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जब टी-शर्ट पहनता हूँ तो वो उभरकर ऐसे लगने लगते हैं जैसे मैंने ब्रा पहन रखी हो और उसके अंदर मेरे चूचे कैद हो रखे हों.वहीं एंडी चूत को चाटने का भरपूर लुत्फ़ ले रहा था। धीरे-धीरे तीनों के बाथरोब एक तरफ.

क्योंकि हमारे उम्र के बीच फासला ज़्यादा नहीं था। भैया का बिज़नेस होने के कारण वे दिन भर घर पर नहीं होते और उधर कॉलेज के बाद मेरी एक्सट्रा स्टडीज चल रही थी. बीएफ फिल्म सेक्सी ब्लू फिल्म बीएफ कि मैं क्या देख रहा हूँ।उनमें से एक मीडियम साइज की 26 साल की औरत ने मुझे बोला- क्यों रे तूने आज तक कभी बोबा नहीं देखा.

मैंने उसे बताया कि रसोई में सब सामान है जाकर देख लो और चाय बना दो।वो चाय बनाने के लिए रसोई में जाने के लिए जैसे ही वो पलटी.

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’ आपी के संजीदा लहजे में कोई फ़र्क़ नहीं आया था।मैंने कहा- आपी ठीक है कि आप मेरी बहन हो. ’ घुरघुराते हुए मुझे इशारा किया कि मैं अपने लण्ड का पानी उसके मुँह में टपका दूँ।अर्श ने अपनी जीभ को मेरे लण्ड के सुपाड़े पर घुमाते हुए जहाँ से रस टपकता है. पिछले भाग में आप सभी ने जाना था कि मेरी बड़ी साली मुझसे चुदने को राजी थी.

पता ही नहीं चला।फ़िर रात को हमने खाना खा लिया और पूरी बच्चा पार्टी छत पर टहलने चली गई।मैं और आईशा भी साथ-साथ टहल रहे थे। वो भले ही मुझसे तीन साल बड़ी थी. आपी ने मेरी बात सुनते ही लंड को मुँह से निकाला और तेजी से मेरे लंड को अपने हाथ से मसलने लगीं, फिर 3-4 सेकेंड बाद ही मेरे मुँह से एक तेज ‘आअहह’ निकली और मेरे लंड ने फव्वारे की सूरत में अपने जूस की पहली धार छोड़ी. बहुत तंग करता है।इसी बहाने से मैंने बेबी को हँसाने के लिए उसके चेहरे पर हाथ लगाया और धीरे से आंटी के मम्मे को हल्का सा टच किया। आंटी को शायद पता नहीं चला कि ये मेरा हाथ है या बेबी का मुँह है।अब मैं टीवी की तरफ़ देखता हुआ आंटी के मम्मों को धीरे-धीरे टच करने लगा। कुछ मिनट बाद मुझसे कन्ट्रोल नहीं हो रहा था। मैं उठ कर बाथरूम में गया और मुठ मार कर मैंने अपना माल निकाल दिया।बाहर आ कर देखा.

क्या गोरी थी मेरी भाभी अन्दर से और क्या ज़बरदस्त गोलाइयाँ थीं उनकी. तो मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।मैं कुछ देर रुका, फिर मैंने कई झटके मारे. उसके निपल्स बहुत टाइट हो गए थे, मैं उन्हें चूसने लगा।मेरा मन तो उन्हें पूरा खा जाने को चाह रहा था.

तो छुट्टी ले ली थी। बाद में दो दिन शनिवार और रविवार की छुट्टी तो थी ही।हम लोग सुबह से घूम रहे थे। शाम को मूवी देखने भी गए और रात को डिनर के लिए होटल में गए।पूरे दिन में मैंने कई बार बृजेश से पूछा- तुम्हें बर्थ-डे गिफ्ट में क्या चाहिए?तो वो कहता रहा- आज तो मुझे बेहद कीमती तोहफ़ा चाहिए और वो मैं तुमसे बाद में मांग लूँगा।मैंने कहा- ठीक है. पर तुम रात को भी मेरी मम्मी को बहुत तेज धक्के लगा रहे थे।मैं थोड़ी देर उसके चेहरे की ओर देखता रहा।मैंने पूछा- तुमको कैसे पता?वह थोड़ा मेरे पास आई और बोली- मुझे सब पता है कि तुम मम्मी के साथ सेक्स कर रहे थे और मैं यह बात अभी नीचे जाकर सबको बताने वाली हूँ।मेरी तो गांड ही फट गई.

’माँ से यह सुनकर मुझे अजीब सा लगा लेकिन मैं दिल को समझाकर खाना खाकर सो गया। सुबह आँख खुली तो जगजीत वापिस नहीं आई थी।बाबा जी से डेरे पर फोन किया तो पता चला दोपहर तक आएगी।मैं नाश्ता करके काम पर चला गया।रात को जब घर आया तो जगजीत से मिला। थोड़ी सी खिली-खिली लग रही थी।रात सबके साथ इकट्ठे खाना खाने के बाद जब मैं अपने कमरे में गया तो जगजीत से पूछा- क्या बात है जानेमन.

पर मैं उसे कुछ बोल नहीं सकी।करीबन आधे घंटे मालिश करने के बाद मैंने उसको बोला- आलोक अब रहने दो। अब मुझे पहले से ठीक लग रहा है.

इसको और बड़ा करो तो मज़ा आ जाएगा।मैंने आपी से कहा- आपी इसका भी कुछ करते हैं. और आप आ गईं।और यह कह कर क़मीज़ के ऊपर से ही आपी के दोनों उभारों के दरमियान में अपना चेहरा दबाने लगा।मैंने एक नज़र उन दोनों को देखा और कैमरे से उनको ज़ूम में लेकर रिकॉर्डिंग ऑन करके वहाँ साथ पड़ी कुर्सी पर ही बैठ गया।आपी ने अपने एक हाथ से फरहान की क़मर सहलाते हुए दूसरा हाथ फरहान के सिर की पुश्त पर रखा और अपने सीने में दबाते हुए कहा- उम्म्म्म. अभी आप मेरी पॉकेट से अपने लिए खर्चा लो।आपी ने मेरी पॉकेट में हाथ डाला और उसमें से 200 निकाल लिए और मुझे कहा- इतने बहुत हैं.

