डरती थी लेकिन उस वक्त बदनामी से डर लगता था. अपने लौड़े से, तेरी सास इस सर्दी में तुझे तन्हा नहीं छोड़ सकती, मुझे अपने बदन से लिपटा कर रख और मेरी चूत मेरी गांड को बस पेलता रह. साउथ हीरोइन सेक्स फोटोगजब का फिगर था, क्या दूध, क्या गांड … मस्त चिकनी चमेली भाभी को देखकर तो मेरे हिसाब से सबका लंड खड़ा हो गया होगा.

वे चारों भी नंगे खड़े थे और अब्दुल मुझे चोदने के लिए मेरे ऊपर चढ़ गया था. थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटा रहा, वो बिल्कुल सीधे सो रही थी। फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसके बूब्स पर रख दिया जैसे अनजाने में रखा हो लेकिन उसने मेरा हाथ नहीं हटाया. सुबह के 9 बजे थे, मैं भैया से बोली- मैं अभी आती हूँ, बाज़ार से कुछ सामान लेना है.

मेरे अन्दर एक बेचैनी थी कि मैं एक लड़के के साथ अपने घर में अकेली हूँ. रात को करीब 12 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने अपने मुँह को शीला की चुचियों के बीच पाया.

इससे मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया। तो मैं आहिस्ता आहिस्ता उसके गाउन को ऊपर करने लगा.

उसने अपने जिम ट्रेनर से बोला कि मेरी कमर में कर्व आना चाहिए और बूब्स भी बड़े बड़े दिखने चाहिए. मैंने माँ से पूछा कि मेरे मामा और मामी तो कोई हैं ही नहीं फिर ये कौन आ रहे हैं. जैसे ही पैंटी अलग हुई और बॉस की आंखें जब मेरी बीवी की चूत पर पड़ीं तो बॉस देखता ही रह गया.

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मैं दोनों हाथ से भाभी के चुचे दबाये जा रहा था और मुँह से चूसे जा रहा था. मैं आंटी के बेडरूम में जाकर बिस्तर पर लेट गया, कुछ ही देर में मुझे नींद आ गई. भाभी मेरे बाथरूम में नहाती और मेरे रूम में ही कपड़े पहनकर निकल जाती.

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और शायद मेरा बदन थोड़ा गठीला है, इस वजह से भी कपड़ों और मेरे बदन की अच्छी जुगलबंदी हो रही थी. इतना कहते ही मेरा कंट्रोल खत्म हो गया मेरे लंड से माल की पिचकारी छूट गई. पर सच तो यह था कि अपना हाल मैं किससे कहूं कि मुझे गैर मर्द की खुशबू लेनी है, मुझे उसका लौड़ा चूसना है.

मैंने किशोर से कहा- जान डरो मत, मेरा एक पागल भाई है, शायद वो होगा, उसे भूख लगी होगी. हम ग्रीन फील्ड के अन्दर दाखिल ही हुए थे कि देखा सीवरेज का काम चल रहा था.

इस परिधान को मैंने केवल एक बार पहन कर देखा था, पर खुद अपने आप को नहीं देखा था क्योंकि उस समय मैं ज्यादा शर्मीली थी और अनुभव भी कम था.

मैं हैरान परेशान इधर उधर कुछ लोगों से पूछती रही कि शायद कोई मेरे मोहल्ले के पास का हो, पर कोई नहीं था. मैं बोला- अच्छा भाभी कहां हैं?कमला- वो सब्जी लेने गई हैं, आप बैठो वो अभी 5 मिनट में आ जाएंगी. अगर मैं उसकी तुलना किसी फिल्म की हिरोइन से करूँ तो विद्या बालन जैसी लग रही थी.

मैं गया तो आंटी ने घर के लोगों से मिलवाया और सब को ये भी बता दिया कि मैं उनकी दूध की डेरी को देखने के लिए आया हूँ. मैंने भाभी की सुंदरता की खूब तारीफ की और कहा- हेमा भाभी तो आपके मुकाबले में कुछ भी नहीं है, उसके पट मैंने देखे हैं. दस मिनट बाद मुझे उसने घोड़ी बना लिया और मेरी कमर को पकड़ कर अपना 9 इंच लंबा लंड मेरी चूत में पेल दिया.

उसने भी अपनी सफेद ब्रा पे मेरा नाम लिख कर फोटो निकाल कर मुझे भेज दी.

बिहार का बीएफ पिक्चर: तो उसने कहा- प्रोमिस करो!मैंने प्रोमिस कर दिया तो उसने कहा- मैं जो करूँगी, उसके बाद आपको बहुत बहुत गुस्सा आयेगा. अब मैं भैया को पकड़ने गई, तो भैया इधर उधर पानी में गए और मैं भी पूरे जोश के साथ उनका पीछा कर रही थी.

वो एक तरफ तो तेज़ी से धक्के मार रहा था, दूसरी तरफ मेरी जांघों को पकड़ धक्के के साथ उठा कर मुझे खींचने लगा. मेरी पिछली कहानी थीमेरी माँ की चुदाई दो लंडों से होती देखीदोस्तो, यह मेरी दूसरी कहानी है. कभी मेरी गर्दन पर किस करती और कभी मेरी छाती के निप्पलों को किस करती.

पहले मैंने अपना हाथ उसके हाथ में रखा, तो वो बोली- क्या कर रहे हो?मैं बोला- आपकी अंगूठी देख रहा हूँ.

मैंने देखा कि मामी कमरे के दरवाज़े के पास खड़ी होकर मेरी तरफ देख रही थी. मैं जोर से चिल्लाने लगी, पर कार बंद थी … इसलिए आवाज बाहर नहीं निकली … न किसी को सुनाई दी. मेरे जीवन में जो अब मौसी के यहां से आने के बाद दिन आए, उसको अगर आपको एक एक करके बताऊंगी तो आप आश्चर्य करेंगे.