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प्रस्तुत कहानीमेरी पुत्रवधू की सहेली अनुष्का(संयोग से मेरी छोटी बेटी का नाम भी अनुष्का है), उसकी किशोरावस्था की है, इसे मैंने अपनी पुत्रवधू सोनम के आग्रह पर ही लिखा है.!उनकी चुदाई का खेल देख कर मैं भी नंगा होकर मुठ मारने लगा। उस रात मेरी बीवी मोहित से अलग-अलग पोज़ में खूब चुदी और मैं अपनी बीवी की चुदाई देख कर मस्त होता रहा।अगले दिन मोहित जाते वक़्त मेरी बीवी की चूत और मम्मों में चुम्मी देकर ‘बाय’ बोला और कहा- अब हर रविवार को तुम मेरी बीवी बन जाना।मेरी बीवी ने कहा- मैं रविवार का बेसब्री से इंतज़ार करूँगी.

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सलमा बोली- आप रहने दो जी, मैं देवर जी से करवा लेती हूँ, वो कोई फीस नहीं लेते और ब्रा में हाथ दाल कर चूचियां सेट भी कर देते हैं !.पूनममेरा नाम पूनम है। मेरी ऊम्र 28 साल है। मैं तलाकशुदा हूँ। मेरे पति नामर्द थे इसीलिए मैंने उनसे पीछा छुड़ा लिया। मैं एक कोचिंग में बायोलॉजी पढ़ाती थी। हमेशा कोई न कोई कुत्ते की तरह मेरे भरे हुए बदन को घूरा करता था। चाहे वो मेरे छात्र हों या फिर चपरासी या साथी या फिर कोई और.

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का रहने वाला हूँ और अपनी पढ़ाई यहीं पर कर रहा हूँ। मेरे सबसे छोटे मामा से मैं काफी मजाक करता हूँ, सामान्य मजाक सिर्फ, कोई अश्लील मजाक नहीं।तो दोस्तों जब मेरा छटा सेमेस्टर ख़त्म हुआ तो उसके बाद मेरी लगभग दो महीने की छुट्टियाँ थी. मुझे और मेरे पति को सेक्स बहुत पसंद है और शादी के बाद कोई दिन भी ऐसा नहीं था जब हम एक बार या उससे ज्यादा बार चुदाई ना करते हों. !इससे वो एक शर्त पर तैयार हुईं कि वो मेरा आधा लण्ड लेगीं। मैंने मन में सोचा कि साली की गाण्ड में एक बार जाए तो फिर तो मैंने जानी.

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आपी बोली- देख, मैंने अभी तक तेरे नौशे भाई से गांड नहीं मरवाई थी, तूने सबसे पहले ही मेरी गांड मारी है.

जैसा सोचा था उससे कई गुना बेहतर है मिस्टर…मैं मुस्कुराया और सुमन के पीछे जाकर बैठ गया और पीछे से हाथ डाल कर उसके पेट पर फ़िराने लगा।मेरा एक हाथ उसके संतरों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा।मैं उसकी गर्दन चूमने लगा. मौसी का घर पास में ही है, कोई देख लेगा।और वो मौसी के यहाँ और मैं अपने घर! आगे क्या हुआ फिर कभी लिखूँगा।आप मेरी कहानी पर अपनी राय जरूर लिखना।[emailprotected]. बस रत्ना, मेरी जान… मैं बहुत तड़पा हूँ तेरे लिए, आज जाकर तू मेरे लंड के नीचे आई है, बहुत चुदासी है तू रानी और आज जब तू गरबा में नाच रही थी, तो बिल्कुल रंडी लग रही थी, आह्ह.

’उसने अपना लौड़ा खोल दिया।मेरी माँ खिलखिला कर हंसती हुई काउंटर पर पहुँची- ओए… चार रॉयल स्टैग की बोतल दे. !मैं जल्दी से वहाँ से जाने लगी।तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- आज स्कूल की छुट्टी है बहू… बैठ तो सही!मैं एकदम घबरा गई। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था।‘अब्बू मुझे जाने दीजिए. दोनों तरफ से एक साथ धक्का लगने के कारण एक ही बार में लंड मेरी कुंवारी चूत को चीरता हुआ लगभग आधा अंदर चला गया और मेरी चीख निकल गई, आई माँ मर गई ऊऊफ़ आह मा माँ अ आ आअ आह बहुत दर्द हो रहा है, विक्की प्लीज अ आह आ नि.

इस चड्डी को उतार कर फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो।इतना कहकर वो शरमा गई।मैंने उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी.

” उसने खींच कर चड्डी फाड़ दी।हाय मत करो प्लीज़ !”मेरी बनियान फाड़कर नंगा कर दिया और खुद खड़ा हुआ, पजामा उतार फेंका, कमीज फिर अंडरवियर !हाय इतना बड़ा लंड ! सच कहा था, उस पान वाले ने देखो इतना बड़ा लंड. !मैंने डाला और घस्से मारने शुरू किया। मेरा थोड़ी देर में काम हो गया और बहुत मजा आया।तो उसने कहा- अब रोज इसे आगे-पीछे किया करो, तुम्हारा जल्दी छूटने भी लगेगा।मैंने कहा- वो क्या होता है?तो उसने कहा- अभी मैं तुम्हारी मारूँगा तो मेरा छूटेगा… उसे देखना. हह !बाबा ने आव देखा ना ताव, रीना के पैरों को फैला दिया और अपना भारी लौड़ा उसकी बुर पर टिका दिया और जोरदार झटका मारा… सुपारा ही बड़ी मुश्किल से फिट हो पाया !रीना- आआआ अयाया मर गई रे…ईई !बाबा- साली अभी तो सिर्फ टोपा ही गया है.