मेरी बुआ की लंबाई 5 फुट 3 इंच है, एकदम दूध सा सफेद रंग, होंठ तो एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह इस कदर मस्त हैं कि देखते ही खा जाने का मन करता है. जिससे आपी के जिस्म को एक झटका सा लगता और 2 सेकेंड के लिए उनकी हरकत को ब्रेक लग जाती।मैंने आपी की गाण्ड के सुराख को भरपूर अंदाज़ में चाट कर अपनी ज़ुबान हटाई और दूसरे हाथ की एक उंगली को अपने मुँह से गीला करके आपी की गाण्ड के सुराख में दाखिल कर दी. जो कि साईड से पूरा खुला हुआ था।हमारे सोने की व्यवस्था कुछ ऐसी थी कि पहले मैं सोया था.

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वो अभी भी उसकी ओर ही देख रहा था। रश्मि जहाँ उसकी ढिठाई को देख कर अवाक् थी. और ये कह कर वे हँसने लगीं।मैंने कहा- आपी आप बहन के बाद मेरा प्यार भी तो हो ना. मेरे शरीर में अजब सा हो रहा था, मैं तो सातवें आसमान पर था।निहारिका की आँखों में पानी आ गया था.

जैसे नशे में हों।उन्होंने मेरी नज़र को अपने चेहरे पर महसूस करके नज़र उठाई और मुझे कहा- सामने देखो. तो मेरे बॉल्स का ऊपरी हिस्सा भी आपी के मम्मों और पेट के दरमियानी हिस्से पर रगड़ ख़ाता हुआ आगे जा रहा था और जब मैं लण्ड को वापस लाता. तो मुझसे बहुत बात कर रहे थे।मुझे बचपन से अंडरवियर में सोने की आदत है, बातों-बातों में मेरे मुँह से ये बात निकल गई.

आपी ने अपना दुपट्टा उठाया और उसके कोने की छोटी सी गठरी बना कर मेरे पास आ गईं।मैं बेड पर बैठा.

और मेरी आँखों में देख रही थीं। उनकी आँखों में चुदाई का नशा साफ दिख रहा था।फिर मैंने उनकी चूत से उंगली निकाली और सीधे उनके मुँह में डाल दी।भाभी मेरी उंगली को बहुत प्यार से चूसने लगीं. प्लीज़ अब मान जाओ।मैंने उखड़े-उखड़े लहजे में ही कहा- यार आपी आप भी तो अजीब ही हरकत करती हो ना.

बीएफ फिल्म सेक्सी ब्लू फिल्म बीएफ फिर आपी मेरे निचले होंठ को चूस कर खींचते हुए मुझसे अलग हुईं और अपने होंठों पर ज़ुबान फेर कर बोलीं- सगीर. इतना तो मैं सह ही सकता हूँ।फिर मैंने उसे नीचे ही लेटे रहने दिया और मैं उसके ऊपर आ गई। मैंने उसके लण्ड को पकड़ा और उसे अपनी चूत पर लगाया और ऊपर का थोड़ा हिस्सा अन्दर जाने के बाद मैंने उसके दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया।मुझे पता था कि रोहन के लण्ड की सील टूटने वाली है.

बीएफ फिल्म सेक्सी ब्लू फिल्म बीएफ तो मैंने अपने लण्ड को वहाँ ही रोक दिया।आपी ने अपनी ज़ुबान वापस मुँह में डाली और कुछ देर मेरी आँखों में ही देखती रहीं. तो वो वहीं बाहर ही बैठी मिल गईं।मैंने उनको हल्के से इशारे से मेरे कमरे में आने का कहा। उसके बाद मैं अपने कमरे में आकर बैठा ही था कि वो भी पीछे से आ गईं।मैंने कमरे के गेट को अन्दर से बन्द कर दिया।अब हम दोनों फिर से कमरे के अन्दर अकेले ही थे।इस बार मैं कोई जल्दबाज़ी नहीं करने वाला था। पहले मैंने उनको कुर्सी पर बिठाया। मैंने सर्दी में ओढ़ने के कंबल को बिस्तर को ठीक करके उसके ऊपर बिछा दिया.

उसके बाद फ्रेंड के घर जाऊँगी।बस मैं चुदने के लिए निकल गई।फिर मैं राज से मिली और फिर हम दोनों उसके फ्रेंड के घर गए।उसके फ्रेंड के घर पर कोई नहीं था। वो अन्दर जाते ही मुझे एक कमरे में ले गया और जाते ही मुझे किस करना शुरू कर दिया और मेरी गाण्ड दबाने लगा।मैंने कहा- रुक तो.

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लेकिन मेरे दिल में बस उनकी चुदाई का ख्याल था। करीब आधे घंटे बाद चाची सो गईं।मैं थोड़ी हिम्मत करके उनके नज़दीक गया और एक चूची पर हाथ रख दिया थोड़ी देर बाद देखा कि उनकी तरफ से कोई हरकत नहीं हो रही है. इसलिए मैंने भाभी को मना कर दिया और कहा- मुझे कुछ पूछना होगा तो मैं आपको बता दूँगा. तब तो मस्त है पूरा एंजाय कर रही हो।‘तुम बताओ तुम्हारी चार कौन हैं?’‘एक गर्लफ्रेंड थी मेघातुम्हारे यहाँ से जाने के बाद वही सहारा बनी.