वो फिर से बोली- दे सकते हो अपने आपको मुझे?मैंने सोचा कि जब यही निमंत्रण दे रही है तो मैं क्यों पीछे रहूँ. मैं अकेली बोर हो जाऊँगी और वैसे भी कल रविवार है।मैंने 2 मिनट सोचा, मुझे अब आगे बढ़ना चाहिए और जब किस्मत मेरा साथ दे रही है तो मैं क्यों ना इसका फायदा उठाऊँ।यह सोच कर मैंने मौसी को ‘हाँ’ बोल दिया।फिर मौसी ने मुझसे बोला- तुम आराम से टीवी देखो. ,फिर मैंने उसका लंड धीरे से चूसना शुरू किया, पहले टोपा चूसा, फिर धीरे धीरे उसका पूरा लंड मुंह में ले लिया.

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मुझे पागल कर रहे थे!मेरा लंड खड़ा हो गया था, दिल कर रहा था कि अभी घुसा दूँ अपना लंड उनके मुँह में और कहूँ कि चूस साली कुतिया. वो मेरा लन्ड पैन्ट के ऊपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी और मेरे मुँह से ओह आह की आवाज निकल रही थी और उसे मुझे तड़पा कर मजा आ रहा था.

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बीएफ सेक्स की वीडियो रीटा पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखती बोली, तो शैतान राजू मौका देख रीटा के होंटो अपने होंटो में प्यार से दबा कर चूसने लगा और साथ ही रीटा की पतली कमर पकड़ कर नीचे दबा कर और नीचे से लगातार एक के बाद एक तीन जबरदस्त धक्के लगा कर रीटा की गाण्ड में पूरा का पूरा मुगदर सा लण्ड पेल दिया. पार्टी कोई ज्यदा बड़ी नहीं थी इसलिए वहाँ पर सिर्फ कॉलेज के हमारे कुछ साथी ही थे, पिंकी, स्वाति, सोनम, मोनिका, मोनिका का भाई अंकुर जो हमारे साथ ही कॉलेज में है, सोनिया का भाई दीपक, मनीषा और प्रिया.

!अब मैंने उसका टॉप जबरदस्ती उतार दिया और उसके बड़े-बड़े स्तन मेरे हाथ मैं आ गए। मैं उनको दबा रहा था और उसको चूम रहा था। अब मैंने अपना लोअर और अंडरवियर हल्का सा नीचे कर दिया, मेरा लंड उसकी गांड में चुभ रहा था।वो बोले जा रही थी- प्लीज.

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आ! भाई ने मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और कसी हुई चूत के होंठों को अपने होंठ से दबा कर बुरी तरह से चूसने लगा और मैं तो बस कसमसाती रह गई, तड़पती. अब तो वो पूरी मास्टरनी लग रही थी। मैंने किसी आज्ञाकारी बालक की तरह उसके उरोजों को चूसना चालू कर दिया। वो आह… ओह्ह. तुम सो जाओ।मुझे मामी अब थोड़ी सेक्सी टाइप लग रही थीं, मैंने मामी को उस नज़र से पहले कभी नहीं देखा था।मैंने कहा- मामी, आप इतनी रात को नीचे क्या जाओगी.

तेरी सारी तकलीफें दूर हो जाएँगी।” प्रिया ने जोर से हंसते हुए कहा और उसकी बात सुनकर सब हंसने लगे।धीरे धीरे हम सब ने अपन अपना खाना ख़त्म किया और रोज़ की तरह अपने अपने कमरे में चले गए। जब मैं सीढ़ियों से उतर रहा था तो पीछे से सिन्हा आंटी ने आवाज़ लगाई- सोनू बेटा, यह लेकर जाओ…. कॉम पर पढ़ रहे हैं।वह सी… सी… कर चिल्लाने लगी तो मैं और उत्तेजित हो गया तो मैंने उसकी जाँघों के बीच में हाथ डाल दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा।उसने अपनी टांगें चौड़ी कर दीं, तब मैं उसकी चूत में दो उँगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर करने लगा।वह हाय. मैं नहीं करूँगा मुझे घिन आती है, उल्टी हो जाएगी!तो वो बोली- जैसी तुम्हारी मर्जी, पर कुछ करो तो सही!फिर मैंने उसके दोनों मम्मों को दबाना शुरू किया, चूसना शुरु किया तो वो बुरी तरह तड़पने लगी और कहने लगी- जोर से दबाओ गिरि, चूस.

!”अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था, मैं लन्ड अपनी चूत से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी, उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और मुझे जोर-जोर से चोदने लगा।मेरे मुँह से बस आ.