जिससे नेहा गर्म होने लगी।नेहा के होंठों पर मैं दुबारा से जोर-जोर से पूरे जोश में चुम्बन कर रहा था और भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।फिर जल्दी ही मैंने नेहा की ब्रा और पैंटी को भी उतार दिया, नेहा बिना कपड़ों के मेरे सामने लेटी हुई थी।मैंने नारियल के तेल को उसके चूचों. उसके चेहरे पर एक शरारत से भरी मुस्कान थी। उसने मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ा और उस पर हाथ फेरने लगी।मैंने कई बार अपने हाथ से अपना लण्ड पकड़ा था. वो लोहे जैसा कड़ा हो चुका था।उसने मुझे भी नंगा कर दिया।मेरा लंड देखते ही वो बोली- इतना लम्बा तो तेरे दोस्त का भी नहीं है। मुझे तेरे लंड से चुदवाने में मजा आएगा।मेरा लंड उसके हाथों में आते ही झटके मारने लगा। वो बहुत कड़ा हो चुका था।उसने कहा- तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा और लम्बा है।इसी बीच मैंने गरम होकर उसके निप्पल को काट लिया.

ताकि कोई मुझे उसके घर में न देख ले।उस रात के बाद हम दोनों का प्यार और भी गहरा हो गया। हम दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाईं.

फिर मेरे गाल को चूम कर अपना मुँह मेरे कान के पास लाईं और शरारती अंदाज़ में बोलीं- वैसे सगीर इतना बुरा भी नहीं था ये. इसी लिए मैं तुमसे छुप रही थी।मैंने आपी की बात सुनी और उनके दोनों हाथों को अपने हाथों में पकड़ कर उनके सिर के ऊपर लाया और दीवार से चिपका कर कहा- तो इससे क्या होता है. जो तुम पहले यहाँ कह कर गई थीं।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !तो उसने कहा- बुद्धू.

जो इस वक़्त उनकी गाण्ड के छेद में था। फिर उनकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उनकी कमर को ज़ोर से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो उनके मुँह से ‘आह. मेरे होंठों और चूची की चुसाई ने उसकी दर्द को काफी हद तक गायब कर दिया था।मैंने भी धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू किया, मैं पूरा लण्ड नहीं निकाल रहा था मुझे डर था कि कहीं वो मना ही ना कर दे।हर धक्के पर उसकी ‘आह’ निकलती ‘आआ आह्ह्ह हहह. जिसे वह तेज़ी से चूसने लगी।तभी मैंने अपना सारा पानी उसके मुँह में उड़ेल दिया.

जब मैं 12 वीं क्लास में पढ़ता था।मैं रोज सुबह तैयार होकर स्कूल जाया करता था. मैंने खुशी खुशी उसकी बात मान ली और अपनी पैंट को अंडरवियर समेत जांघों तक नीचे सरका कर उसकी जगह लेट गया।उसने मेरा लंड हाथ में लेकर एक दो बार हिलाया जिससे मुझे काफी अच्छा लगालेकिन अगले ही पल अचानक उसने मुझे जबरदस्ती दूसरी तरफ पलट दिया और एकदम से मेरे ऊपर आकर गिर गया और उसका लंड सीधा मेरी गांड पर आ लगा।उसने सिसकारी ली-.

जिसमें 10-12 कमरे भी थे, कुछ सिंगल रूम थे और कुछ डबलबेड रूम थे। मेरी गर्लफ्रेण्ड जिसका नाम सोनी (बदला हुआ) है ने एक लहंगा चुनरी पहने हुए थी और उसका हुस्न शादी में आई हुई सभी लड़कियों को फेल कर देने वाला लग रहा था।सोनी का फिगर लिख रहा हूँ. पर वो लगातार मेरी चूत पर धक्के मारे जा रहा था।अब मैं पूरी मस्ती के साथ गाण्ड उठा कर उसके हर धक्कों का जबाव दे रही थी।थोड़ी ही देर बाद मेरा बदन अकड़ने लगा और मैं ‘ओईई. और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड की दरार में फिट हो गया।मेरा लण्ड एकदम सख्त हो कर दर्द करने लगा था.

तो अब उसकी चूत को जीभ डाल कर चाटने लगा।नेहा जोर-जोर से सांस लेने लगी और वो पैरों को फैला कर सिसकारियाँ ले रही थी- ऊऊहह.

तो ये करके देखने में हर्ज ही क्या है और अगर तुम्हारा कोई बिज़नेस में फायदा होता है. प्रिय दोस्तो, आप सबको मेरा प्यार भरा नमस्कार।आज मैं आपके सबके लिए मेरे जीवन की दूसरी आपबीती सुनाने आया हूँ।यह बात उन दिनों की है. यार सगीर यह तो मज़े की चीज़ है।वे यह बोल कर हँसने लगीं।मैंने भी मुस्कुरा कर आपी का साथ दिया।अचानक ही आपी की हँसी को ब्रेक लग गया और उन्होंने घबराए हुए अंदाज़ में घड़ी को देखा।ये वाकिया मुसलसल जारी है।[emailprotected].

मैं तुम्हारी रग-रग से वाक़िफ़ हूँ। मैं जानती हूँ तुम्हारे खबीस दिमाग में क्या चल रहा है।मैंने झेंपते हुए अपने सिर को खुज़ाया और नज़र झुका कर मुस्कुरा दिया। फिर फ़ौरन ही नज़र उठाई और आपी से बोला- आपी यह तो इत्तिफ़ाक़न ही बहुत अच्छा मौका बन गया है, किसी तरह राज़ी कर लो हनी को भी. आपी की बात खत्म हुई तब तक हम दोनों किचन में दाखिल हो चुके थे।आपी ने मेरा हाथ पकड़ा और रेफ्रिजरेटर की साइड पर ले जाते हुए कहा- यहाँ दीवार से लग कर खड़े हो जाओ.