?’ मैंने कहा।नेहा- मैं माहवारी के दर्द का बहाना बना कर अपने घर आ जाऊँगी और फिर चुदाई करेंगे।अब हम लोग इतना खुल गए थे कि चुदाई जैसे शब्द का प्रयोग कर सकें।मैं- ठीक है. ’ निकलने लगी।मैं अपने मुँह में उस हलब्बी को चूसे जा रही थी और मेरी चूत भी रसीली हो चली थी।बालू की सिसकारी सुन कर मेरी भी आहें निकलने लगीं- मूओआयाया ओआहौ… अमम्मुआहह आ ससुर जी अहह बालू, बहुत बड़ा है और टेस्टी लग रहा है. तो आपने चूत नहीं दिलवाई और आज चूत दिलवाई तो मूठ मारने का मौका नहीं दिया। कहीं ऐसा ना हो कि मैं नेहा से पहले झड़ जाऊँ। कैसी लीला कर रहे हैं आप मेरे साथ.

जाओ, मुझे भी काम है, यह घर पर ही रहेगा!मैं चली गई, उसकी नज़र अब तक मेरी कमीनी सोच में बसी थी। मेरा मन स्कूल में लग नहीं रहा था। उसका चेहरा, उसका बलशाली शरीर. Pahli Chudai Pahle Pyar ke Sath-2इस बीच हम फ़ोन पर कुछ खुली बातें करने लगे थे।मैंने जाना कि वो कुँवारी है मैं भी कुँवारा था।पहली बार जब मैंने खुली बातें कीं तो वो बहुत गरम हो गई।उस दिन वो कुछ भी ठीक से नहीं कर पाई।उसने मुझे अगली बार ऐसा ना करने को कहा।लेकिन दोस्तों किसी लड़की से पहली बार दोस्ती करना एक ऐसा नशा है जो जब तक तन और मन दोनों तक न पहुँचे. मैं कराह उठी और मेरे मुँह से निकल गया- ओ माँ मर गई… आराम से… मार डालोगे क्या?तब अमर ने कहा- सील टूट गई क्या?और हँसने लगे.

मैं कहाँ शरमा रहा हूँ।मैंने इधर-उधर नजरें दौड़ाई, दूर कुछ लोग थे, पर वो हमारी तरफ नहीं देख रहे थे।मैं अपनी बात साबित करने के लिए उसके गालों को चूमने के लिए बढ़ा लेकिन वो मुझसे दूर हो गई।‘देखा. कहानी का पिछला भाग:औरत की चाहत-1बस अब क्या बताऊँ दोस्तो, उसके इस ज्वालामुखी ने कितना रस छोड़ा, मैं तो बस उसको अपनी आँखें बंद करके गटा-गट पीता ही जा रहा था.

!उसने लिंग को एक हाथ से पकड़ कर मेरी योनि की छेद पर सुपारे को भिड़ा दिया और फिर मुझे कंधों से पकड़ कर कहा- तैयार हो जाओ मेरी जान!मैंने भी उसके कमर को हाथों से पकड़ अपनी कमर उठा दी, उसका गर्म सुपाड़ा मेरी योनि के मुख में था, तभी उसने जोर से झटका दिया, मैं कराह उठी- उई माँ. मुझे तुम मेघा बुला सकते हो।तो मैंने उनके होंठों पर चुम्बन करते हुए कहा- मेघा आज मुझ पर छा जाओ।मेघा हँस पड़ी. वो चुप हो गई फिर मैं धक्के देने लगा, कुछ ही देर बाद उसे भी अब मजा आने लगा और अब वो बोले जा रही थी- लकी मुझे चोद दो.

हमारे कॉलेज का वार्षिक उत्सव चल रहा था। मैं किसी काम से अपने डिपार्टमेंट में जा रहा था। यही कोई शाम के 6.

बस अभी आता हूँ !थोड़ी देर बाद वह लौटा, इंग्लिश दारु की बोतल लेकर आया था।दो पैग मैंने लगाए, बाकी उसने ! पूरी रात उसने मुझे मसला, सुबह के चार बजे वहाँ से निकला। मेरा कीमा बना कर रख दिया और गांड सुन्न कर डाली।यह थी ‘मेरी चाय वाले के साथ भी चुदाई हो गई।’जल्दी जब किसी मस्त तरीके से चुदा तो आपके सामने हाजिर होऊँगा। तब तक के लिए बाय-बाय ![emailprotected]. !’ उसने दूसरा झटका मारा।काफी दिनों बाद बड़ा लंड अन्दर गया था, कुछ दर्द भी हुआ, बाकी बच्चे को उकसाने के लिए मैंने नाटक किया।‘हाय फट गई मेरी…!’‘ले साली. कोई क्या कहेगा।मैं- अरे मालिश में तो ऐसा करना ही पड़ता है और यहाँ कोई देखने वाला भी नहीं है।थोड़ा सोचने के बाद मौसी ने बोला- ठीक है, तुम 2 मिनट बाहर जाओ।दो मिनट बाद मौसी की आवाज आई- आजा अन्दर।मैंने जैसे ही अन्दर का नजारा देखा, मेरे तो होश उड़ गए।मौसी की चुदाई की कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार मेल करें।[emailprotected].

मन करता था अभी उसको कस कर दबा दूँ लेकिन डर लगता था, तब भी उसको नंगी देखने का बहुत मन करता था।मेरे दिमाग में एक शरारत आई, मैंने अपने दोस्त अनिल जो मेरे ही साथ रहता था, उसकी नजर बचा कर अपने कमरे में एक कैमरा छुपा दिया।अब मैं बाहर चला गया लेकिन मेरे दिमाग में अभी भी पूजा को नंगी देखने का मन कर रहा था।खैर. मैं यह सोच कर निश्चिंत था कि अगर पूजा आएगी तो उसके आने की आवाज़ सुनकर मैं अपनी स्थिति ठीक कर लूँगा, तभी किसी ने एकदम से दरवाज़ा खोल दिया.

और तभी से हमारा चुदाई का समारोह जब भी मौका मिलता, होता था। कभी मेरे यहाँ कभी उसके यहाँ और इस बीच वो 12 वीं पास हो गई। इंजीनियरिंग में दूसरे शहर में दाखिला मिल गया, तबसे हमारा चुदाई का प्रोग्राम काफ़ी कम हो गया, फिर धीरे-धीरे बंद ही हो गया।शायद उसे नया लण्ड मिल गया हो और आज भी मुझे बुर की तलाश है। आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो प्लीज़ मुझे जरूर ईमेल कीजिए।[emailprotected]. अंजलि राजपूतहाय दोस्तो, मेरा नाम अंजलि राजपूत है, मेरे वक्ष बड़े हैं, मेरी लम्बाई 5 फुट 3 इन्च, 39 किलो वजन है। मैं आपको आज अपनी कहानी सुनाने जा रही हूँ।मेरा जब बी. सुलेखा भाभी ने मेरी बाजू पर चुटकी काटी और मेरी तरफ आँख निकालते हुए बोली- अच्छा जी, इतनी जल्दी भूल गये… ये मुझे 2 साल पहले से जानते हैं, जब गांव आए थे तब इनसे मुलाकात हुई थी और अब देखो कैसे बातें बना रहे हैं.

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मैंने इतना सुनकर उसे हग कर लिया, फिर हम दोनों वहाँ से आ गए।मैंने दो दिन से अपने लण्ड की सरसों के तेल से खूब मालिश की और उस दिन का इंतज़ार करने लगा, और वो घड़ी आ भी गई.

जिस पर वो चीख पड़ीं और मेरे बाल पकड़ कर खींचे।फिर मैंने चूचे चूसते-चूसते उनके पेटीकोट को भी उतार दिया और उनकी पैन्टी भी उतार फेंकी। अब मैं उनकी चूत में हाथ डाल कर उनके दाने को मसल रहा था, वो ‘आहें’ भर रही थीं, जिनको सुन कर मुझको बड़ा मज़ा आ रहा था।फिर मुझे लगा कि कहीं मामी ऐसे ही न झड़ जाएँ, तो मैं रुक गया।मामी बोलीं- रुके क्यों हो?मैंने कहा- मामी हाथ से ही मज़े लेती रहोगी या कुछ और भी लोगी. अरे हाँ तुम ही मेरे मामा बन जाओ और मेरे वार्डन से कहो कि मैं अपनी बिटिया को कल सुबह भेज सकता हूँ।रणजीत ने वार्डन को फोन किया और उससे कहा- रानी गुड़गाँव से दिल्ली 9 बजे तक नहीं आ सकती। प्लीज़ उसे एक दिन की छुट्टी दे दें, सुबह 9 बजे तक आ जाएगी।वॉर्डन मान गई।रानी सोफे से उछल पड़ी, रणजीत भी खुश हो गया।दोनों अब हाथ में हाथ डाले पूरे कमरे में डांस करने लगे।‘देखा तुम्हारा काम कर दिया. !वो- हाँ हाँ… मत छोड़ना मेरी जान!और मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया और मैं उसके दाने को अपने दाँतों से काटने लगा.

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मुझसे सब्र नहीं हो रहा…नारायण ने मधु के पावों के बीच आ गया और उसके बुर को चाटने लगा। मधु अब सीधी लेट गई और अपने दूध दबाने लगी। उसके मुँह से सिसकारियाँ आने लगी’। नारायण अपनी 2 उँगलियाँ मधु के बुर के अन्दर डाल कर अन्दर-बाहर कर रहा था।मधु सिसकारी लेते हुए बोली- बस. और आप कुछ भी गलत नहीं कर रही हो, मैं आपसे वो प्यार करना चाहता हूँ जिसके लिए आप बहुत प्यासी हो।तो उनकी आँखों में आँसू आ गए, उन्होंने मुझे प्यार से गले लगा लिया और मेरे गाल पर चूमते हुए कहा- आई लव यू.

वो सिसकारियाँ भरने लगी।वो मुझे अपनी बाहों में भर कर दबाने लगी।मैंने उससे बिस्तर पर चलने के लिए कहा, तो उसने कहा- नहीं. तब मुझे लगता है उसे अपने सीने से लगा लूँ, उसकी आँखों में इतना प्यार देख कर मुझसे रहा नहीं जाता!मैं उसके दिल की भावनाओं को समझ रही थी, पर वो रो न दे इसलिए बात को मजाक में उड़ाते हुए कहा- तो ठीक है. तो वो घोड़ी बन गई और मैंने पीछे से लंड पेल दिया और दनादन चोदने लगा।लगभग 20 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था.

पढ़े लिखे होने के कारण उनका उठना-बैठना और पहनावा भी शहर वासियों जैसा है, इसलिए मेरे साथ घर में बहुत जल्दी एडजस्ट हो गए हैं. वैसे वहाँ और भी सेक्सी लड़कियाँ थी, सभी तकरीबन 19/20 साल की लग रही थी और सबने ही मिनी-स्कर्ट और रिवीलिंग टॉप पहने हुए थे। शायद हम सभी लड़कियाँ क्लब जाने के लिए ऐसी ही ड्रेस पहनती हैं लेकिन एक लड़की वहाँ पर ऐसी थी जिसकी क्लीवेज ज्यादा ही एक्सपोज़्ड थी, उसे देख कर महक ने धीरे से कहा कि वो तो कालगर्ल जैसी दिख रही है. एक हफ्ते पहले फ़ेसबुक पर मैं आरुष नाम के एक लड़के से मिली थी, मैंने दो दिन तक उससे याहू पर बात की और फिर उसने मिलने के लिए पूछा.