मेरी जॉइंट फैमिली है और मेरे पापा दो भाई हैं।मेरे सारे भाई बाहर नौकरी करते हैं और चाचा जी की केवल एक बेटी है. तो मैं उनके घर में चूल्हे के पास बैठी उसकी दादी से बातें करने लगा। इतने में मेरी जानम भी आ गई और मेरे पास बैठ गई।मैंने अपने मोबाइल में संदेश लिखा- आपको बुरा तो नहीं लगा?उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. जिससे मेरा लंड हर बार थोड़ा-थोड़ा ज्यादा अन्दर जाने लगा था।कुछ ही देर में आपी की कोशिश रंग लाई और उन्होंने जड़ तक मेरा लंड अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया।लेकिन सिर्फ़ एक लम्हें को ही आपी के होंठ मेरे लंड की जड़ तक पहुँच पाते थे और फिर आपी वापस लंड को बाहर निकालना शुरू कर देती थीं।आपी का हाथ मेरे पेट और लंड के दरमियानी हिस्से पर रखा हुआ था.

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और उसकी माँ बुरी तरह से घायल हो गई थी।मैंने उसको दिलासा दिलाई।हम दोनों ने तुरंत कपड़े पहने और अस्पताल की ओर रवाना हुए, पूरा दिन अस्पताल में भागम-भाग करने के बाद जब मैं कमरे पर वापस लौट कर आया तो मुझे टूटे हुए आईने को देखकर ख्याल आया ‘कांच का टूटना शुभ तो होता है.

पर मैं तो किसी और ही दुनिया में था।उसे देखकर मेरी आंखें तो खुली की खुली रह गई थीं। पिंक टॉप और ब्लू शॉर्ट्स में दूध सी सफ़ेद हसीना. अभी मेरा सेफ टाइम है।तो 20-25 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए और बाद में मैंने अपना बचा हुआ माल उसकी चूचियों में झाड़ दिया।वो बड़े प्यार से उसको उंगली से उठा कर चाट रही थी।मैं निढाल होकर उसकी कमर को चूमने लगा. मैंने बात खत्म करके अपने होंठ आपी की गर्दन पर रख दिए।आपी ने मेरी इस हरकत पर हड़बड़ा कर आँखें खोलीं और कूल्हों को पीछे दबाते हुए मेरे हाथ अपने मम्मों से हटाने की कोशिश की और सहमी हुई सी आवाज़ में बोलीं- सगीर पागल हो गए हो क्या.

तो आपी ने अपनी बांहें मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द लपेट लीं।मैंने भी आपी को अपनी बांहों में भर लिया, मैंने कहा- आपी प्लीज़ चुप हो जाओ ना. उस दिन सासू माँ ने ससुर जी को भी मुझे और रूचि को उस विधि से सम्भोग करते हुए दिखाया था तथा अपने घर वापिस जा कर ससुर जी को उसी विधि से सम्भोग करने के लिए कहा था।4. बीएफ न्यू मॉडल’ की आवाज़ निकली जा रही थी।एक-एक करके मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और उसके कपड़े भी उतार दिए।जब मैंने उसे नंगी किया तो एक चीज़ और मुझे बहुत अच्छी लगी कि मैंने उसे एक साल पहले चोदा था और आज भी उसे याद है कि मुझे चूत पर झांट बहुत पसंद हैं, उसकी आज भी झाँटें उगी थीं।मैंने उससे पूछा- ये क्यों?तब उसने बताया- आपको याद हो न हो.

लेकिन मेरी अभी की बारी का क्या होगा?आपी ने एक नज़र बाहर देखा और कहा- अभी क्या करना है तुमने. तुम कभी-कभी बिल्कुल पागल हो जाते हो।मैंने आपी की बात सुन कर शरारत से हँसते हुए कहा- हहेहहे हीए.

जिससे वो एकदम से पगला कर छटपटाने लगी लेकिन मैंने उसको कस कर पकड़ा हुआ था तो वो खुद को छुड़ा नहीं पाई।मैं जैसे-जैसे उंगली की रफ़्तार बढ़ा रहा था। उसका सेक्सी चेहरा गोद में होने की वजह से मेरे चेहरे के ठीक सामने था। वो जोर-जोर से ‘आआ. लेकिन वो अपनी ब्रा कमरे में ही भूल गई थीं।मैं इस बात से अनजान था।मुझे लगा कि चाची देर तक नहाएगीं तो मैं आराम से उनके कमरे में नंगा हो कर उनकी ब्रा अपने लण्ड पर लपेट कर अपने फ़ोन में उनकी फ़ोटो देख-देख कर लौड़ा हिलाने लगा।मैं इतना मस्त हो गया कि मुझे बाथरूम का दरवाजा खुलने की भी आवाज नहीं सुनाई दी।असल में चाची को पता था कि घर में कोई नहीं है. बीस साल की जवानी… उसने रवि को सोफे पर ही पटक दिया और अपना टॉप उतार फेंका।उफ मीना की चूचियाँ… इतनी टाइट थीं कि रवि ने पूरी ताकत से लगा कर मुंह में भर लिया।मीना दर्द से कराहती हुई बोली- जीजू जोर जोर से पियो, मजा आ रहा है।दोनों की कुश्ती जारी थी.

वो भी जवानी की दहलीज पर आ चुका था।वो मेरी हर बात का जवाब अब खुल कर दे रहा था।फिर मैंने उससे पूछा- कल मैंने तेरा लण्ड देखा था। उस पर अभी भी तेरी खाल चढ़ी हुई है. पागल हो गए हो क्या?मैंने आपी का हाथ पकड़ा और अपने ट्राउज़र के ऊपर से ही अपने खड़े लण्ड पर रख कर कहा- आपी ये देखो मेरा बुरा हाल है. मेरा ब्लैक कोबरा जाग गया।वो हैरत से बोली- कितना काला है तेरा!मैंने कहा- अच्छा.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और क्लासरूम ले कर चला आया। क्योंकि क्लासरूम ओपन था.