मुझे मालूम है कि इसे पढ़कर आपको कुछ ख़ास उत्तेजना नहीं आई… लेकिन यह वास्तविक घटना है… घटनायें बहुत सारी हैं पर एक बार में सारी नहीं बता सकता हूँ.

?यही होता है एक परिपक्व और मंजे हुए खिलाड़ी और नौसिखिए में अंतर…! हम दोनों को पता था कि चुदाई करनी है, मिले भी थे इसीलिए लेकिन फिर भी एक झिझक थी, एक अनुभव हीनता थी।वो रातें सोच कर मैं आज भी रोमांचित हो जाता हूँ।उसने बोला- कैसे?‘आँखे मूंदो. ’उसने अपना लौड़ा खोल दिया।मेरी माँ खिलखिला कर हंसती हुई काउंटर पर पहुँची- ओए… चार रॉयल स्टैग की बोतल दे.

जीजू… बस… ओह… रुको… आह… ईईईईइ…!’अब रुकने का क्या काम था मैंने एक धक्का लगा दिया। इसके साथ ही गच्च की आवाज के साथ आधा लण्ड गाण्ड के अन्दर समां गया। उसके साथ ही माया की चीख निकल गई।‘ऊईईइ…माँ आ अ… हाय. कुछ देर के बाद मैंने पाया कि मेरा लंड पानी से भीग रहा है और मुझे लगा कि वह पानी छोड़ रही है।वो नीचे से कमर उठा-उठा कर चिल्ला रही थी और बड़बड़ा रही थी- हाआआअन और चोदो. ’ निकलने लगी।मैं अपने मुँह में उस हलब्बी को चूसे जा रही थी और मेरी चूत भी रसीली हो चली थी।बालू की सिसकारी सुन कर मेरी भी आहें निकलने लगीं- मूओआयाया ओआहौ… अमम्मुआहह आ ससुर जी अहह बालू, बहुत बड़ा है और टेस्टी लग रहा है.

आप को सर जी ने अन्दर बुलाया है।मैं उठी और उसी केबिन की तरफ चल दी और केबिन के दरवाजे पर दस्तक दी, अन्दर से ‘कम इन’ की आवाज आई और मैंने दरवाजे खोला।मैं देखती रह गई, सामने एक बहुत ही जवान और आकर्षक युवक बैठा था।वो एकदम गोरा स्मार्ट था, उसे देख मेरी गरम चूत में पानी आ गया और मैं भूल गई कि वो भी मुझे देख रहा है।तभी वो आदमी बोला- आइए नेहा जी. ?तो मैं थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली- बीवी को किसी और को देकर चले गए इतना भी ना सोचा कि वह जोर-जबरदस्ती करता तो मैं क्या करती, मुझे डर लग रहा था।पति बोले- यार डरने की कोई बात नहीं है, हम तो थे ना और सुनील भी तो मेरे साथ ही था।ये सब बात करते-करते हम दोनों सो गए।सुबह सुनील कब आया. ’ रूम सर्विस वेटर को डिस्टर्ब न करने की हिदायत मैंने दे दी।उसके तुरंत बाद मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया।मैंने कहा- साल भर से तुम पर मेरी निगाह थी, अब बाँहों में आई हो। आज तो तुम्हारी बेदर्दी से चुदाई करूँगा।सुनन्दा बोली- मैं भी दो साल से प्यासी हूँ, क्योंकि दो साल पहले मेरा पति से तलाक हो गया था।मैंने कहा- ओह.

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सुबह में उसने मुझे गाण्ड मारने को कहा तो मैंने उसकी गांड भी मारी… उसने मेरे को खूब मस्ती करवाई…बाद में उसने अपनी रूममेट को भी मेरे से खूब चुदवाया…उसकी सहेली और आगे की चुदाई की कहानी अगली कहानी में…आप मुझे जरूर बताइएगा कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी ![emailprotected]. पढ़ तो मैंने भी लिया था तुम्हारी आँखों में अपने लिए प्यार… बस इंतजार में थी कि तुम कब कहोगे…फिर उसने मेरा हाथ अपने दिल पर रखा और बोला- आई लव यू सोना. मैंने अनजान बनते हुए पूछा- पापाजी और कैसी बड़ी सजा देंगे?तो उन्होंने अपनी बलिष्ठ बाजुओं से उठा कर मुझे मेरे कमरे में ले जाकर बेड पर पटक दिया और मेरे चूतड़ों के नीचे एक तकिया रख दिया.

अब मैं हल्का सा उसके ऊपर लेट सा गया, और उसके माथे पे किस किया और उसकी आँखो में देखने लगा, वो हल्की सी मुस्कराई और अपनी आँखें बंद कर ली. !’उसका तना हुआ लण्ड मेरी गांड पर चुभ रहा था। वो मुझे उकसा रहा था। मैं उसकी बाँहों से निकलना चाह रहा था, पर उसकी मजबूत बाँहों से नहीं छूट सका और घूम कर सीधा हो गया। उसने मेरे मम्मे दबाने शुरू कर दिए।‘क्या इरादा है. बांग्ला सेक्सी वीडियो एचडीलेकिन मेरा नज़रिया अब बदल गया था, जैसे ही बहन मुझसे लिपटी मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसकी गाण्ड पर रख दबा दिया.

तो वो हमारे लिए खाना बनाती थी और फ़िर मैं और निशा अस्पताल टिफ़िन देने जाते थे, उधर से रात को देर से घर आते थे.

प्यार कितना करता हूँ।’‘नहीं तू कमीना तंग ज़्यादा करता है और प्यार कम… तू सच में बहुत हरामी है।’ शिखा रानी ने आँखें छुपा के गाली वाली भाषा बोली। मज़े में उसके सुन्दर चहरे पर मुस्कराहट खेल रही थी। वो चाहे खुद गाली देने में शरमाती हो पर गाली सुनने में तो उसे खूब मज़ा आया था।मैंने शिखा रानी की चूचे कस के निचोड़े और निप्पल उमेठते हुए कहा- शिखा रानी अब क्या सबूत दूं प्यार का. लंच के बाद, वो सुबह ट्यूशन गई थी, तब उसका भाई ताला लगाकर कहीं चला गया था, उसे कुछ और काम ना था तो वो मेरे घर आ गई। उस दिन मैं भी अकेला था।क्या बताऊँ जब दरवाज़ा खोला और उसे खड़ा देखा तो मेरे बदन में एक झुरझुरी सी हो गई…वो कमसिन हसीना मेरे सामने खड़ी थी, शर्ट में कसे हुए उन्नत और तने हुए मम्मे.

।पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो दोनों पिछले एक घंटे से अन्दर कर क्या रहे हैं, पर मैंने सोचा जो भी करें मुझे क्या. !और वे भी हँसने लगीं। फिर उन्होंने अपने हाथों से अपने मम्मे दबा कर ब्रा को पहन लिया और मुझसे बोलीं- ज़रा तेरे पीछे ब्लाउज पड़ा देना तो…!मैंने पीछे देखा और लाल रंग का ब्लाउज था, जो उनको दे दिया।वो अपना ब्लाउज पहनने लगीं, पर उसके एक ऊपर का और एक नीचे का बटन टूटा हुआ था।मैंने कहा- भाभी इसके बटन तो टूटे हुए हैं. !मैं जल्दी से वहाँ से जाने लगी।तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- आज स्कूल की छुट्टी है बहू… बैठ तो सही!मैं एकदम घबरा गई। उन्होंने आज तक ऐसा नहीं किया था।‘अब्बू मुझे जाने दीजिए.

कुछ देर तक ज़ोरदार चुदाई करने के बाद वो आदमी जोर से गुर्राया- आआहह… झड़ रहा हूँ…और दीदी की कोख में अपना सारा बीज डाल दिया।कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने बाद दीदी उसे फिर से चूमने लगी और बड़ी इठला कर बोली- देखो ना.

मैं तेरी गांड भी मारना चाहता हूँ।भाभी हंसते हुए बोली- मार लियो मेरे राजा।मैं- जानेमन मेरा आने वाला है. !नारायण अब धीरे-धीरे अपने लवड़े को अन्दर-बाहर करने लगा और बीच-बीच के मधु को चुम्बन कर रहा था।लगभग 5 मिनट तक ऐसा करने के बाद मधु बोली- नारायण मेरा काम खत्म हो गया. आआअह्ह…’और मैं भी ‘उम्म्म्मा आम्म्म्मा’ करते हुए मजे ले रहा था।मैंने देखा उनका प्यारा सा दाना काफी उठ चुका था, जैसे ही मैंने देखा उनको अपने दोनों होंठों में दबा लिया। उन्होंने जोर से बालों को पकड़ लिया और जोर से ‘आआअह्ह उउफ्फ’ करने लगी, उसको बहुत मजा आ रहा था, उसकी सिसकारियों से पता चल रहा था।फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनके दाने पर रखी और उसको हिलाने लगा, वो सिसकार कर बोली- उउफ्फ्फ.

न्यूड पिक्चर!उसने अपने लंड को हाथ से हिलाया और कहा- अपनी टाँगें फैलाइए और मोड़ लीजिए।मैंने अपनी टाँगें फैला लीं और घुटनों से मोड़ लिया। मुर्तुजा मेरी टांगों के बीच आया उसने अपने लिंग को मेरी योनि के पास रखा और हाथ से लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के बीच ऊपर-नीचे रगड़ने के बाद सुपाड़े को योनि की छेद में टिका दिया।मेरी अंतहीन प्यास की कहानी जारी रहेगी।आप मुझे ईमेल कर सकते हैं।[emailprotected]. !’मैंने टांगें खोलीं और उसके लंड को पकड़ कर फुद्दी के मुँह पर रखा, साथ ही मैंने दोनों हाथों से ऊँगलियों से फुद्दी की फांकें चौड़ी कीं, तब उसने करारा झटका मार दिया।‘हाय मर गई कमीने.