तो कोई बात समझते ही नहीं हो।अब आपी के लहजे में भी झुंझलाहट पैदा हो गई थी।थोड़ी देर तक ऐसे ही आपी मेरे चेहरे पर नज़र जमाए रहीं और मेरी तरफ से कोई जवाब ना सुन कर. जिसने मेरी वर्षों पुरानी दिल में दबी एक हसरत की चिंगारी को आग का रूप दे डाला।मेरा नाम करन है। जब मैंने बारहवीं के बाद एक विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।कालेज में आने से पहले मेरे मन में कई विचार आए.

वो जिस्म मेरे ऊपर बैठा था और उसने अपने दाँत मेरी गर्दन में गड़ा रखे थे कि जैसे मेरा खून पीना चाहता हो।मैंने उसके सिर के बालों को जकड़ा और ज़रा ताक़त से ऊपर की तरफ खींचा तो मेरी नज़र उसके चेहरे पर पड़ी।वो चेहरा तो मेरी बहन का ही था. इतने दिनों से मुझे तड़पा रही हो और आज जब हाथ आई हो तो मुझसे सबर नहीं होता।इस बात पर उसने खुद ही चैन खोली तो उसका गाउन नीचे गिर गया, मेरे सामने उसके भरे हुए मम्मे थे. तो मुझे आलोक की बांहों में बहुत अच्छा लग रहा था।आलोक ने लाकर मुझे बाथरूम में खड़ा कर दिया और फिर वो मेरे मम्मों से खेलने लगा।इतने में ही बाहर से डोरबेल की आवाज़ आई और हम दोनों डरकर एक-दूसरे से अलग हो गए।मैंने आलोक को कमरे में जाने के लिए बोला और फिर मैं भी बाथरूम से बाहर आकर अपने कमरे में आ गई। वहाँ मैंने घड़ी की तरफ देखा.

पर फ़िर मैंने भी एक तरकीब सोची।मैंने भी उससे तड़पाना चाहा। मैंने अपना ट्राउजर नीचे किया. आपी ने मुझे किस की और नीचे चली गईं।मैं नहा-धो कर कपड़े बदले और बिस्तर पर बैठा ही था कि फरहान ने मुझसे पूछा- आपी मान गईं क्या?तो मैंने कहा- अब मुझसे क्या पूछते हो. तो तुझे पता होना चाहिए कि मैं और मेरी वाइफ दोनों ही खुले हुए हैं और हम दोनों भी काफी ओपन सोच रखते हैं.

बीएफ फिल्म सेक्सी ब्लू फिल्म बीएफ यह गन्दी बात है।लेकिन रमेश सर ने मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया और मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया। मेरी छाती पर हाथ फिराने लगे और मुझे चूमने लगे।मैंने छूटने की कोशिश की. हुस्न जहाँ है।तो वो रोते हुए बोली- ये जानते हुए भी कि मैं किसी और से बहुत बार हमबिस्तर हुई हूँ.

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‘आपी थोड़ी टाँगें और खोलो और पाँव ज़मीन से उठा लो।’मैंने ये कहा तो आपी ने अपने पाँव हवा में उठा लिए और घुटनों को मज़ीद मोड़ते हुए जितनी टाँगें खोल सकती थीं. जहाँ पर यह अनोखी घटना घटी।बात आज से 3 महीने पहले की है। उन दिनों में अपने पुराने गाँव में गया हुआ था जिसकी आबादी करीब 3 हजार लोगों की थी।गाँव में मेरे चाचा चाची, उनके दो बेटे और बहुएँ रहते हैं।यह कहानी उन कहानी उन्हीं दो भाभियों से जुड़ी हुई है।मेरी बड़ी भाभी का नाम रूपाली है. तो हमारा क्या होता?मैंने आपी के कंधों को पकड़ कर उन्हें पीछे किया और उनके चेहरे को फिर से अपने हाथों में भरते हुए कहा- लेकिन आपी इस सबमें मज़ा भी तो बहुत आता है ना.

बच्चा कभी भी जाग सकता है। फटाफट ऐसे ही मेरी मैक्सी ऊपर उठाकर मेरी चूत मार लो। अब जल्दी करो राज। डालो इसे मेरी चूत के अन्दर।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और मैक्सी को ऊपर उठाकर उनकी चूत चाटनी चाही।भाभी- नहीं राज चूत आज नहीं चाटनी. जिसकी वजह से मुझे गांव जाना पड़ा। उधर मेरा स्वागत किया गया।पहले तो थोड़ा नया-नया लगा. बाप और बेटी का बीएफ सेक्सी!’ आपी ने अपनी आँखों को भींचते हुए हल्की आवाज़ में जवाब दिया।मैंने कहा- चलो ना सोहनी बहना जी.

जिस वजह से उसकी खाल पर खिंचाव आ गया था और उसका लण्ड दर्द कर रहा था।मैंने रोहन को बोला- अब तेरा लण्ड खुल चुका है और दो-तीन दिन में ये बिल्कुल ठीक हो जाएगा।तो वो खुश हो गया और बोला- मम्मी थैंक यू.

तो मैं डर गया।उस समय दिन के 3 बज रहे थे, मैं आंटी के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चला आया।आंटी अपने कमरे में चली गईं।मैं अपने कमरे में अपना दरवाजा बन्द करके सोच रहा था कि आंटी कहीं अंकल को न बता दें।लेकिन आंटी ने ऐसा नहीं किया।दूसरे दिन मैंने आंटी से ‘सॉरी’ बोला और कहा- आंटी जी मुझे आपको ऐसा नहीं बोलना चाहिए था।आंटी बोलीं- कोई बात नहीं. मैंने पढ़ी थी और उस स्टोरी को पढ़ने के बाद मैंने नीचे दी गई मेल पर मेल भी की थी और स्टोरी की तारीफ़ भी की थी.