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मैंने देखा कि जॉय मेरे और महक के साथ कुछ ज़्यादा ही टची फीली हो रहा था, लेकिन वो मेरे बदन को ज़्यादा ही छू रहा था। महक तो डिड नोट माइंड, पर जब उसने मेरी नंगी पीठ पर हाथ फिराया तो मुझे कुछ अजीब सा लगा, खास तौर राज के सामने. उसमें से क्या खुशबू आ रही थी यार! मैंने जल्द ही पेंटी हटा दी तो उसमें से एक प्यारी सी गुलाबी चूत के दर्शन हुए. उसने कहा- लेकिन-वेकिन कुछ नहीं, चलो।मैं अन्दर आ गया…उसने कहा- मैं कपड़े बदल कर आपके लिए काफी लाती हूँ, आप बैठो.

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मेरा लंड उत्तेजना में फूलता जा रहा था और ऐसा लगता था कि वह फटने जा रहा था इसलिए मैंने अपने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया, फिर सीधा होकर उसकी टांगों के बीच में बैठ गया और पहले उसकी चूत में खूब सारी थूक लगा कर उसमें एक उंगली डाली!उसकी चूत उत्तेजना के कारण बहुत कसी हुई थी और उंगली अन्दर जाते ही वह दर्द से कराहने लगी.

जिस दिन से तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया है, उस दिन से उसके नसीब की दाद देता हूँ कि उसे तेरी जैसी सुंदर बीवी मिली है। पर तू ज़रा सोच उसे तेरी कितनी कदर है?ससुर जी- हर समय काम-काम करता रहता है, तुझे क्या लगता है, उसकी कम्पनी में लड़कियों की कमी है? वो रोज अपनी सेटिंग को चोदता होगा लाहौर में. दस मिनट तक पापा मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करते रहे, मैं इस दौरान दो बार झड़ गई। अब पापा भी झड़ने के करीब आ गए।उन्होंने रफ्तार और बढ़ा दी, पूरा बिस्तर हिलने लगा, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं ट्रेन में हूँ और आख़िर पापा के लौड़े ने लावा उगल दिया, मेरी प्यासी चूत पानी से भर गई।काफ़ी देर तक पापा मेरे ऊपर पड़े रहे हाँफते रहे. वह बोले- क्या मेरा सारा रस तुम मुफ़्त में पी जाओगी और एवज मुझे कुछ नहीं दोगी? उठो और बेड के ऊपर आकर लेटो ताकि मैं भी तुम्हरी महारानी का रस पी सकूँ.

सभी दोस्तों को मेरा हार्दिक प्रणाम।मैं अपनी प्रथम सच्ची कहानी को आपके सामने प्रस्तुत करते हुए बड़ी प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ।साथियों मेरा नाम अंकित सिंह है, मेरी उम्र उन्नीस साल है। मैं बागपत (उ. !उसने अब अपना हाथ मेरे नितम्बों पर रख दिया। मुझे अपनी और कसके खींच लिया और अपनी कमर को घुमाने लगा। मैंने महसूस किया कि सलवार के ऊपर से ही उसका लिंग मेरी योनि से लग रहा है।हम काफी देर इस अवस्था में एक-दूसरे से चिपके आलिंगन करते रहे।तभी अमर ने कहा- अब अन्दर चलो, मुझसे रहा नहीं जा रहा है, मैं अपने लिंग को तुम्हारी योनि के अन्दर डालना चाहता हूँ. दोस्तो, इस तरह चुदाई करते समय लंड पूरी तरह से तो चूत के अन्दर नहीं घुसता, वो सिर्फ़ आधा या आधे से ज्यादा ही घुस पाता है.

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हम तीनों ने मिलकर सुबह के 4 बजे तक सैक्स का जी भर कर लुत्फ़ उठाया, मैंने अपने काम रस से भाभी और के मुँह का मेकअप भी किया ठीक उसी तरह जैसे पूजा ने मेरा किया था. एक बार तो मैंने शान्ति से खड़े होकर नजर भर कर उसके जिस्म को देखा, कमरे मैं सारी की सारी लाईट जली हुई थी, जिससे उसका कामुक बदन साफ़-साफ़ नजर आ रहा था. वे कहती हैं कि दर्द होता है, पर मैं उनकी गाण्ड को खूब दबाता हूँ और चाट भी लेता हूँ।तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी आपको, अगर कोई गलती हो गई हो तो माफ़ कर देना।कहानी का अगला भाग:जन्मदिन के तोहफे में भाभी की गाण्ड मारी.

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अपनी कहिए।रणजीत- अपनी ही तो कह रहा हूँ कि अब बस रहा नहीं जाता।उसने झुक कर रानी के होंठों को चूम लिया।रानी- अरे.

मेरी जान बोलो क्या बात है।रानी- मैं आपसे मिलना चाहती हूँ और हाँ अब मुझसे यह जवानी सहन नहीं होती। बताओ मैं क्या करूँ. !मैं उनका सारा सड़का पी गई।उन्होंने अब एक-एक करके मेरे कपड़े उतारना शुरू किया, पहले कुरता फिर जीन्स, फिर मेरी ब्रा-पैन्टी भी उतार दी। मैंने अपनी देह मनोज भैया को सौंप दी थी।मैं जब पूरी नंगी हो गई तो कहने लगे- साली अब तक बहुत सड़का मारा है तेरे नाम का, आज तो तेरी चूत ही फाड़ दूंगा. गांव की सेक्सी नंगीदेख राजू, मोटे-तगड़े लंड की कीमत एक औरत ही जानती है। इसको मोटा-तगड़ा बनाए रखना। जब तक तेरी शादी नहीं होती मैं इसकी रोज़ मालिश कर दूँगी।’‘आप कितनी अच्छी हैं भाभी, वैसे भाभी इतने बड़े लंड को लवड़ा कहते हैं।’‘अच्छा बाबा, लवड़ा.