मेरी गांड फट गई है।मैंने उसकी बात को अनसुनी कर दी और उसके बदन को सहलाता और मसलता रहा।थोड़ी देर बाद उसको उसकी वासना ने वापस से घेर लिया और वो सिसकारी लेने लगी और फिर मैं हलके दबाव से उसकी गांड को मारने लगा।बहुत ही ज्यादा कसी हुई गांड थी साली की. तो मैंने उसको नीचे लिटा लिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसकी रगड़ कर जोरदार चुदाई शुरू कर दी।कुछ ही देर में बाद मैं झड़ना शुरू हुआ. पर उसकी चैन नहीं मिल रहा था।उसके गाउन को मैं ताक़त लगा कर खींचने लगा.

तो में भी अपना लण्ड आपी की रानों के दरमियान अन्दर तक ले जाता और फरहान लण्ड बाहर निकालता.

इस तरह का व्यवहार उसको पीड़ा पहुँचाता है।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!माधुरी की शर्म अब मिट चुकी थी. इसलिए मेरी भी जांघें नंगी ही थीं। जब मेरी जाँघों से भाभी की नर्म मुलायम जाँघों का स्पर्श हो रहा था. जिसका एक-एक कथन बिल्कुल सच है और इसके साथ-साथ मैं ये भी उम्मीद करता हूँ कि जितना मजा मैंने चुदाई करते हुए लिया है.

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तो मैंने सोने का नाटक कर लिया।वो आ कर मेरे कमरे में सफाई करने लगी और जब वो मेरे बिस्तर के पास आए तो मैंने करवट बदल दी. मैंने अब उसके कपड़े पूरे निकाल दिए और उसे पलंग के ऊपर लिटा दिया।उसने भी अपनी टाँगें फैला कर जैसे मुझे चूत में हस्तक्षेप करने की इजाजत दे दी। मैंने अपना हाथ उसकी कमर के ऊपर से ले कर उसके चूचों तक फेर लिया और फिर चूचों से ले कर चूत की दरार तक जैसे कि एक लकीर सी बना दी।वाह. और अपनी आँखें बंद कर लीं।मैंने धीरे से उनके गाउन के बटन खोले वो एकदम जन्नत की हूर लग रही थीं।पहले मुझे उनकी गुलाबी चूत के दर्शन हुए, उनकी गुलाबी चूत पर एक भी बाल नहीं था।फिर उनकी चूचियों के दर्शन हुए.

उनके गुलाबी मम्मों पर हरी नीली रगों का जाल था और एक-एक रग साफ देखी और गिनी जा सकती थी।मुकम्मल गोलाई लिए हुए आपी के मम्मे ऐसे लग रहे थे. और हम दोनों बिस्तर की तरफ चल दिए।बिस्तर पर बैठ कर मैंने सिरहाने के नीचे से डिल्डो निकाला।यह डिल्डो भूरे रंग का था. लेकिन वो नहीं जागीं, शायद वो तब भी नींद में थीं।मैंने भी धीरे से दो-तीन झटके लगातार मारे और पूरा लण्ड मौसी की चूत में पेल दिया।शायद वो मुझे मौसा जी समझ रही थीं।मैं भी बिना बोले लगा रहा।वो मादक सिसकारी लेने लगीं, उनके मुँह से ‘आह.

पर भाभी ज्यादा सुन्दर लग रही हैं।भैया कहते- चिंता मत कर, तेरे लिए भी सुन्दर ही लड़की लाएंगे।मैं मन में सोचने लगा कि मुझे तो भाभी ही दे दो।एलबम देखने के बाद सब सोने की तैयारी करने लगे. मुझे जन्नत का मजा दे रहे थे।रायपुर की खाली सड़क पर हम दोनों की रासलीला चल रही थी।मैंने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर उसके चूचे मसल दिए। वो और गरम हो गई. पर मैंने भी थोड़ा सा ब्रेक लगा कर उसकी उत्तेजना को कम कर दिया और फिर से बुर को चूसने लगा।फिर से पूरे कमरे में पायल की ‘आह्ह्ह्ह.

मैंने उसका फ़ायदा उठाया और उनसे पूछा- यह किसका है?वो मज़ाक में बोलीं- आपका ही होगा।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !मैंने हिम्मत बाँध कर फिर उनसे पूछा- यह इतना पुराना है और अभी तक रखा हुआ है।तो वो गुस्से में बोलीं- आप इतना क्यों हमसे पूछ रहे हैं. साथ ही वो साला चंदू मेरे पीछे से अपना लौड़ा मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा।फिर शेरा बोला- आज तुझे नई जगह ले जाएंगे हम दोनों।मैंने पूछा- कहाँ?तो बोला- तू उसकी चिंता ना कर.

हम धीरे-धीरे चरम की तरफ बढ़ रहे थे, हमारी घुटी-घुटी सी आवाजें हम दोनों की काम ज्वाला को भड़का रही थीं ‘हिस्स.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विकी है, आज आपको मैं अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूँ।बात दो साल पहले की है. हिंदी बीएफ चुदाई फिल्मजाओ आप अपने ज़ख़्म और खून साफ करो और मैं अपना कर लेता हूँ।आपी ने भी हँस कर मुझे देखा और मेरे होंठों पर एक किस करके खड़ी हो गईं।मैं भी उनके साथ खड़ा हुआ. ओपन मराठी बीएफतो मैं उनके घर में चूल्हे के पास बैठी उसकी दादी से बातें करने लगा। इतने में मेरी जानम भी आ गई और मेरे पास बैठ गई।मैंने अपने मोबाइल में संदेश लिखा- आपको बुरा तो नहीं लगा?उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. जब मैं वैशाली को तैरना सिखाने के बहाने चोद भी पाऊँ।गाँव में एक दिन मुखिया के घर शादी थी.

’मेरे ऐसा कहते ही वो मुझसे लिपट गई और बोली- कोई किसी से इतना प्यार कैसे कर सकता है।वो चिंटू से पहले ही परेशान रहती थी.

और बाद में उसे पछताना पड़े।उस दिन से उसके और मेरे बीच में कोई बात नहीं हुई और कोई खेल नहीं हुआ है।आज उस बात को ढाई साल हो गए हैं, करीना अपने जिंदगी में खुश है और मैं अपनी जिन्दगी में खुश हूँ।मैंने आज तक कभी सेक्स नहीं किया है और आज भी अकेला हूँ।तो दोस्तो, यह थी मेरी और करीना की कहानी जिसमें हमारा अधूरा ही सेक्स हो पाया। आपको यह कहानी कैसी लगी. जिससे लण्ड को उनकी चूत तक तक आराम से ले जाया जा सके।मैं कुछ देर तक ऐसे ही लेटा रहा।मौसी भी सो गई थीं या जाग रही थीं. पर मैंने मन में ठान लिया था कि अब इस आंटी को तो पक्का पटाऊँगा।ऐसा लग रहा था कि मुझे देख कर वो कुछ इम्प्रेस हो गई हो.

मुझे मेल करें।यह मेरी लाइफ का पहला अनुभव है तो शायद उत्तेजनावश मैं कोई ग़लती कर गया होऊँ. तब मेरे पास ही अक्सर गणित के सवाल हल करने के लिए आता रहता था, कई बार तो हमारे घर पर ही सो जाता था।अब मेरी शादी हो गई और मैं मुंबई आ गई। मेरे पति बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। मेरे सास-ससुर ने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनकी बहू हूँ. इसी का नाम अनुभव है दोस्तो!मेरे पूरे बदन में मजे के झोंके उठ रहे थे… मंजू लण्ड को जड़ तक चूसती और फिर ऊपर टोपे तक जाती।वो बार-बार ऐसे ही कर रही थी।फिर उसने मेरे आंडों को भी चूसा.

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वो वाक़यी जबरदस्त बदन की मालकिन थी।मैं अपने हाथ से उसकी नर्म और गोरी चूचियाँ दबाने लगा। मैं एक चूची चूस रहा था और दूसरी को अपने हाथों से मसल रहा था और वो ‘अअआ आआ आहहहह. तो कभी उसकी चूचियों को काटता और चूसता रहा।तभी मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं. मुझे मज़ा आ रहा था।मैंने उसके हाथ को और कस के पकड़ा और उसके चेहरे की ओर देखा।वो बस मुझे ही देख रही थी.

’ निकली और उन्होंने आँखें बंद करते हुए अपनी गर्दन पीछे को ढलका दी। उसके साथ ही जैसे सुकून सा छा गया.

जो मेरे शहर अजमेर के पास है।मेरे नहीं जाने के कारण अजमेर से मेरे पापा और मम्मी उनके साथ चले गए।अब यहाँ मैं, मेरी प्रेग्नेंट पत्नी तनु मेरे बड़ी साली अंजलि और उसकी छोटी लड़की नेहा ही थे।मेरी साली जब भी मेरे आस-पास रहती थी.

जिससे मेरा चेहरा रोहन के लण्ड के ऊपर था। मेरे गाउन का ऊपर का बटन खुला हुआ था. एक बार फिर आपकी अपनी प्यारी चुदक्कड़ जूही आपके लिए ले कर आई है एक और हसीन पलंगतोड़ चुदाई की मजेदार घटना।आशा है आपको यह कहानी भी उतनी ही पसंद आएगी. बीएफ सेक्सी बीएफ सेक्सी चुदाईमैं कहीं नहीं जा रही।उसने मुझे होंठों से किस किया।हम दोनों होटल से बाहर आए।उसने कहा- सिटी में ड्राइव कर लोगे?मैंने कहा- यहाँ आप कर लो। बाहर निकलते ही मैं चला लूँगा।उसने ‘ओके’ बोला और हम दोनों सिटी से बाहर आ गए।बाहर आकर उसने मुझे कार दी और मैं ड्राइव करने लगा।करीबन 50 किलोमीटर चलते ही उसने कहा- किसी होटल पर रोक लेना.

तो मैंने उसे वहीं पर पकड़ लिया और उसे बाथटब में बिठा कर पानी को चालू कर दिया।बाथटब अब पानी से भर रहा था और हम दोनों नंगे बाथटब में एक-दूसरे की बाँहों में बाहें डाल कर बैठे हुए थे।मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर घुमानी शुरू कर दी थी। अर्श मेरी इस हरकत से काफी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी।वो बोली- उई धीरे चोद साले. वो मेरे लिए कॉफी बना कर लाई और बोली- पहले से काफ़ी ज्यादा एक्सपर्ट हो गए हो. अपना मोटा हथियार और मेरी प्यास बुझा दे।मैं भी इसी के इंतज़ार में था.

फिर कुछ नहीं बोली।रात में हमने खाने का ऑर्डर दिया और मैंने कमरे में अपने बैग से शराब की बॉटल निकाली और अपना पैग बना लिया. कभी मेरे होंठ पीता। फिर धीरे-धीरे वो मेरी गर्दन चूमने लगा और फिर धीरे से मेरे कान की लौ को चूमा।उसके कान चूमते ही मुझे एकदम करेंट सा लग गया, मैंने उसको अपने से अलग कर दिया।उसने मुझे दुबारा पकड़ा और किस करने लगा.

मगर मेरी लिखी हुई है और उन्होंने मेरे कहने पर ही ये कहानियाँ अपने नाम से आप तक पहुँचाई हैं।क्योंकि यह कहानी भाभी की जुबान में ज्यादा अच्छी लगेगी। अब इसके आगे की कहानी लिख रहा हूँ वो भी पायल भाभी की जुबानी है.