फिर मैंने कहा- भाभी, मुझे भी मूतना है!तभी भाभी मेरा लंड पकड़ कर अपने मुँह में लेकर बोली- आज तुम्हारा मूत पीना है मुझे. मैं उसके कानों को चूमता चाटता हुआ उसकी गरदन तक आया और अपने पूरे होशोहवास खोकर उसकी गरदन को चूमने लगा. !जैसे-तैसे मैंने लंड गांड में घुसेड़ दिया।मामी बहुत चिल्लाईं, पर मैं नहीं रुका और पूरा लंड डालने के बाद हल्के-हल्के झटके देने लगा।मामी की चीखें धीरे-धीरे ‘आहों’ में बदल गईं और फिर बस जरा सी देर बाद मामी ने खुद ही कहा- तेज़-तेज़ करो.

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सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।अताउल्ला- ठीक है. वो उस कोने में ताला-चाभी रखी है, अगर मेरे आने से पहले तुम लोग निकलना चाहो तो वो जो कोचिंग के पास अमर की पान की दुकान है. मैं उसे बेतहाशा चूमने लगा और उसके कपड़े उतारने लगा, तो पूजा ने शरमाते हुए कहा- समीर… भाभी देख रहीं हैं.

कुछ देर बाद भाभी खड़ी हुई और मेरा लंड पकड़ कर मुझे पूजा के पास ले गईं, और पूजा से मेरा लंड चूसने को कहा. मेरे में चला जाएगा?मैंने कहा- मुँह में डाल कर देखो, अगर मुँह में चला जाएगा, तो चूत में भी चला जाएगा!इतना कहने पर वो मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। कभी मुँह में रखकर टॉफ़ी की तरह चूसती तो कभी आगे-पीछे करके चूसती.

उम्म’ मैं सिर्फ़ चुदाई के दर्द को बयान कर रही थी।ऐसा बड़ा लंड अपनी चूत में कोहराम मचा रहा था, मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी, मैं मस्त हो कर अब उसका साथ दे रही थी। करीब 5-6 मिनट ऐसा चलता रहा।फिर ‘आआअहह.

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हम सबने मिल कर तय किया कि जो सबसे ज्यदा पुश अप करेगा वो जीत जायेगा, क्योंकि मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा था इसलिए मैं पुशअप के लिए मान गई, साथ ही में सोनिया को उसी के खेल में हराना चाहती थी. तभी रीटा ने अचानक झटके से राजू के लण्ड की टोपी पर अपने लाल लाल रसीले होंट चिपका दिये और राजू की आँखों में आँखें डाल कर चुसड़ चुसड़ कर लॉलीपॉप की तरह चुस्सा मारने लगी. आप यह भी कह सकते हैं मुझे अन्तर्वासना की लत लगी हुई है और मैंने अन्तर्वासना की 2008 से लेकर आज तक प्रकाशित होने वाली अधिकतर कहानियाँ पढ़ी हुई हैं.

तुम्हारे लिए तो सही समय पर आया हूँ… पर अंकल को देखकर बिल्कुल नहीं लग रहा कि मैं ठीक समय पर आया हूँ … बहुत मायूस दिख रहे हैं बेचारे… उनके चेहरे को देखकर ऐसा ही लग रहा था जैसे बच्चे के हाथ से उसकी चॉकलेट छीन ली हो.

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अब तक हम दोनों ने एक दूसरे के साथ भरपूर बात कर चुके थे, हमबिस्तर हो चुके थे और शायद एक दूसरे के शरीर का एक एक अंग देख चुके थे, छू चुके थे, चूम चुके थे. तब मैं अपने पड़ोस में रहने वाली अपनी शिष्या रिया के साथ सेक्स किया था, उस घटना के समय रिया की उम्र 19 वर्ष थी और वह शाम सात बजे से आठ बजे के बीच में मुझसे विज्ञान पढ़ने के लिए मेरे घर पर आती थी. उम्र कोई 30 साल पर लगती 25 की है… बिल्कुल गोरा रंग जैसे दूध में सिन्दूर मिला दिया गया हो… भूरे बाल… जो उसने शार्ट स्टेप कटिंग कराये हुए हैं… गुलाबी लब.

उसकी मेल पढ़ कर मेरी चूत में गुदगुदी होने लगती पर अजनबी से चुदवाना मुझे कुछ सही नहीं लग रहा था इसीलिए मैं उसको टालती रहती.

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सादर प्रणाम! मेरा नाम सोनू कुमार है, मैं 22 साल का सांवला रंग, मैं दिखने में मध्यम शरीर का हूँ। उस समय मैं दक्षिण भारत में पढ़ता था और अपने घर बिहार छुट्टियों में आया हुआ था. रिया की सुन्दरता और शरीर के बारे में कुछ भी कहने के लिए तो मेरे पास शब्द ही नहीं हैं, वह तो एक अप्सरा थी जिसके शरीर का पैमाना था 36-26-36 और जब वह चलती है तो मानो क़यामत आ जाती है. यह सब मैं आप सब को इसलिए बता रहा हूँ ताकि आप लोग अपनी कल्पना को अच्छी तरह उभार कर कहानी का पूरी तरह मजा ले सको.