30 बजे जयपुर प्लेटफार्म पर पहुँच गए। हमने अपना सामान ट्रेन से उतारा और प्लेटफार्म पर मैसूर एक्सप्रेस का इन्तजार करने लगे।जयपुर से 7. आज आपको मेरी कैसे याद आ गई? आज आपकी सेक्रेटरी कहाँ चली गई?मैं कुछ नहीं बोला और फिर लण्ड को धीरे से एक और झटका मारा. घर में एक ओल्डमोंक की बोतल रखी हुई है। मेरे पति फौज से छुट्टी आते वक्त अक्सर दो-चार बोतल खुद के लिए लेकर आते हैं। उन्हीं से एक बची हुई है। मैं उन्हें बोल दूँगी कि घर में काम करते हुए फर्श पर गिरने से बोतल फूट गई थी।अब मैं खुशी के मारे पागल हो रहा था कि आज तो शराब और शवाब दोनों साथ ही मिल गए हैं।उसके बाद मैं और रोहन टीवी देखने लगे।मंजू ने हम तीनों के लिए खाना बनाया.

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सभी मसाज कराने आते हैं।हमारे पार्लर में सात लोग काम करते हैं, एक हमारी मैडम. फिर जो हुआ वो एक कुवांरी और सील पैक लौंडिया की चूत चुदाई तक होने वाला था. लेकिन इतना ज्यादा मजा आएगा कि तुम भूल जाओगी कि दर्द भी हुआ था।उसकी तरफ़ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं उसको नीचे लिटा दिया और उसकी गाण्ड में उंगली घुमाने लगा और एक उंगली को अन्दर डाल दिया।टाइट थी उसकी गाण्ड.

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अब अगर अन्दर भी डाल दूँ तो क्या फ़र्क़ पड़ता है।‘बहुत फ़र्क़ पड़ता है इससे सगीर. उसे जगह-जगह चूमने लगा।उसकी सांसें तेज होती जा रही थीं। फिर मैंने उसका टॉप उतारा। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी. मैं बात करवाता हूँ।मैंने तुरंत एक दोस्त को कॉल की और कॉल कांफ्रेंस पर ट्रान्सफर की.

आप ना ही पूछो!’मैं मुस्कुरा दिया।‘अब मुझे ये बताओ कि बाजी के जिस्म में ऐसी कौन सी चीज़ है. हाँ?मैं अब्बू की झाड़ सुन कर दिल ही दिल में अपने आपको कोस रहा था कि इस टाइम पर नीचे क्यों उतरा।अम्मी ने मेरी कैफियत भाँप कर मेरी वकालत करते हुए अब्बू से कहा- अच्छा छोड़ो ना.

तो इतना गर्म क्यों किया।सिर्फ इतना सुनकर मेरा पारा गर्म हो गया गुस्से में मैंने दोनों गालों पर 10-12 थप्पड़ और जमा दिए और उसके बाल पकड़ कर उसे बिस्तर पर उल्टा पटक दिया।एक स्केल.

बस आप मुझे किसी भी तरह रात को कमरे के अन्दर घुसा लेना।मैंने उसे साफ मना कर दिया कि मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी. तो मैंने उसको दो बार चोदा।फिर मैं वापस जयपुर आ गया।थोड़े दिन बाद उसने बात करना बंद कर दिया और बोली- मेरी शादी होने वाली है. देखो बाबा जी का लिंग तुम्हारे अन्दर एक प्यारी सी गुड़िया का बीज छोड़कर आएगा.

अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने थे, मैंने उनके गाल पर धीरे से चूमा।उन्होंने मुझे धीरे से हटाने की कोशिश की. तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है। मैंने बहुत से आदमियों को पेशाब करते समय देखा है. बस उसको देखते ही मुझे लगा कि जैसे मुझे मेरे सपनों की रानी मिल गई है।मैं उसे कनखियों से देखने लगा.

तो मैंने इस बार कुछ ज़्यादा ही ज़ोर लगा दिया।वो दर्द से तड़फते हुए जोर-जोर से चीखने लगीं- मम्मी.

बीएफ फिल्म सेक्सी ब्लू फिल्म बीएफ: सम्पादक जूजामैं झुंझलाते हुए ही बाहर गया और अब्बू के गाड़ी बाहर निकाल लेने के बाद दरवाज़ा बंद करके सीधा अपने कमरे में ही चला गया।मेरा मूड बहुत सख़्त खराब हो चुका था. उसके लण्ड को मैं अपने हाथ से ही सहला रही थी।वो बोला- मुँह में ले लो न!मैंने मना किया.

मम्मी और आंटी बातें करने लगीं। थोड़ी देर बाद बेबी रोने लगा और वो चुप नहीं हो रहा था. पर बारिश होने की वजह से समय का पता ही नहीं चल रहा था।पापा ने मुझे 7 बजे उठाया और कहा- हमें गुजरात के लिए निकलना है। मुझे बहुत दु:ख हुआ कि ये सब कितनी जल्दी हो गया।हमने सब कुछ कर लिया था. तो हमारी शक्ल देख कर हँसते हुए बोलीं- अपने मुँह तो बंद कर लो ज़लीलो.

तो मैंने ‘हाँ’ कर दिया था।फिर शादी की तैयारी शुरू हो गईं। मैं देखने में आज बहुत सुन्दर लग रही थी.

मुझे इतना अधिक पसंद था कि मैं अपनी पत्नी को जब भी चोदता तो अंजलि समझ कर ही चोदता था।मेरी पत्नी तनु और अंजलि की शक्ल लगभग मिलती-जुलती थी. फिर बाद में मान गया और उससे पैग ले लिया।धीरे-धीरे हम लोग 4-4 पैग पी गए। पीते-पीते मैंने ध्यान दिया कि बूढ़ा बड़े गौर से मेरे होंठों को ललचाई नजरों से घूर रहा है. अभी नहीं।दूध गर्म था तो गिलास लेकर कमरे में आ गया और बैठ कर दूध पीने लगा।कुछ देर बाद मोनिका को देख कर बोला- आओ.